Indian Railways: पटना, गया और रांची समेत 48 शहरों में बढ़ेगी ट्रेनों की संख्या, देखें पूरी लिस्ट

ट्रेनों की संख्या बढ़ाएगा भारतीय रेलवे
Indian Railways: भारतीय रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बड़ा विस्तार प्लान तैयार किया है. रेल मंत्रालय के अनुसार, पटना, गया, रांची, कोलकाता समेत देश के 48 प्रमुख शहरों में अगले पांच वर्षों में ट्रेनों की संख्या और संचालन क्षमता बढ़ाई जाएगी. इस योजना के तहत नए प्लेटफॉर्म, कोचिंग टर्मिनल, मल्टीट्रैकिंग और सिग्नलिंग सिस्टम को उन्नत किया जाएगा. इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक रेल सेवाओं को अधिक सुचारू, तेज और यात्री-अनुकूल बनाना है.
Indian Railways: यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और रेल सेवाओं पर बढ़ते दबाव को देखते हुए भारतीय रेलवे ने बड़ा विस्तार प्लान तैयार किया है. रेल मंत्रालय ने घोषणा की है कि अगले पांच वर्षों में देश के प्रमुख शहरों की ट्रेन संचालन क्षमता को दोगुना किया जाएगा. इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2030 तक पूरा करना है. खास बात यह है कि इस विस्तार योजना में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई अहम शहरों को शामिल किया गया है.
बिहार के शहरों को मिलेगा बड़ा लाभ
रेल मंत्रालय की सूची में बिहार के कई प्रमुख शहर शामिल हैं. इनमें पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और दरभंगा प्रमुख हैं. इन शहरों में यात्री दबाव पहले से ही काफी अधिक है. ट्रेन संचालन क्षमता बढ़ने से न सिर्फ नई ट्रेनों की शुरुआत होगी, बल्कि मौजूदा सेवाओं की समयबद्धता और सुविधा में भी सुधार आएगा. पटना और गया जैसे शहरों में अतिरिक्त कोचिंग टर्मिनल और प्लेटफॉर्म विकसित किए जाने की संभावना है.
झारखंड में रांची और टाटानगर होंगे केंद्र
झारखंड के लिए यह योजना विशेष रूप से अहम मानी जा रही है। रांची और टाटानगर को क्षमता वृद्धि वाले शहरों की सूची में शामिल किया गया है. इन शहरों से देश के विभिन्न हिस्सों के लिए रेल कनेक्टिविटी लगातार बढ़ रही है. रेलवे यहां नई लाइनों, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म और शंटिंग सुविधाओं के विकास पर काम करेगा. इससे खनन, औद्योगिक और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
कोलकाता के साथ पूर्वी भारत को मजबूती
पश्चिम बंगाल में कोलकाता को विस्तार योजना का प्रमुख केंद्र बनाया गया है. इसमें ईस्टर्न रेलवे, साउथ ईस्टर्न रेलवे और कोलकाता मेट्रो नेटवर्क शामिल हैं. इसके अलावा, राज्य के अन्य हिस्सों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा, क्योंकि कोलकाता पूर्वी भारत का सबसे बड़ा रेल हब है. ट्रेन संचालन क्षमता बढ़ने से हावड़ा और सियालदह जैसे व्यस्त स्टेशनों पर भीड़ कम होने की संभावना है.
नए टर्मिनल और बुनियादी ढांचे पर फोकस
रेल मंत्रालय के अनुसार, इस विस्तार योजना के तहत नए प्लेटफॉर्म, रेलवे लाइन, रेल-ओवर लाइन और शंटिंग सुविधाएं जोड़ी जाएंगी. शहरी क्षेत्रों में और उनके आसपास नए कोचिंग टर्मिनल विकसित किए जाएंगे. इसके साथ ही मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स जैसी आधुनिक रखरखाव सुविधाएं भी स्थापित की जाएंगी, जिससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू हो सके.
सिग्नलिंग और मल्टीट्रैकिंग से बढ़ेगी क्षमता
बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में खंडीय क्षमता बढ़ाने के लिए सिग्नलिंग सिस्टम के उन्नयन और मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं पर भी जोर दिया जाएगा. रेलवे का लक्ष्य है कि बढ़ती ट्रेनों की संख्या के बावजूद परिचालन में देरी न हो. टर्मिनल विस्तार के साथ-साथ आसपास के स्टेशनों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा, ताकि शहरी रेल नेटवर्क का संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके.
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इन शहरों में बढ़ेगी ट्रेनों की संख्या
- दिल्ली
- मुंबई (सेंट्रल कोलंबिया)
- मुंबई (वेस्टर्न कोलंबिया)
- कोलकाता (ईस्ट कोलंबिया)
- कोलकाता (साउथ ईस्ट कोलंबिया)
- कोलकाता मेट्रो
- चेन्नई
- हैदराबाद
- बेंगलुरु
- अहमदाबाद
- पुणे
- लखनऊ
- कानपुर
- वाराणसी
- गोरखपुर
- आगरा
- मथुरा
- अयोध्या
- चंडीगढ़
- लुधियाना
- अमृतसर
- इंदौर
- भोपाल
- उज्जैन
- जयपुर
- जोधपुर
- जम्मू
- बरेली
- पटना
- भागलपुर
- मुजफ्फरपुर
- दरभंगा
- गया
- रांची
- टाटानगर
- रायपुर
- भुवनेश्वर
- पुरी
- गुवाहाटी
- कोलकाता
- नागपुर
- वडोदरा
- सूरत
- मडगांव
- कोचीन
- विशाखापत्तनम
- विजयवाड़ा
- तिरुपति
- मैसूर
- कोयंबटूर
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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