नेपाल में किन देशों से आता है सबसे अधिक पैसा? जानकर चौंक जाएंगे आप

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :08 Sep 2025 7:47 PM (IST)
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Nepal Remittance

नेपाली रुपैया

Nepal Remittance: नेपाल की अर्थव्यवस्था प्रवासी नेपाली श्रमिकों द्वारा भेजी गई रेमिटेंस पर निर्भर है. विश्व बैंक और नेपाल राष्ट्र बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, रेमिटेंस का योगदान जीडीपी का 25-30% तक है. वित्त वर्ष 2024-25 में नेपाल को 1.723 ट्रिलियन नेपाली रुपये का रेमिटेंस मिला. कतर, सऊदी अरब, यूएई, मलेशिया, भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से सबसे अधिक धन आता है. यह विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करता है, लेकिन अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक चुनौतियां बनी हुई हैं.

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Nepal Remittance: सोशल मीडिया पर बैन लगाए जाने के बाद भारत के पड़ोसी देश नेपाल में बवाल मचा हुआ है. नेपाल के मौजूदा हालात पर चर्चा के दौरान एक बात तेजी से उभरकर सामने आ रही है कि उसकी अर्थव्यवस्था विदेशों से भेजे जाने वाले रेमिटेंस (प्रवासियों द्वारा भेजी गई धनराशि) के सहारे चलती है. बताया यह भी जा रहा है कि नेपाल की अर्थव्यवस्था में रेमिटेंस का महत्वपूर्ण योगदान है. विश्व बैंक की ‘माइग्रेसन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ–2022’ रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में नेपाल में रेमिटेंस का योगदान कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 21.8% था. इसके अलावा, मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल की जीडीपी में रेमिटेंस की हिस्सेदारी 25-30% तक हो सकती है, जो इसे दक्षिण एशिया में जीडीपी के अनुपात में सबसे अधिक रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश बनाता है.

वित्त वर्ष 2024-25 में 1,723.27 अरब आया रेमिटेंस

नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) की ‘करेंट मैक्रोइकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल सिचुएशन ऑफ नेपाल’ रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में नेपाल को 1,723.27 अरब रुपये (1.723 ट्रिलियन नेपाली रुपये) का रेमिटेंस प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19.2% अधिक है. अमेरिकी डॉलर में यह राशि 12.64 अरब डॉलर थी, जिसमें 16.3% की वृद्धि दर्ज की गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य अप्रैल से मध्य मई 2025 (बैशाख, 2082) में रेमिटेंस प्रवाह 165.30 अरब रुपये था. वहीं, मध्य जून से मध्य जुलाई 2025 में रेमिटेंस प्रवाह 189.11 अरब रुपये था, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 117.78 अरब रुपये था.

2020 के बाद नेपाल में कितना आया रेमिटेंस

नेपाल राष्ट्र बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-2021 में नेपाल में 10.86 अरब अमेरिकी डॉलर का रेमिटेंस प्राप्त हुआ था. विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, 2022 में यह राशि बढ़कर 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद थी, जो पिछले वर्ष (2021 में 8.2 अरब डॉलर) की तुलना में 3.6% अधिक है. यह राशि नेपाल के विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 50% हिस्सा है, जो आयात और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है.

किन-किन देशों से आता है रेमिटेंस

नेपाल में रेमिटेंस का प्रवाह मुख्य रूप से खाड़ी देश, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, मलेशिया, भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और जापान से आता है.

  • खाड़ी देश का कतर: कतर में बड़ी संख्या में नेपाली प्रवासी श्रमिक निर्माण, सेवा और आतिथ्य क्षेत्रों में कार्यरत हैं. यह रेमिटेंस का सबसे बड़ा स्रोत है.
  • सऊदी अरब: सऊदी अरब में नेपाली श्रमिक मुख्य रूप से निर्माण और तेल उद्योगों में काम करते हैं.
  • संयुक्त अरब अमीरात (यूएई): दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में नेपाली प्रवासियों की संख्या अधिक है.
  • कुवैत और बहरीन: इन देशों में भी नेपाली श्रमिकों की मौजूदगी रेमिटेंस में योगदान देती है.
  • मलेशिया: मलेशिया में नेपाली प्रवासी मुख्य रूप से विनिर्माण, निर्माण और सेवा क्षेत्रों में कार्यरत हैं. यह नेपाल के लिए रेमिटेंस का एक महत्वपूर्ण स्रोत है.
  • भारत: भारत में रहने वाले नेपाली समुदाय विशेष रूप से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में हैं, जो रेमिटेंस भेजते हैं. भारत के साथ खुली सीमा के कारण यह प्रवाह महत्वपूर्ण है.
  • अमेरिका: अमेरिका में रहने वाले नेपाली प्रवासी, विशेष रूप से पेशेवर और कुशल श्रमिक, रेमिटेंस का एक हिस्सा भेजते हैं.
  • ब्रिटेन: ब्रिटिश सेना में गोरखा सैनिकों की भर्ती के कारण यूके भी रेमिटेंस का स्रोत रहा है.
  • दक्षिण कोरिया और जापान: हाल के वर्षों में दक्षिण कोरिया और जापान में नेपाली श्रमिकों की संख्या बढ़ी है, जो तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करते हैं.
  • ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया में नेपाली छात्र और पेशेवर भी रेमिटेंस में योगदान दे रहे हैं.

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रेमिटेंस पाने में नेपाल ने बनाया रिकॉर्ड

नेपाल में पिछले 17 महीनों से हर महीने 1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रेमिटेंस आ रहा है. विशेष रूप से आश्विन 2024 में रेमिटेंस ने एक नया रिकॉर्ड बनाया. रेमिटेंस ने नेपाल के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में मदद की है, लेकिन यह आयात पर निर्भरता और विदेशी मुद्रा भंडार में कमी (2022 में 9.58 अरब डॉलर तक) जैसी चुनौतियों को भी उजागर करता है. रेमिटेंस की अधिकता के बावजूद नेपाल की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक समस्याएं जैसे खराब शासन व्यवस्था, व्यापार घाटा, और बढ़ती महंगाई ने आर्थिक स्थिरता को प्रभावित किया है. इसके अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग के लिए नेपाल का उपयोग एक चिंता का विषय बन गया है, जिसके कारण इसे एफएएफटी की ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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