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RBI Monetary Policy: ब्याज दरों में नहीं मिली राहत, RBI ने रेपो रेट 4% पर बरकरार रखा

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
RBI Governor Shaktikanta Das
RBI Governor Shaktikanta Das
File

RBI Monetary Policy Review Meeting EMI Loan Interest rate मुंबई : रिजर्व बैंक (RBI) की नव-गठित मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में फैसला किया गया कि नीतिगत दरों को 4 फीसदी पर बरकरार रखा जायेगा. उम्मीदों के अनुसार ही रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज इसकी घोषाणा कर दी. कोरोनावायरस संक्रमण के कारण आर्थिक संकट झेल रहे कंपनियों, बैंकों और व्यवसायी सहित आम लोगों को भी रेट कट (Rate Cut) की उम्मीद थी. कई विशेषज्ञों का मानना था कि आर्थिक मजबूती के लिए आरबीआई रेपो रेट (Repo Rate) में कुछ कटौती कर सकता है. हालांकि बढ़ती हुई मुद्रास्फीति के कारण नीतिगत दरों को यथावत रखे जाने का भी अनुमान जताया गया था.

एमपीसी की यह बैठक पहले 29 सितंबर से एक अक्टूबर के दौरान होने वाली थी. हालांकि नये स्वतंत्र सदस्यों की नियुक्ति में देरी के कारण बैठक का समय नये सिरे से तय किया गया. सरकार ने अब तीन प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों आशिमा गोयल, जयंत आर वर्मा और शशांक भिडे को आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली एमपीसी का सदस्य नियुक्त किया है.

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रिजर्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 4 प्रतिश्त पर बरकरार रखा है. आरबीआई आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए उदार रुख बनाये रखेगा. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारतीय अर्थव्यवस्था निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है. अर्थव्यवस्था में पहली तिमाही में आई गिरावट पीछे छूट चुकी है, स्थिति में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं.

दास ने कहा कि अंकुश लगाने के बजाय अब अर्थव्यवस्था को उबारने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है. चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही तक मुद्रास्फीति के तय लक्ष्य के दायरे में आ जाने का अनुमान है. जीडीपी चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही तक संकुचन के रास्ते से हटकर फिर से वृद्धि के रास्ते पर आ सकती है. उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष की पहली छमाही के धीमे सुधार को दूसरी छमाही में गति मिल सकती है. तीसरी तिमाही से आर्थिक गतिविधियां बढ़ने लगेंगी.

उद्योग संगठनों को ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद

विशेषज्ञों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति में तेजी के मद्देनजर नीतिगत दर में कमी नहीं कर सकता है. हालांकि उद्योग संगठनों का विचार था कि रिजर्व बैंक को कोविड-19 महामारी के कारण अर्थव्यवस्था के सुस्त पड़ने की गंभीर चुनौतियों के मद्देनजर नीतिगत ब्याज दरों में कमी का अपना रुख बनाये रखना चाहिए.

यूबीएस सिक्योरिटीज इंडिया की अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन ने कहा था कि खुदरा मुद्रास्फीति (सीपीआई) पिछली दो तिमाहियों (मार्च और जून 2020) में आरबीआई के ऊपरी सीमा छह प्रतिशत से अधिक रही है. इसके सितंबर तिमाही में भी छह प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है. जैन का अनुमान है कि रिजर्व बैंक नीतिगत दर को यथावत रखेगा.

क्या कहा था आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने पहले कहा था, हालांकि मौद्रिक नीति से संबंधित उपाय करने का विकल्प है, लेकिन इसे आगे आ सकने वाली अप्रत्याशित परिस्थिति के लिये बचाकर रखना उचित होगा. मनीबॉक्स फाइनेंस के सह संस्थापक एवं सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मयुर मोदी ने कहा कि छोटी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को कार्यशील पूंजी तथा वृद्धि दोनों मोर्चे पर तरलता से संबंधित दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अगस्त में हुई पिछली बैठक में नीतिगत दर को यथावत रखा था. हालांकि उससे पहले फरवरी के बाद से रिजर्व बैंक नीतिगत दर में 1.15 अंक की कटौती कर चुका है.

Posted By: Amlesh Nandan

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