अब सोना-चांदी की सप्लाई भी करेगा करूर वैश्य बैंक, कॉरपोरेट सर्राफा कारोबार में रखा कदम

कोरोना वायरस की वजह से ग्लोबल लेवल पर सोना की कीमतों में आयी नरमी का फायदा उठाने के लिए करूर वैश्य बैंक ने सर्राफा कारोबार की ओर कदम बढ़ा दिया है.
कोयंबटूर : कोरोना वायरस बढ़ते संक्रमण की वजह से सर्राफा बाजार की कीमती धातु सोना की कीमतों में आयी गिरावट के बाद न केवल निवेशक उत्साहित नजर आ रहे हैं, बल्कि बैंकिंग सेक्टर भी इस ओर कदम बढ़ाने लगे हैं. अब तक बैंक के लॉकर में सोना सुरक्षित रखा जाता रहा है, लेकिन अब निजी क्षेत्र के करूर वैश्य बैंक ने सोना-चांदी आपूर्ति करने का मन बनाया है. करूर वैश्य बैंक ने बुधवार को अपने कॉरपोरेट ग्राहकों के लिए सर्राफा कारोबार में उतरने की घोषणा की.
बैंक ने एक बयान में कहा कि करूर वैश्य बैंक करीब 6,000 आभूषण विक्रेताओं और विनिर्माताओं को अपनी सेवाएं देता है. अब बैंक अपने इन कॉरपोरेट ग्राहकों को बी2बी (बिजनेस 2 बिजनेस) सोने और चांदी की आपूर्ति भी करेगा. बैंक ने कहा कि इससे उसके ग्राहकों को इस प्रतिस्पर्धी उद्योग में बेहतर क्षमता के साथ काम करने में मदद मिलेगी.
देश के सकल घरेलू उत्पाद में रत्न एवं आभूषण उद्योग की हिस्सेदारी करीब सात फीसदी है. देश के कुल वस्तु निर्यात में यह क्षेत्र 15 फीसदी का योगदान देता है. चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का बाजार है. वर्ष 2019 में यहां सोने की मांग करीब 700 टन थी. बैंक ने प्रयोग के तौर पर हाल में चेन्नई और कोयंबटूर में अपने ग्राहकों को इसकी आपूर्ति की है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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