Recycling Industry: रीसाइक्लिंग उद्योग पर GST की मार, पर्यावरण और आर्थिक संकट के बीच झूल रहे

प्लास्टिक बोतल इकट्ठा करता मजदूर
Recycling Industry: भारत का रीसाइक्लिंग उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है. जहां एक ओर देश हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से बढ़ने का दावा कर रहा है, वहीं GST स्ट्रक्चर की वजह से रीसाइक्लिंग उद्योग आज पर्यावरण जिम्मेदारी और आर्थिक संकट के बीच झूल रहा है.
Recycling Industry: PET (Polyethylene Terephthalate) स्क्रैप पर GST 18% है, जबकि रीसाइकल्ड PET फाइबर पर केवल 5%. इस जीएसटी दर की वजह से रीसाइक्लर्स अपने इनपुट पर जितना कर चुकाते हैं, उससे कम अपने आउटपुट पर वसूल पाते हैं. जिससे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के रूप में उनकी पूंजी फंस जाती है. MSME के लिए यह गंभीर कैश-फ्लो संकट पैदा करता है. धीमी रिफंड प्रक्रिया समस्या को और बढ़ा देती है.
रीसाइक्लर का क्या कहना है?
एक रीसाइक्लर ने बताया, “हम GST कानूनों का अनुपालन करते हैं, लेकिन ITC की वास्तविकता की गारंटी कैसे दें? हम स्क्रैप पर करों सहित कीमत चुकाते हैं, और महीनों बाद GST विभाग से नोटिस मिलता है कि जिससे हमने स्क्रैप खरीदा वह बोगस था. ITC को ब्याज और जुर्माने के साथ उलटना पड़ता है.”
CSE की रिपोर्ट क्या कहती है?
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की 2025 रिपोर्ट “रिलैक्स द टैक्स” के अनुसार, अनौपचारिकता भारत के रीसाइक्लिंग उद्योग पर हावी है – कागज और कांच में 95%, प्लास्टिक में 80%, ई-कचरे में 90%, और धातुओं में 65%. यह रिसाव वार्षिक ₹65,300 करोड़ की संभावित GST राजस्व हानि में तब्दील होता है, जबकि औपचारिक रीसाइक्लिंग से केवल ₹30,900 करोड़ एकत्र होता है. सुधार के बिना, यह असंतुलन 2035 तक दोगुना हो सकता है. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने रीसाइक्लिंग उद्योग के GST पर जो अध्ययन किया है, उसके अनुसार अगर कर संरचना में बदलाव किया जाता है, तो 2035 तक 1.8 लाख करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है – केवल ठोस अपशिष्ट से निपटने के तरीके में कुछ बुनियादी सुधार शुरू करके.
प्रमुख सिफारिशें:
स्क्रैप पर GST को 18% से घटाकर 5% करना – उलटी शुल्क संरचना को ठीक करना और कर चोरी के प्रोत्साहन को कम करना.
रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) लागू करना – रीसाइक्लर्स को सीधे सरकार को GST देना होगा, कागजी डीलर चेन समाप्त होगी.
स्क्रैप के लिए अलग कर श्रेणियां बनाना – अनौपचारिक क्षेत्र से पुराने स्क्रैप के लिए 1% GST दर.
रिफंड प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना – छोटे रीसाइक्लर्स के कैश-फ्लो संकट को कम करना और समय पर ITC उपयोग बढ़ाना.
अरबों निजी निवेश खुल सकते हैं : उद्योग विशेषज्ञ
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इन कर विकृतियों को ठीक करने से अरबों निजी निवेश खुल सकते हैं और रीसाइक्लिंग में दस लाख से अधिक नई हरित नौकरियां पैदा हो सकती हैं. CSE के अनुमान दिखाते हैं कि सुधार – विशेष रूप से कम स्क्रैप दरें और तेज रिफंड – औपचारिक रीसाइक्लिंग क्षमता दोगुनी कर सकते हैं और हजारों टन कचरे को लैंडफिल से बचा सकते हैं. उद्योग और विशेषज्ञों का संदेश स्पष्ट है: वर्तमान कर डिजाइन औपचारिक रीसाइक्लिंग को हतोत्साहित करता है, तरलता खत्म करता है, और अनुपालन करने वालों को दंडित करता है. कम स्क्रैप दरों, त्वरित रिफंड, और कुशल RCM के साथ एक युक्तिसंगत GST प्रणाली यह असंतुलन उलट सकती है.
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लेखक के बारे में
By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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