भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर फिर बातचीत, भारतीय डेलिगेशन अगले हफ्ते वॉशिंगटन जाएगा

नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प (फोटो: सोशल मीडिया )
India US Trade Deal: भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल अगले हफ्ते वॉशिंगटन जाएगा. बदलते टैरिफ नियमों के बीच भारत नए निर्यात लाभ और छूट की मांग करेगा.
India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को पटरी पर लाने के लिए केंद्र सरकार का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह वॉशिंगटन जा रहा है. यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी व्यापार नीतियों में आए बदलावों ने भारत के लिए ‘रिलेटिव एडवांटेज’ (तुलनात्मक लाभ) को कम कर दिया है. पहले यह समझौता मार्च में होना था, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और नई टैरिफ व्यवस्था के कारण इसे टालना पड़ा था.
टैरिफ का बदलता गणित और भारत की स्थिति
फरवरी में तैयार फ्रेमवर्क के अनुसार, अमेरिका भारतीय सामानों पर आयात शुल्क घटाकर 18% करने पर सहमत हुआ था, जो उस समय अन्य देशों के मुकाबले भारत को प्रतिस्पर्धी बढ़त दे रहा था. हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने नियमों को रद्द करने के बाद, बाइडन/ट्रम्प प्रशासन ने 24 फरवरी से सभी देशों के लिए 10% का फ्लैट टैरिफ लागू कर दिया है.
अब चूंकि सभी देशों के लिए टैरिफ 10% है, इसलिए भारत को मिलने वाला विशेष लाभ खत्म हो गया है. भारतीय डेलिगेशन अब इस नए ढांचे में भारतीय निर्यातकों के लिए नए ‘कन्सेशन्स’ (छूट) की मांग करेगा.
धारा 301: क्या है अमेरिका का यह ‘ट्रेड वेपन’?
इस बातचीत का एक बड़ा हिस्सा धारा 301 (Section 301) के तहत चल रही दो जांचों पर केंद्रित होगा. धारा 301 अमेरिका के ‘ट्रेड एक्ट 1974’ का वह हिस्सा है, जो अमेरिकी सरकार को किसी भी देश की “अनुचित” व्यापार नीतियों की जांच करने और उन पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है.
- फोर्स्ड लेबर जांच (12 मार्च): USTR यह जांच कर रहा है कि भारत सहित 60 देशों में जबरन श्रम से जुड़ी नीतियां कहीं अमेरिकी व्यापार के लिए भेदभावपूर्ण तो नहीं हैं.
- इंडस्ट्रियल पॉलिसी जांच (11 मार्च): इसमें भारत की औद्योगिक नीतियों का आकलन किया जा रहा है कि वे अमेरिकी व्यापारिक हितों को नुकसान तो नहीं पहुंचा रही हैं.
भारत के लिए इस समझौते का महत्व
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, और भारतीय अर्थव्यवस्था के कई स्तंभ जैसे टेक्सटाइल, ज्वेलरी, फार्मा और इंजीनियरिंग सामान पूरी तरह से अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं. यदि टैरिफ और जांचों का मुद्दा सुलझ जाता है, तो भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में फिर से प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे. भारतीय अधिकारी इस बैठक में इन जांचों पर अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे ताकि भविष्य में किसी भी प्रतिबंध (Sanctions) की नौबत न आए.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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