कोरोनवायरस महामारी के कारण भारत में मध्यम वर्ग की श्रेणी से बाहर हुए करीब 32 लाख लोग : प्यू रिसर्च सेंटर

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 19 Mar 2021 10:05 AM

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Corona epidemic, India, Middle class, Pew Research Center : नयी दिल्ली : कोरोना महामारी ने दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि वित्तीय संकट भी पैदा किये हैं. साल 1990 के बाद पहली बार मध्यम वर्ग की आबादी में गिरावट दर्ज की गयी है. गिरावट का कारण कोरोना संकट काल के दौरान नौकरी का नुकसान बताया गया है. यह बात वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों में सामने आयी है.

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नयी दिल्ली : कोरोना महामारी ने दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि वित्तीय संकट भी पैदा किये हैं. साल 1990 के बाद पहली बार मध्यम वर्ग की आबादी में गिरावट दर्ज की गयी है. गिरावट का कारण कोरोना संकट काल के दौरान नौकरी का नुकसान बताया गया है. यह बात वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों में सामने आयी है.

कोरोना महामारी का असर भारत में भी पड़ा है. देश में उत्पन्न हुए वित्तीय संकट के कारण करीब तीन करोड़ 20 लाख लोग मध्यम वर्ग की श्रेणी से बाहर हो गये हैं. अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर ने कहा है कि कोरोना संकट के कारण भारत के 32 मिलियन लोगों को मध्यम वर्ग की श्रेणी से नीचे धकेल दिया है.

प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, कोरोना संकट काल में मध्यम वर्ग में 10 डॉलर से 20 डॉलर प्रतिदिन कमानेवालों की संख्या में करीब तीन करोड़ 20 लाख की गिरावट दर्ज की गयी है. कोरोना संकट के पहले देश में मध्यम वर्ग की श्रेणी में करीब नौ करोड़ 90 लाख लोग थे. जबकि, कोरोना महामारी के कारण इनकी संख्या घट कर करीब छह करोड़ 60 लाख हो गयी है.

वहीं, स्टडी के मुताबिक कोरोना महामारी के कारण देश में उच्च आय की श्रेणी के 6.2 करोड़ लोग मध्यम वर्ग की श्रेणी में आ गये हैं. उच्च आय की श्रेणी में ऐसे लोग आते हैं, जिनकी प्रतिदिन की आय 50 डॉलर या उससे अधिक यानी करीब 3630.50 रुपये होती है.

प्यू रिसर्च सेंटर ने आर्थिक विकास के विश्व बैंक के पूर्वानुमानों का हवाला देते हुए कहा है कि अनुमान के मुताबिक, कोरोना काल की मंदी में चीन की तुलना में भारत में मध्यम वर्ग में अधिक कमी और गरीबी में अधिक वृद्धि होगी. मालूम हो कि साल 2011 से 2019 के बीच करीब पांच करोड़ 70 लाख लोग मध्यम वर्ग की श्रेणी में शामिल हुए थे.

पिछले साल जनवरी माह में विश्व बैंक ने भारत और चीन के आर्थिक विकास की दर का स्तर समान रहने का अनुमान जताया था. साल 2020 में भारत का 5.8 फीसदी और चीन का 5.9 फीसदी आर्थिक विकास की दर का अनुमान जताया गया था. लेकिन, एक साल बाद विश्व बैंक ने पूर्वानुमान को संशोधित करते हुए भारत के लिए 9.6 फीसदी संकुचन और चीन के लिए दो फीसदी वृद्धि की बात कही है.

भारत में साल की शुरुआत में कोरोना मामलों में गिरावट के बाद कुछ औद्योगिक राज्यों में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का सामना करना पड़ रहा है. इनकी संख्या एक करोड़ 14 लाख हे. यह संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्राजील के बाद सबसे ज्यादा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने चालू वित्त वर्ष में आठ फीसदी के संकुचन का अनुमान लगाते हुए अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए कई कदम उठाये हैं, जो इस महीने समाप्त हो रहा है. प्यू रिसर्च सेंटर का अनुमान है कि प्रतिदिन दो डॉलर या उससे कम कमानेवाले गरीब लोगों की संख्या सात करोड़ 50 लाख हो गयी है. कोरोना वायरस के कारण आयी मंदी ने प्रगति को वर्षों पीछे धकेल दिया है.

इस साल घरेलू ईंधन की कीमतों में 10 फीसदी की वृद्धि, नौकरी की हानि, वेतन में कटौती ने लाखों घरों को नुकसान पहुंचाया है. कई लोग विदेशों में नौकरी की तलाश कर रहे हैं. हालांकि, चीन में मध्यम वर्ग की संख्या के जीवन स्तर में एक करोड़ की मामूली गिरावट आयी है. वहीं, गरीबी का स्तर अपरिवर्तित रहा है.

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