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मोदी सरकार का चीनी का दाम बढ़ाने से इनकार, कैबिनेट ने गन्ने की एफआरपी बढ़ाने का किया फैसला

केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में 2021-22 के विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य बढ़ाने का फैसला किया गया.

By Prabhat Khabar Digital Desk
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केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री पीयूष गोयल.
केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री पीयूष गोयल.
फोटो : ट्विटर.

नई दिल्ली : केंद्र की मोदी सरकार ने बुधवार को देश में चीनी की कीमत में बढ़ोतरी करने से इनकार किया है. इसके साथ ही, उसने नए विपणन वर्ष 2021-22 के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में 5 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने का फैसला किया है. इससे देश के गन्ना किसानों को लाभ मिलने की संभावना जाहिर की जा रही है.

बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में 2021-22 के विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य बढ़ाने का फैसला किया गया. चालू विपणन वर्ष 2020-21 के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य 285 रुपये प्रति क्विंटल है. खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि 10 फीसदी की मूल रिकवरी दर पर एफआरपी को बढ़ाकर 290 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है.

गोयल ने कहा कि 10 फीसदी से ऊपर प्रत्येक 0.1 फीसदी की वृद्धि पर 2.90 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम उपलब्ध कराया जाएगा. वहीं, रिकवरी में प्रति 0.1 फीसदी की कमी पर एफआरपी में 2.90 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती होगी. उन्होंने कहा कि किसानों के संरक्षण के लिए सरकार ने फैसला किया है कि रिकवरी 9.5 फीसदी से नीचे होने पर कोई कटौती नहीं की जाएगी.

मंत्री ने कहा कि ऐसे गन्ना किसानों को चालू गन्ना सत्र 2020-21 के 270.75 रुपये प्रति क्विंटल के बजाय 2021-22 के गन्ना सत्र में 275.50 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलेगा. उन्होंने कहा कि चीनी सत्र 2021-22 के लिए गन्ने की उत्पादन लागत 155 रुपये प्रति क्विंटल है. 10 फीसदी की रिकवरी दर के हिसाब से 290 रुपये प्रति क्विंटल का भाव उत्पादन लागत पर 87 फीसदी ऊंचा है.

गोयल ने कहा कि अन्य फसलों की तुलना में गन्ने की खेती अधिक फायदेमंद है. यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार एफआरपी में बढ़ोतरी के मद्देनजर चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) बढ़ाएगी, गोयल ने कहा कि ऐसा जरूरी नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार चीनी का निर्यात बढ़ाने तथा एथनॉल के उत्पादन के लिए काफी समर्थन दे रही है. इन सब कारणों के मद्देनजर हमें नहीं लगता कि फिलहाल चीनी का बिक्री मूल्य बढ़ाने की जरूरत है.

गोयल ने कहा कि घरेलू बाजार में चीनी कीमतें स्थिर हैं. चीनी के निर्यात के बारे में गोयल ने कहा कि चीनी मिलों ने 2020-21 के विपणन सत्र में 70 लाख टन चीनी के निर्यात के लिए अनुबंध किया है. इसमें से 55 लाख टन का निर्यात हो चुका है. शेष 15 लाख टन भी पाइपलाइन में है.

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