Recycling Industry: रीसाइक्लिंग उद्योग पर GST की मार, पर्यावरण और आर्थिक संकट के बीच झूल रहे
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 25 Oct 2025 8:36 PM
प्लास्टिक बोतल इकट्ठा करता मजदूर
Recycling Industry: भारत का रीसाइक्लिंग उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है. जहां एक ओर देश हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से बढ़ने का दावा कर रहा है, वहीं GST स्ट्रक्चर की वजह से रीसाइक्लिंग उद्योग आज पर्यावरण जिम्मेदारी और आर्थिक संकट के बीच झूल रहा है.
Recycling Industry: PET (Polyethylene Terephthalate) स्क्रैप पर GST 18% है, जबकि रीसाइकल्ड PET फाइबर पर केवल 5%. इस जीएसटी दर की वजह से रीसाइक्लर्स अपने इनपुट पर जितना कर चुकाते हैं, उससे कम अपने आउटपुट पर वसूल पाते हैं. जिससे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के रूप में उनकी पूंजी फंस जाती है. MSME के लिए यह गंभीर कैश-फ्लो संकट पैदा करता है. धीमी रिफंड प्रक्रिया समस्या को और बढ़ा देती है.
रीसाइक्लर का क्या कहना है?
एक रीसाइक्लर ने बताया, “हम GST कानूनों का अनुपालन करते हैं, लेकिन ITC की वास्तविकता की गारंटी कैसे दें? हम स्क्रैप पर करों सहित कीमत चुकाते हैं, और महीनों बाद GST विभाग से नोटिस मिलता है कि जिससे हमने स्क्रैप खरीदा वह बोगस था. ITC को ब्याज और जुर्माने के साथ उलटना पड़ता है.”
CSE की रिपोर्ट क्या कहती है?
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की 2025 रिपोर्ट “रिलैक्स द टैक्स” के अनुसार, अनौपचारिकता भारत के रीसाइक्लिंग उद्योग पर हावी है – कागज और कांच में 95%, प्लास्टिक में 80%, ई-कचरे में 90%, और धातुओं में 65%. यह रिसाव वार्षिक ₹65,300 करोड़ की संभावित GST राजस्व हानि में तब्दील होता है, जबकि औपचारिक रीसाइक्लिंग से केवल ₹30,900 करोड़ एकत्र होता है. सुधार के बिना, यह असंतुलन 2035 तक दोगुना हो सकता है. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने रीसाइक्लिंग उद्योग के GST पर जो अध्ययन किया है, उसके अनुसार अगर कर संरचना में बदलाव किया जाता है, तो 2035 तक 1.8 लाख करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है – केवल ठोस अपशिष्ट से निपटने के तरीके में कुछ बुनियादी सुधार शुरू करके.
प्रमुख सिफारिशें:
स्क्रैप पर GST को 18% से घटाकर 5% करना – उलटी शुल्क संरचना को ठीक करना और कर चोरी के प्रोत्साहन को कम करना.
रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) लागू करना – रीसाइक्लर्स को सीधे सरकार को GST देना होगा, कागजी डीलर चेन समाप्त होगी.
स्क्रैप के लिए अलग कर श्रेणियां बनाना – अनौपचारिक क्षेत्र से पुराने स्क्रैप के लिए 1% GST दर.
रिफंड प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना – छोटे रीसाइक्लर्स के कैश-फ्लो संकट को कम करना और समय पर ITC उपयोग बढ़ाना.
अरबों निजी निवेश खुल सकते हैं : उद्योग विशेषज्ञ
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इन कर विकृतियों को ठीक करने से अरबों निजी निवेश खुल सकते हैं और रीसाइक्लिंग में दस लाख से अधिक नई हरित नौकरियां पैदा हो सकती हैं. CSE के अनुमान दिखाते हैं कि सुधार – विशेष रूप से कम स्क्रैप दरें और तेज रिफंड – औपचारिक रीसाइक्लिंग क्षमता दोगुनी कर सकते हैं और हजारों टन कचरे को लैंडफिल से बचा सकते हैं. उद्योग और विशेषज्ञों का संदेश स्पष्ट है: वर्तमान कर डिजाइन औपचारिक रीसाइक्लिंग को हतोत्साहित करता है, तरलता खत्म करता है, और अनुपालन करने वालों को दंडित करता है. कम स्क्रैप दरों, त्वरित रिफंड, और कुशल RCM के साथ एक युक्तिसंगत GST प्रणाली यह असंतुलन उलट सकती है.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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