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भारत में प्राइवेट बैंकों की लग गई लॉटरी, सरकारी बैंकों के मुकाबले तेजी से बढ़ी बाजार हिस्सेदारी

Updated at : 23 Jun 2025 6:16 PM (IST)
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Bank Share: पिछले पांच वर्षों में भारत के प्राइवेट बैंकों ने जबरदस्त वृद्धि करते हुए कुल बैंक जमा में अपनी बाजार हिस्सेदारी 28.6% से बढ़ाकर 34.8% कर ली है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 63.2% से घटकर 56.3% रह गई. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी प्राइवेट बैंकों की पकड़ मजबूत हुई है. साल-दर-साल जमा वृद्धि में भी निजी बैंक लगातार सार्वजनिक बैंकों से आगे निकलते जा रहे हैं.

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Bank Share: भारत में प्राइवेट बैंकों की लॉटरी लग गई है. पिछले पांच सालों के दौरान सरकारी बैंकों के मुकाबले प्राइवेट बैंकों की बाजार हिस्सेदारी में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इसके बल पर बैंकों ने बैंकिंग सेक्टर में पकड़ मजबूत बना ली है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) की ओर से सोमवार 23 जुलाई 2025 को पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, कुल जमा में प्राइवेट बैंकों की हिस्सेदारी मार्च 2019 में 28.6% थी, जो मार्च 2025 तक बढ़कर 34.8% हो गई है. यह तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी इस बात का संकेत है कि प्राइवेट बैंक अब केवल मेट्रो या शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी अपने पांव पसार चुके हैं.

सरकारी बैंकों की हालत पतली

वहीं, सरकारी बैंकों (पीएसबी) की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है. मार्च 2019 में इनकी बाजार हिस्सेदारी 63.2% थी, जो घटकर मार्च 2025 तक 56.3% रह गई. इसका मतलब यह है कि इन पांच सालों के दौरान सरकारी बैंकों की बाजार हिस्सेदारी में करीब 600 आधार अंकों की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट इस ओर इशारा करती है कि सरकारी बैंक अपने पारंपरिक गढ़ों में भी अब प्राइवेट बैंकों की चुनौती का सामना नहीं कर पा रहे हैं.

ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में निजी बैंकों की दस्तक

यूनियन बैंक की रिपोर्ट में यह साफ तौर पर कहा गया है कि अब ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी निजी बैंक तेजी से पैर जमा रहे हैं. ये वे क्षेत्र थे, जो कभी केवल सरकारी बैंकों की पहुंच में आते थे. अब इन क्षेत्रों में प्राइवेट बैंक भी सीएएसए (करेंट एकाउंट सेविंग एकाउंट) जमा में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज कर रहे हैं.

मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में जोरदार टक्कर

मेट्रो शहरों में अब प्राइवेट बैंकों की बाजार हिस्सेदारी सरकारी बैंकों के बराबर पहुंच चुकी है. इन शहरों में भी प्राइवेट बैंक सरकारी बैंकों को जोरदार टक्कर दे रहे हैं. खासकर, चालू खाता (करेंट एकाउंट) और सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) में इनकी पकड़ और भी मजबूत होती जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में अब ग्राहक सेवा, डिजिटल सुविधा और तेज ट्रांजेक्शन को लेकर ग्राहकों का रुझान प्राइवेट बैंकों की ओर बढ़ रहा है.

डिपॉजिट वृद्धि में प्राइवेट बैंक आगे

साल-दर-साल जमा वृद्धि की बात करें, तो प्राइवेट बैंकों ने सरकारी बैंकों को पीछे छोड़ दिया है. मार्च 2024 में निजी बैंकों ने 20.1% की वृद्धि दर्ज की. वहीं, सरकारी बैंक मात्र 9.4% की वृद्धि कर पाए. मार्च 2025 में भी प्राइवेट बैंकों की जमा वृद्धि 12% रही, जबकि सरकारी बैंक 9.3% और कुल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) की वृद्धि 10.3% रही.

सीएएसए अनुपात में गिरावट

सीएएसए अनुपात के मामले में रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राइवेट बैंकों का सीएएसए. अनुपात तेजी से गिरा है, फिर भी प्राइवेट बैंकों की कुल जमा में वृद्धि अधिक रही है. इसका मुख्य कारण सावधि जमा (टर्म डिपॉजिट) में तेजी से वृद्धि है, जो मौजूदा उच्च ब्याज दरों के चलते ग्राहकों को आकर्षित कर रही है.

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भारत में तेजी से बदल रहा सेनेरियो

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में बैंकिंग सेनेरियो तेजी से बदल रहा है. प्राइवेट बैंक अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धी ताकत बन चुके हैं. डिजिटल बैंकिंग, ग्राहक-केंद्रित सेवाएं और आक्रामक विस्तार नीति ने इन्हें नई ऊंचाई तक पहुंचाया है. वहीं, सरकारी बैंकों को यदि अपनी पुरानी स्थिति लौटानी है, तो उन्हें इनोवेशन और सेवा सुधार में तेजी लानी होगी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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