इंस्टाग्राम-यूट्यूब से करते हैं कमाई? अब कमाई के साथ टैक्स का भी रखना होगा हिसाब
इंस्टाग्राम और यूट्यूब से कमाई करते हैं तो आईटीआर भरते समय इन जरूरी नियमों, फॉर्म और टैक्स से जुड़ी बातों को जरूर जानें.
अगर आप इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स या लिंक्डइन पर कंटेंट बनाकर कमाई करते हैं, तो इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR भरते समय आपको सैलरी पाने वाले लोगों से अलग कुछ बातों का ध्यान रखना होगा. ब्रांड डील, एफिलिएट लिंक और प्लेटफॉर्म से होने वाली कमाई आमतौर पर बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम मानी जाती है. ऐसे क्रिएटर्स के लिए ITR-3 आम ऑप्शन है, जबकि तय शर्तें पूरी करने वाले लोग प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन के तहत ITR-4 भी भर सकते हैं.
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 यानी असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए जिन टैक्सपेयर्स पर टैक्स ऑडिट लागू नहीं है, उनके लिए ITR-3 और ITR-4 भरने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है. वहीं, जिनके अकाउंट पर टैक्स ऑडिट लागू है, उनके लिए डेडलाइन 31 अक्टूबर 2026 है. ऐसे में क्रिएटर्स को आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय अपनी कमाई और खर्चों का रिकॉर्ड तैयार कर लेना चाहिए.
क्रिएटर्स की कमाई पर कैसे लगता है टैक्स?
कंटेंट क्रिएशन से नियमित कमाई को आमतौर पर बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम के तौर पर रिपोर्ट किया जाता है. इसमें ब्रांड डील, एफिलिएट लिंक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मिलने वाली कमाई शामिल हो सकती है. अगर ब्रांड या प्लेटफॉर्म ने आपकी कमाई पर TDS काटा है, तो उसे टैक्स क्रेडिट के तौर पर क्लेम किया जा सकता है.
क्रिएटर्स अपनी कमाई से जुड़े योग्य खर्चों का भी क्लेम कर सकते हैं. इनमें स्टूडियो का किराया, इंटरनेट बिल, सॉफ्टवेयर लाइसेंस, वीडियो एडिटर को दिया गया पेमेंट और कैमरा, लाइटिंग इक्विपमेंट या लैपटॉप पर डेप्रिसिएशन जैसी लागत शामिल हो सकती है.
कौन सा ITR फॉर्म भरना होगा?
आम तौर पर क्रिएटर्स को ITR-3 भरना होता है. अगर कोई टैक्सपेयर प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन की शर्तें पूरी करता है, तो वह ITR-4 यानी सुगम का इस्तेमाल कर सकता है.
| आईटीआर फॉर्म | कब इस्तेमाल कर सकते हैं |
| ITR-3 | वास्तविक कमाई और योग्य खर्चों की विस्तार से जानकारी देने के लिए |
| ITR-4 | प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन की शर्तें पूरी होने पर |
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए प्रोफेशन कोड 16021 भी दिया है.
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प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन में क्या फायदा है?
प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन में योग्य टैक्सपेयर्स को हर खर्च अलग-अलग जोड़कर टैक्स योग्य मुनाफा निकालने के बजाय कानून में तय तरीके से इनकम घोषित करने की सुविधा मिलती है.
सेक्शन 44एडी योग्य बिजनेस के लिए है, जबकि सेक्शन 44एडीए कुछ तय प्रोफेशन के लिए लागू होता है. वहीं, सेक्शन 44एई गुड्स कैरिज यानी सामान ढोने वाले वाहनों के बिजनेस से जुड़े योग्य टैक्सपेयर्स पर लागू होता है.
सेक्शन 44एडीए में योग्य प्रोफेशनल्स आम तौर पर अपनी ग्रॉस रिसीट्स का 50 फीसदी इनकम के तौर पर घोषित कर सकते हैं. हालांकि, सिर्फ सोशल मीडिया क्रिएटर होने से कोई व्यक्ति अपने आप सेक्शन 44एडीए के लिए योग्य नहीं हो जाता. इसके लिए तय शर्तें पूरी करना जरूरी है.
फ्री प्रोडक्ट मिलने पर भी टैक्स लगेगा?
हां, कैश पेमेंट नहीं मिलने पर भी टैक्स से जुड़ी जिम्मेदारी बन सकती है. ब्रांड कोलैबोरेशन के तहत मिले फ्री प्रोडक्ट, गैजेट या स्पॉन्सर्ड ट्रैवल जैसे बेनिफिट पर सेक्शन 194आर के तहत टीडीएस लागू हो सकता है, अगर कानून की शर्तें पूरी होती हैं.
वहीं, असेसमेंट ईयर 2026-27 में ITR-4 भरने वालों के लिए एक नया डिस्क्लोजर भी आया है. प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन चुनने वाले योग्य टैक्सपेयर्स को 31 मार्च 2026 तक के अपने इन्वेस्टमेंट की जानकारी "फाइनेंशियल पार्टिकुलर्स ऑफ द बिजनेस" सेक्शन में देनी होगी.
सेक्शन 44एडीए चुनने वाले टैक्सपेयर्स को 15 मार्च तक अपनी पूरी एडवांस टैक्स देनदारी चुकानी होती है. तय समय पर पेमेंट नहीं करने पर सेक्शन 234बी और 234सी के तहत इंटरेस्ट लग सकता है. वहीं, सेक्शन 44एडीए के तहत तय शर्तों के साथ 50 फीसदी ग्रॉस रिसीट्स को इनकम मानकर रिटर्न दाखिल करने वाले योग्य प्रोफेशनल्स को अकाउंट बुक रखने की जरूरत नहीं होती.
सबसे जरूरी बात यह है कि 31 अगस्त की डेडलाइन नजदीक है. अगर रिटर्न समय पर नहीं भरा गया, तो बिलेटेड रिटर्न दाखिल किया जा सकता है, लेकिन लागू इंटरेस्ट के साथ 5,000 रुपये तक लेट-फाइलिंग फीस भी लग सकती है.
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By सौम्या शाहदेव
सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.
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