PM Kisan Yojana: किसानों के खाते में आएंगे 15,000 रुपये ? ‘किसान गर्जना’ रैली में किसानों ने रखी ये मांग

New Delhi: A farmer during the 'Kisan Garjana' rally, organised by Bharatiya Kisan Sangh (BKS), at Ramleela Maidan in New Delhi Monday, Dec. 19, 2022. The primary demand of the farmers is remunerative prices on the basis of input cost, rollback of GST on all kinds of farming activities and withdrawal of permission for GM crops. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI12_19_2022_000177A)
PM Kisan Yojana 13vi kist updates: किसान सम्मान निधि के तहत 6,000 रुपये और कुछ नहीं, बल्कि किसानों का अपमान है. यह कम से कम 15,000 रुपये होना चाहिए. जानें क्या है किसानों की मांग
PM Kisan Yojana: हजारों किसानों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध किसान संगठन भारतीय किसान संघ (बीकेएस) के बैनर तले सोमवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘किसान गर्जना’ रैली की और कई मांगे रखी. इन मांगों में से एक किसान सम्मान योजना की राशी को बढ़ाने की मांग भी है. आपको बता दें कि दिसंबर 2018 में शुरू की गयी प्रधानमंत्री-किसान योजना के तहत सभी जोत भूमि वाले किसान परिवारों को तीन समान किस्तों में प्रति वर्ष 6,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है.
मध्य प्रदेश के इंदौर से आये नरेंद्र पाटीदार ने कहा कि खेती से जुड़ी मशीनरी और कीटनाशकों पर से जीएसटी हटाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और मुद्रास्फीति के बीच, हमें कोई लाभ नहीं होता हैं. सरकार को हमारी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए. डेयरी उद्योग पर भी जीएसटी नहीं लगाया जाना चाहिए. मौजूदा स्थिति में कोई 6,000 रुपये या 12,000 रुपये में परिवार कैसे चला सकता है? एक अन्य किसान ने कहा कि किसान सम्मान निधि के तहत 6,000 रुपये और कुछ नहीं, बल्कि किसानों का अपमान है. यह कम से कम 15,000 रुपये होना चाहिए.
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत सालाना 6 हजार रुपये किसानों को उनके खातों में भेजे जाते हैं. ये पैसे हर चार महीने में 2-2 हजार रुपये की तीन किस्तों में किसानों के बैंक खाते में केंद्र की मोदी सरकार डालती है. 12 किस्त जारी होने के बाद अब किसानों को 13वीं किस्त का इंतजार है जिससे पहले उन्हें कुछ बातों को ध्यान में रखने की जरूरत है. यदि किसानों को इस योजना का लाभ लेना है तो कुछ गलतियों से बचने की जरूरत है जिसकी वजह से उनके पैसे अटक सकते हैं. जानें कौन सी है वो गलतियां…
-यदि आप चाहते हैं कि 13वीं किस्त के पैसे आपके खाते में आये तो, इसके लिए ई-केवाईसी जरूर करवा लें. यदि आप ये नहीं करवाते हैं, तो आपके किस्त के पैसे अटक सकते हैं. वहीं, आप पीएम किसान के आधिकारिक पोर्टल pmkisan.gov.in से या फिर अपने नजदीकी सीएससी सेंटर पर जाकर भी ई-केवाईसी करवाने में सक्षम हैं.
-यदि आप चाहते हैं कि आपको किस्त का लाभ आगे मिलता रहे, तो आपको इसके लिए भू-सत्यापन करवाने की जरूरत है. सरकार की ओर से पीएम किसान योजना के प्रत्येक लाभार्थी को ये करवाना जरूरी है.
यहां चर्चा कर दें कि पात्र किसानों के बैंक खाते में अबतक 12 किस्त केंद्र की मोदी सरकार डाल चुकी है. ऐसे में लाभार्थियों को अब 13वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दिसंबर महीने के आखिर में 13वीं किस्त सरकार किसानों के खातों में डाल सकती है. हालांकि, आधिकारिक घोषणा इस बाबत अभी तक नहीं की गयी है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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