navratri 2021: दुर्गा पूजा में 32 हजार करोड़ रुपये से अधिक का होता है कारोबार

navratri 2021: ब्रिटिश काउंसिल की रिपोर्ट ‘मैपिंग द क्रिएटिव इऑनोमी अराउंड दुर्गा पूजा’ के मुताबिक, दुर्गा पूजा के दौरान रचनात्मक उद्योगों का कुल कारोबार करीब 32,377 करोड़ रुपये का होता है.
कोलकाता: दुर्गा पूजा को भारत में सर्वश्रेष्ठ फेस्टिवल डेस्टिनेशन घोषित किया गया है. दुर्गोत्सव ने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए इंडिया टूरिज्म स्टैटिस्टिक्स एट ए ग्लांस – 2020 के अनुसार, पश्चिम बंगाल ने राजस्थान को पछाड़ दिया है और पांचवीं रैंक पर आ गया है. यह त्योहार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विख्यात हुआ है.
कई देशों में इसे बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. ब्रिटिश काउंसिल की ‘मैपिंग द क्रिएटिव इऑनोमी अराउंड दुर्गा पूजा’ शीर्षक रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्गा पूजा के दौरान रचनात्मक उद्योगों का कुल कारोबार करीब 32,377 करोड़ (कोरोना काल से पहले) रुपये का होता है. यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 2.58 फीसदी है.
रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान सर्वाधिक कारोबार खुदरा बिक्री से होता है, जो 27 हजार 364 करोड़ रुपये का होता है. परिधान, आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक्स की सबसे अधिक बिक्री होती है. खुदरा विक्रेता उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए कई किस्म के उत्सव ऑफर लेकर आते हैं.
खाद्य और पेय सेगमेंट में 2854 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. इस सेगमेंट में ‘भोग व प्रसाद’ का कारोबार 19.9 करोड़ रुपये का होता है. संस्थापन, कला व सजावट सेगमेंट में 860 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. इसमें पंजीकृत पंडालों में 700 करोड़ और गैर-पंजीकृत पंडालों में 160 करोड़ रुपये का कारोबार होता है.
इस दौरान विज्ञापनों में 504 करोड़ रुपये खर्च होते हैं. स्पॉन्सरशिप में 318 करोड़ रुपये, मूर्ति निर्माण में 260-280 करोड़ रुपये और लाइटिंग और इल्यूमिनेशन में 205 करोड़ रुपये खर्च होते हैं. ये सभी आंकड़े वर्ष 2019 की दुर्गा पूजा पर आधारित हैं.
दुर्गा पूजा के दौरान पर्यटन में भी खासी वृद्धि होती है. दुर्गा पूजा के आसपास कोलकाता में बस यात्रियों की संख्या में 120 फीसदी की बढ़ोतरी देखी जाती है. हवाई यातायात में 11% की बढ़ोतरी होती है. गौरतलब है कि तीन अक्टूबर 2019 को कोलकाता मेट्रो में 9.2 लाख यात्रियों ने एक दिन में यात्रा की थी, जो कोलकाता मेट्रो के लिए एक रिकॉर्ड है.
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रिटेल – 27,364 करोड़
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एफ एंड बी – 2854 करोड़
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संस्थापन, कला और सजावट – 860 करोड़
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विज्ञापन – 504 करोड़
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स्पॉन्सरशिप – 318 करोड़
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मूर्ति निर्माण – 260-280 करोड़
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साहित्य और प्रकाशन – 260- 270 करोड़
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लाइटिंग एंड इल्यूमिनेशन – 205 करोड़
Posted By: Mithilesh Jha
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