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दलबदलू नेताओं ने लहराया जीत का परचम, परनीत-सीता हारीं

Updated at : 05 Jun 2024 11:46 AM (IST)
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दलबदलू नेताओं ने लहराया जीत का परचम, परनीत-सीता हारीं

दलबदलू नेताओं में सिंधिया, जिंदल और जितिन ने लहराया जीत का परचम. फोटो: सोशल मीडिया

Lok Sabha Elections Results 2024: ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2019 में कांग्रेस के टिकट पर गुना से चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के कृष्णपाल सिंह से हार गए थे. देश के दिग्गज उद्योगपति और दो बार सांसद रह चुके नवीन जिंदल मार्च 2024 में भाजपा में शामिल हुए थे.

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Lok Sabha Elections Result 2024: 18वीं लोकसभा के चुनाव की मतगणना का काम 4 जून 2024 को पूरा हो गया. इसमें प्रत्यक्ष तौर पर किसी भी दल को जीत नहीं मिल पाई है, लेकिन इस बार के चुनाव में दलबदलू नेताओं में कुछ को जीत मिली और कुछ को हार का स्वाद चखना पड़ा. दल बदलने वाले जिन चर्चित नेताओं ने जीत का परचम लहराया है, उनमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, उद्योगपति नवीन जिंदल और उत्तर प्रदेश के मंत्री जितिन प्रसाद शामिल हैं. ये सभी नेता कांग्रेस को छोड़कर भाजपा का दामन थामा है. वहीं, कांग्रेस और झामुमो को छोड़कर भाजपा में जाने वाली नेताओं में पंजाब की परनीत कौर और झारखंड की सीता सोरेन को हार का स्वाद चखना पड़ा. खबर है कि गुना संसदीय क्षेत्र चुनाव लड़ने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को 5 लाख से अधिक मतों से जीत मिली है.

ज्योतिरादित्य ने दादी की सीट से दर्ज की जीत

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2019 में कांग्रेस के टिकट पर गुना से चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के कृष्णपाल सिंह से हार गए थे. यह निर्वाचन क्षेत्र सिंधिया परिवार का गढ़ रहा है, जिसका प्रतिनिधित्व उनकी दादी विजया राजे सिंधिया ने किया था. उन्हें ग्वालियर की राजमाता के रूप में जाना जाता है. उन्होंने 1989 से 1998 तक भाजपा सदस्य के रूप में लगातार चार बार जीत हासिल की थी. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2020 में कांग्रेस के खिलाफ विद्रोह कर दिया और मध्य प्रदेश में अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा ने राज्य की सत्ता हासिल की.

हरियाणा के कुरुक्षेत्र से जीते नवीन जिंदल

इसके अलावा, देश के दिग्गज उद्योगपति और दो बार सांसद रह चुके नवीन जिंदल मार्च 2024 में भाजपा में शामिल हुए थे. उन्होंने कांग्रेस से दो दशक पुराना नाता तोड़ लिया था. उन्होंने हरियाणा के कुरुक्षेत्र से 29,000 से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की.

पीलीभीत से जीते जितिन प्रसाद

उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्वर्गीय जितेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद तीन साल पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे. उन्हें मौजूदा सांसद वरुण गांधी के स्थान पर पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा गया और उन्होंने 1.64 लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की.

सिरसा में कुमारी शैलजा के हाथों हारे अशोक तंवर

इस साल की शुरुआत में भाजपा में शामिल हुए हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर सिरसा से कांग्रेस की कुमारी शैलजा से 2.68 लाख से अधिक मतों के अंतर से चुनाव हार गए. तंवर ने 2019 में कांग्रेस छोड़ दी थी और 2022 में आप में शामिल हो गए थे. इस बीच, पूर्व लोकसभा सांसद ने अपनी पार्टी बनाई और कुछ समय के लिए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में भी शामिल हुए.

दुमका से सीता सोरेन और पटियाला से परनीत कौर हारीं

मार्च 2024 में भाजपा में शामिल हुई झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की विधायक सीता सोरेन दुमका से 22,000 से अधिक मतों के अंतर से चुनाव हार गईं. वह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी हैं. इसी साल भाजपा में शामिल हुईं पूर्व केंद्रीय मंत्री परनीत कौर पटियाला से चुनाव हार गईं. वह इस सीट पर पहले चार बार जीत चुकी थीं. कौर तीसरे स्थान पर रहीं और लगभग 16,000 वोटों के अंतर से हार गईं.

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रवनीत बिट्टू और सुशील रिंकू चुनाव हारे

कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर 2019 में जीतने वाले और मार्च में भाजपा में शामिल हुए रवनीत बिट्टू अपनी लुधियाना सीट नहीं बचा पाए. वह कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा से 20,000 से अधिक मतों से हार गए. निवर्तमान लोकसभा में आम आदमी पार्टी के लोन सांसद रहे सुशील रिंकू भी चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए. वह भी अपनी जालंधर सीट नहीं बचा पाए। उन्हें पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस के चरनजीत सिंह चन्नी ने हराया.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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