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काम के घंटों से ज्यादा जरूरी कर्मचारियों का सशक्तिकरण, 90 घंटे काम पर आईटीसी के चेयरमैन ने कही ये बात

Updated at : 14 Jan 2025 6:31 PM (IST)
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ITC Chairman Sanjiv Puri

आईटीसी के चेयरमैन संजीव पुरी

Working Hours: आईटीसी के चेयरमैन संजीव पुरी के अनुसार, कार्य संस्कृति को इस प्रकार बनाया जाना चाहिए कि कर्मचारी खुद को प्रेरित महसूस करें और कंपनी की दृष्टि में योगदान दें. यह दृष्टिकोण आधुनिक कार्यस्थलों के लिए सशक्तिकरण और लचीलापन का एक आदर्श उदाहरण है.

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Working Hours: अभी हाल के दिनों में लार्सन एंड टुब्रो के चेयरमैन की ओर से हफ्ते में 90 घंटे काम करने के विवादित बयान पर बहस जारी है. आईटीसी लिमिटेड के चेयरमैन संजीव पुरी ने मंगलवार 14 जनवरी को कहा कि कर्मचारियों के लिए काम के घंटे निर्धारित करने के बजाय उन्हें कंपनी के उद्देश्य और दृष्टिकोण से जोड़ना अधिक महत्वपूर्ण है. 90 घंटे काम करने के विवाद पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण और लचीलापन ही बेहतर कार्य संस्कृति की पहचान हैं.

काम कें घंटे पर नहीं, उद्देश्य पर ध्यान दें

संजीव पुरी ने कहा कि कर्मचारियों को यह महसूस होना चाहिए कि वे एक बड़ी यात्रा का हिस्सा हैं. उन्होंने उदाहरण दिया, “राजमिस्त्री से पूछें तो वह कह सकता है कि वह ईंट लगा रहा है, दीवार बना रहा है, या महल बना रहा है. यह नजरिए की बात है.”

वर्क फ्रॉम होम

संजीव पुरी ने कहा कि आईटीसी ने लचीले कार्य मॉडल को अपनाया है, जिसमें सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की अनुमति है. उन्होंने कहा कि यह व्यक्तिगत काम के घंटों पर नजर रखने के बजाय कर्मचारियों को उनकी क्षमता का उपयोग करने में सक्षम बनाने पर केंद्रित है.

सशक्तिकरण और समीक्षा पर जोर

उन्होंने कहा कि कंपनी का ध्यान कर्मचारियों को सशक्त बनाकर उनकी पूर्ण क्षमता का उपयोग करने और उनकी उपलब्धियों की समीक्षा करने पर है. आईटीसी का मूल मंत्र दूरदर्शिता, सशक्तिकरण और समावेशिता है.

काम के घंटों पर विवाद की वजह

एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन के 90 घंटे काम करने और रविवार को भी काम करने की टिप्पणी पर विवाद छिड़ा हुआ है. अभी हाल ही में उन्होंने कहा था, “घर पर बैठकर आप क्या करेंगे? आप अपनी पत्नी को कितना देखेंगे और आपकी पत्नी आपको कितना देखेगी?”

एसएन सुब्रह्मण्यन की आलोचना

एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन की टिप्पणी के बाद निजी जीवन और काम के संतुलन पर बहस शुरू हो गई. आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा कि ज्यादा काम करना सफलता नहीं, बल्कि थकान का कारण बनता है.

दुसरे बिजनेस लीडर्स की टिप्पणियां

इन्फोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने 70 घंटे के कार्य सप्ताह का सुझाव दिया था. अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भी कहा था कि घर पर ज्यादा समय बिताने से रिश्तों पर असर पड़ सकता है.

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चीन में “996” कार्य संस्कृति को शोषण माना गया

चीन में “996” कार्य संस्कृति (सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, छह दिन काम) को शोषण माना गया है. आईटीसी चेयरमैन का बयान एक लचीले और सशक्त कार्य वातावरण की जरूरत को दोहराता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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