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Job Layoff : अमेरिका में दर-दर भटक रहे 2 लाख भारत के आईटी प्रोफेशनल्स, छंटनी के बाद हो गए हैं बेरोजगार

Updated at : 23 Jan 2023 1:29 PM (IST)
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Job Layoff : अमेरिका में दर-दर भटक रहे 2 लाख भारत के आईटी प्रोफेशनल्स, छंटनी के बाद हो गए हैं बेरोजगार

पिछले साल नवंबर से आईटी क्षेत्र के करीब 2,00,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है, जिनमें रिकॉर्ड संख्या में कटौती करने वाली कंपनियों में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और अमेजन हैं. नौकरियों से निकाले गए लोगों में से 30 से 40 फीसदी भारतीय आईटी पेशेवर हैं.

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वॉशिंगटन : अभी हाल ही में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी नामी-गिरामी वैश्विक कंपनियों द्वारा छंटनी किए जाने के बाद अमेरिका में भारत के आईटी पेशेवरों के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो गया है. इन कंपनियों की छंटनी के बाद अमेरिका में बेरोजगार हुए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के हजारों बेरोजगार भारतीय पेशेवर नौकरी की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं. एक खबर के अनुसार, नंवबर से अब तक अमेरिका में करीब 2 लाख से अधिक भारतीय पेशेवरों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है. उनकी कोशिश यह है कि अमेरिका में रहने के लिए अपने कामकाजी वीजा के तहत निर्धारित अवधि के भीतर कोई नया रोजगार मिल जाए.

भारत के 2 लाख आईटी प्रोफेशनल्स हो गए बेरोजगार

‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ के हवाले से समाचार एजेंसी भाषा की एक खबर के अनुसार, पिछले साल नवंबर से आईटी क्षेत्र के करीब 2,00,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है, जिनमें रिकॉर्ड संख्या में कटौती करने वाली कंपनियों में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और अमेजन हैं. उद्योग के सूत्रों ने बताया कि नौकरियों से निकाले गए लोगों में से 30 से 40 फीसदी भारतीय आईटी पेशेवर हैं, जिनमें से बड़ी संख्या एच-1बी या एल1 वीजा पर यहां आए लोगों की है. अब ये लोग अमेरिका में बने रहने के लिए विकल्प की खोज में हैं और नौकरी जाने के बाद विदेशी कामकाजी वीजा के तहत मिलने वाले कुछ महीनों की निर्धारित अवधि में नया रोजगार तलाशने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ताकि अपनी वीजा स्थिति को भी बदल सकें.

60 दिन के भीतर ढूंढ़नी होगी नई नौकरी

अमेजन में काम करने के लिए गीता (नाम परिवर्तित) महज तीन महीने पहले यहां आई थी. इस सप्ताह उन्हें बताया गया कि 20 मार्च उनके कार्यकाल का अंतिम दिन होगा. एच-1बी वीजा पर अमेरिका आई एक अन्य आईटी पेशेवर को माइक्रोसॉफ्ट ने 18 जनवरी को बाहर का रास्ता दिखा दिया. वह कहती हैं कि स्थिति बहुत खराब है. जो लोग एच-1बी वीजा पर यहां आए हैं, उनके लिए तो स्थिति और भी विकट है, क्योंकि उन्हें 60 दिन के भीतर नई नौकरी ढूंढ़नी होगी या फिर भारत लौटना होगा.

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एच-1बी वीजा वालों के लिए चुनौती बड़ी

सिलिकॉन वैली में उद्यमी और सामुदायिक नेता अजय जैन भूतोड़िया ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आईटी क्षेत्र के हजारों कर्मचारियों को नौकरियों से निकाला जा रहा है. खासकर, एच-1बी वीजा पर आए लोगों के लिए तो चुनौतियां और भी बड़ी हैं, क्योंकि उन्हें नौकरी जाने के 60 दिन के भीतर नया रोजगार खोजना है और अपना वीजा स्थानांतरित करवाना है या फिर देश से जाने के लिए मजबूर होना होगा.

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नौकरी दिलाने के लिए सामुदायिक पहल शुरू

ग्लोबल इंडियन टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स एसोसिएशन (जीआईटीपीआरओ) और फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) ने इन आईटी पेशेवरों की मदद करने के लिए रविवार को एक सामुदायिक पहल शुरू की. एफआईआईडीएस के खांडेराव कंद ने कहा कि आईटी उद्योग में बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती के कारण जनवरी 2023 प्रौद्योगिकी क्षेत्र के पेशेवरों के लिए बहुत कठिन रहा है. कई प्रतिभाशाली लोगों की नौकरी चली गई. प्रौद्योगिकी उद्योग में भारतीय प्रवासियों की संख्या अच्छी खासी होने की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित भी वे ही हुए हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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