आरबीआई ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 की आखिरी सीरीज का किया एलान, 10 माह के निचले स्तर पर बिकेगा सोना
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 28 Feb 2021 2:23 PM
RBI, Sovereign Gold Bond, 2020-21 : नयी दिल्ली : अगर आप निवेश को लेकर बेहतर विकल्प की तलाश में हैं. केंद्र सरकार ने सोने में निवेश करने को लेकर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की शुरुआत साल 2015 में की थी. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 की 12वीं सीरीज का एलान भारतीय रिजर्व बैंक ने कर दिया है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में आप एक मार्च से पांच मार्च के बीच निवेश कर सकेंगे.
नयी दिल्ली : अगर आप निवेश को लेकर बेहतर विकल्प की तलाश में हैं. केंद्र सरकार ने सोने में निवेश करने को लेकर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की शुरुआत साल 2015 में की थी. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 की 12वीं सीरीज का एलान भारतीय रिजर्व बैंक ने कर दिया है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में आप एक मार्च से पांच मार्च के बीच निवेश कर सकेंगे.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की यह वित्त वर्ष 2020-2021 की आखिरी सीरीज है. भारतीय रिजर्व बैंक ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत पिछले 10 माह में सबसे कम रखी है. आरबीआई ने गोल्ड सब्सक्रिप्शन की कीमत 4662 रुपये प्रति ग्राम तय की है.
मालूम हो कि इससे पहले चालू वित्त वर्ष की दूसरी सीरीज यानी मई 2020 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत 4590 रुपये प्रति ग्राम थी. वहीं, फरवरी 2021 में बॉन्ड का इश्यू प्राइस 4912 रुपये प्रति ग्राम रखा गया था. यानी, प्रति 10 ग्राम के लिए 49120 रुपये देने थे.
इस बार भी ऑनलाइन आवेदन करनेवाले निवेशकों को बॉन्ड की तय कीमत पर प्रति ग्राम 50 रुपये की छूट दी जायेगी. अर्थात्, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लिए डिजिटल भुगतान करने पर एक ग्राम सोने के लिए 4612 रुपये अदा करना होगा.
बॉन्ड के तौर पर सोने में निवेश न्यूनतम एक ग्राम और अधिकतम चार किलो तक कर सकते हैं. हालांकि, ट्रस्ट और वित्तीय वर्ष के समान इकाइयों के मामले में निवेश की ऊपरी सीमा 20 किलोग्राम है. इसमें निवेश पर टैक्स में भी छूट मिलती है.
इस स्कीम के जरिये बैंक से कर्ज लेना भी आसान होता है. बॉन्ड में धोखाधड़ी और अशुद्धता की संभावना नहीं होती है. बॉन्ड्स आठ साल के बाद मैच्योर होंगे. आठ साल के बाद इससे पैसा निकाला जा सकता है. हालांकि, पांच साल के बाद बॉन्ड से बाहर निकलने का विकल्प होता है.
बॉन्ड काफी सुरक्षित होता है. यह पेपर और इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में होता है. इससे लॉकर में सोने रखने का खर्च भी नहीं उठाना पड़ता. इस बॉन्ड की बिक्री बैंकों, डाकघरों, एनएसई और बीएसई के अलावा स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के जरिये की जा सकती है.
बॉन्ड से बाहर निकलने पर पैसा सीधे निवेशक के बैंक खाते में भेज दिया जाता है. अगर निवेशक की मृत्यु हो जाती है, तो आरबीआई के नियम के मुताबिक, नामित व्यक्ति दावे के साथ कार्यालय से संपर्क कर संबंधित प्राप्ति कर सकते हैं.
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