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नेपाल के पूर्व पीएम ओली को स्विस बैंक से मिलता है 1.87 करोड़ का ब्याज, जानें कितनी है संपत्ति

Updated at : 10 Sep 2025 2:27 PM (IST)
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KP Sharma Oli Net Worth

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली

KP Sharma Oli Net Worth: नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को स्विस बैंक अकाउंट से हर साल 1.87 करोड़ रुपये ब्याज मिलता है. हाल ही में सोशल मीडिया बैन और Gen-Z के उग्र प्रदर्शनों के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओली की संपत्ति में चीन के साथ कथित सांठगांठ के बाद अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई. मिराबॉड बैंक, जिनेवा ब्रांच में करीब 41 करोड़ रुपये जमा हैं.

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KP Sharma Oli Net Worth: नेपाल में सोशल मीडिया पर बैन की वजह से मचे बवाल के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है. Gen-Z के हिंसक प्रदर्शन के बाद न केवल केपी शर्मा ओली बल्कि उनके मंत्रिमंडल के दूसरे सदस्यों समेत राष्ट्रपति रामचंद्र पोडेल को भी अपने-अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है. मीडिया में एक खबर यह भी चल रही है कि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली देश छोड़कर दुबई जाने की तैयारी में हैं. मीडिया की खबरों में यह भी बताया जा रहा है कि Gen-Z ने सोशल मीडिया पर बैन के अलावा नेपाली शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ भी आवाज बुलंद की है. इस बीच, एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ है कि केपी शर्मा ओली को स्विस बैंक से ब्याज के तौर पर करीब 1.87 करोड़ रुपये मिलते हैं. यह खुलासा ग्लोबल वॉच एनालिसिस की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है.

ओली की संपत्ति और चीन से कथित रिश्ते

खबरिया वेबसाइट एबीपी न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की संपत्ति और उनके चीन से रिश्तों पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. कुछ साल पहले ग्लोबल वॉच एनालिसिस की रिपोर्ट ने दावा किया था कि ओली की संपत्ति में पिछले वर्षों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है. इसके पीछे चीन के साथ उनकी कारोबारी सांठगांठ को जिम्मेदार बताया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में चीन ने अपना प्रभाव मजबूत करने के लिए ओली और उनके करीबियों को लगातार आर्थिक लाभ पहुंचाया.

चीन के निवेश से जुड़ा विवाद

रिपोर्ट में कहा गया कि बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर और बिजनेस डील्स में चीनी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के बदले ओली और उनके सहयोगियों ने करोड़ों रुपये कमाए. यही वजह है कि उनके खिलाफ बार-बार भ्रष्टाचार और निजी लाभ उठाने के आरोप लगे.

राजनीतिक सफर और चीन की नजदीकियां

केपी शर्मा ओली ने 1970 के दशक में राजनीति की शुरुआत की थी. 2015 में वे पहली बार नेपाल के प्रधानमंत्री बने, लेकिन गठबंधन टूटने पर 2016 में इस्तीफा देना पड़ा. उस समय उन्होंने भारत पर आरोप लगाया था कि वह नेपाल की आर्थिक प्रगति रोक रहा है. इसके बाद नेपाल में चीन का प्रभाव तेजी से बढ़ा.

2018 में दोबारा प्रधानमंत्री बने ओली

2018 में ओली दोबारा प्रधानमंत्री बने और तब से उनके चीन के साथ रिश्ते और गहरे हुए. हालांकि, इस दौरान नेपाल की प्रति व्यक्ति आय में कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन सवाल यह उठा कि विकास का फायदा आम जनता को मिला या सिर्फ नेताओं और उनके करीबी लोगों तक ही सीमित रहा.

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स्विस बैंक में अकाउंट और ब्याज की कमाई

ग्लोबल वॉच एनालिसिस की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि ओली का एक अकाउंट मिराबॉड बैंक की जिनेवा ब्रांच में है. इसमें करीब 41 करोड़ रुपये जमा हैं, जिसे उन्होंने लंबे समय से इन्वेस्टमेंट के तौर पर रखा है. इस पैसे से उन्हें हर साल करीब 1.87 करोड़ रुपये ब्याज के तौर पर मिलता है. इस बीच नेपाली जनता एक बड़ा सवाल यह उठा रही है कि जब देश लगातार आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा था, तब एक सार्वजनिक जीवन जीने वाले नेता की संपत्ति इतनी तेजी से कैसे बढ़ी?

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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