RBI Monetary Policy: फरवरी में क्या महंगा होगा लोन? ब्याज दरों को लेकर आरबीआई लेगी फैसला,जानिए एक्सपर्ट की राय

Published by : Madhuresh Narayan Updated At : 05 Feb 2024 9:22 AM

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RBI Monetary Policy: रिजर्व बैंक ने लगभग एक साल से अल्पकालिक ऋण दर या रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा है. इसे आखिरी बार फरवरी 2023 में 6.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया गया था.

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RBI Monetary Policy: अंतरिम बजट (Interim Budget 2024) के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के द्वारा द्विमासिक मौद्रिक नीति की बैठक होने वाली है. बैठक छह फरवरी को होने वाला है. इसका आयोजन तीन दिनों तक होगा. आठ फरवरी को रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) बैठक के परिणामों की घोषणा करेंगे. अब बताया जा रहा है कि शीर्ष बैंक एक बार फिर से ब्याज दरों को पहले की तरह स्थिर रख सकती है. बता दें कि इससे पहले साल 2023 के फरवरी में बैंक के द्वारा ब्याज दरों में बदलाव किया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय बैंक इस सप्ताह अपनी आगामी द्विमासिक मौद्रिक नीति में नीतिगत दरों में कोई बदलाव शायद ही करे, क्योंकि खुदरा मुद्रास्फीति अब भी संतोषजनक दायरे के ऊपरी स्तर के करीब है. रिजर्व बैंक ने लगभग एक साल से अल्पकालिक ऋण दर या रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा है. इसे आखिरी बार फरवरी 2023 में 6.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया गया था. खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई, 2023 में 7.44 प्रतिशत के उच्चस्तर पर थी और उसके बाद इसमें गिरावट आई है. हालांकि, यह अब भी अधिक ही है.

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दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति 5.69 प्रतिशत

खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर, 2023 में 5.69 प्रतिशत थी. सरकार ने रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत के दायरे में रखने की जिम्मेदारी सौंपी है. आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन की बैठक छह फरवरी को शुरू होगी. गवर्नर शक्तिकांत दास आठ फरवरी को समिति के फैसले की घोषणा करेंगे. बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने अनुमान जताया कि एमपीसी दर और रुख, दोनों में यथास्थिति बनाए रखेगी. उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि दिसंबर के आंकड़ों के मुताबिक मुद्रास्फीति अब भी ऊंची है और खाद्य पक्ष पर दबाव है.

अगस्त में होगी दरों में कटौती

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति कम होने का अनुमान है, हालांकि इसके लिए मानसून का रुख महत्वपूर्ण होगा. उन्होंने कहा कि हमें आगामी समीक्षा में दरों या रुख में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है. अगस्त, 2024 में जाकर ही दर में कटौती देखी जा सकती है.

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