मेहुल चोकसी मामले पर विदेश मंत्रालय ने कहा, आर्थिक भगोड़ों को कानून का सामना करना चाहिए

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस रद्द कर दिए जाने के बाद भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी भारत के अलावा किसी भी दूसरे देश की अपनी मर्जी से यात्रा कर सकता है, जहां वह कई कानूनी मामलों का सामना कर रहा है.
नई दिल्ली : विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को दोहराया कि मेहुल चोकसी जैसे आर्थिक भगोड़ों को कानूना का सामना करना चाहिए. मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने मेहुल चोकसी के मुद्दे पर कहा कि आर्थिक भगोड़ों को भारत में कानून का सामना करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैं रेड कॉर्नर नोटिस शब्द का इस्तेमाल करता हूं. मुझे सिर्फ बड़ा नाम लेने दें. हमारा ध्यान आर्थिक भगोड़ों का भारत में कानून का सामना करने पर है और हम आज के रेड कॉर्नर नोटिस में विशिष्ट मुद्दों को जारी रखेंगे.
बता दें कि इंटरपोल ने मेहुल चोकस के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस को सूची से हटा दिया है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस रद्द कर दिए जाने के बाद भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी भारत के अलावा किसी भी दूसरे देश की अपनी मर्जी से यात्रा कर सकता है, जहां वह कई कानूनी मामलों का सामना कर रहा है. हालांकि, सूत्रों ने कहा कि मेहुल चोकसी के खिलाफ वैश्विक पुलिस निकाय की ओर से रेड कॉर्नर नोटिस हटाने से पंजाब नेशनल बैंक घोटाला (पीएनबी घोटाला) मामले पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरपोल की ओर से रेड कॉर्नर नोटिस भगोड़ों के खिलाफ जारी किया जाता है और इसे दुनिया भर में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुरोध के रूप में माना जाता है, ताकि प्रत्यर्पण, आत्मसमर्पण या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई के लिए भागे हुए व्यक्ति का पता लगाया जा सके और उसे अस्थायी रूप से गिरफ्तार किया जा सके.
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मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 63 वर्षीय हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी पंजाब नेशनल बैंक में 13,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के सिलसिले में भारत का वांछित है. इस बीच, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को कहा था कि वह मेहुल चोकसी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस रद्द किए जाने के बाद इंटरपोल की फाइलों के नियंत्रण आयोग (सीसीएफ) और इंटरपोल में अन्य निकायों के साथ सक्रिय तरीके से संपर्क में बना हुआ है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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