RBI: बड़े डिजिटल पेमेंट पर लग सकता है 1 घंटे का 'होल्ड', धोखाधड़ी रोकने के लिए 4 नए प्रस्ताव

आरबीआई (फोटो: सोशल मीडिया )
RBI: RBI के प्रस्ताव के अनुसार, ₹10,000 से अधिक के अकाउंट-टू-अकाउंट ट्रांसफर को प्रोसेस होने से पहले 1 घंटे तक रोका जा सकता है. इस दौरान ग्राहकों के पास ट्रांजेक्शन रद्द करने का विकल्प होगा. इसके अलावा, 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 'ट्रस्टेड पर्सन' ऑथेंटिकेशन और खातों में ₹25 लाख की सालाना क्रेडिट सीमा जैसे सुझाव भी दिए गए हैं. इन प्रस्तावों पर हितधारक 8 मई, 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं.
RBI: नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़ों के मुताबिक, डिजिटल धोखाधड़ी 2021 के ₹551 करोड़ से बढ़कर 2025 में ₹22,931 करोड़ तक पहुंच गई है. चौंकाने वाली बात यह है कि ₹10,000 से ऊपर के लेनदेन कुल धोखाधड़ी की वैल्यू का 98.5% हिस्सा हैं. इसी को देखते हुए RBI ने सुरक्षा के घेरे को मजबूत करने का प्रस्ताव दिया है.
RBI के 4 प्रमुख सुरक्षा प्रस्ताव: क्या बदलेगा आपके लिए?
- ₹10,000 से ऊपर के पेमेंट पर 1 घंटे की देरी (Lag Time)
- नियम: ₹10,000 से अधिक के ट्रांजेक्शन को 1 घंटे के लिए ‘होल्ड’ पर रखा जाएगा.
- फायदा: इससे धोखेबाजों द्वारा बनाए गए मानसिक दबाव (Urgency) को तोड़ा जा सकेगा और पीड़ित को सोचने का समय मिलेगा.
- छूट: मर्चेंट पेमेंट, ई-मेंडेट, और ‘व्हाइटलिस्ट’ किए गए संपर्कों को इससे छूट मिल सकती है.
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए ‘ट्रस्टेड पर्सन’ (Trusted Person)
- 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और दिव्यांगों के लिए ₹50,000 से अधिक के ट्रांजेक्शन हेतु किसी भरोसेमंद व्यक्ति (नॉमिनी) की अनुमति अनिवार्य हो सकती है.
- ₹25 लाख की सालाना क्रेडिट लिमिट
- व्यक्तिगत और छोटे व्यावसायिक खातों में सालाना ₹25 लाख से अधिक जमा होने पर उसे ‘शैडो क्रेडिट’ में रखा जाएगा. बैंक को ट्रांजेक्शन की वैधता साबित करने के बाद ही यह पैसा खाते में दिखेगा.
- ‘किल स्विच’ (Kill Switch)
- एक ऐसा फीचर जिससे ग्राहक एक क्लिक में अपने बैंक खाते के सभी डिजिटल पेमेंट चैनलों को तुरंत बंद कर सकेंगे. यह सुविधा वर्तमान में सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में प्रचलित है.
चुनौतियां और चिंताएं
RBI ने स्वीकार किया है कि इन बदलावों से कुछ समस्याएं भी आ सकती हैं यह ‘तत्काल भुगतान’ के मूल सिद्धांत के विपरीत है. सामान्य यूजर्स के लिए 1 घंटे की देरी भ्रम पैदा कर सकती है. मुमकिन है कि धोखेबाज अब पीड़ितों पर ट्रांजेक्शन को ‘व्हाइटलिस्ट’ करने का दबाव बनाने लगें.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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