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ट्रंप को टैरिफ लगाना है तो लगाएं, रूस से तेल का आयात जारी रखेगा भारत

Updated at : 14 Aug 2025 10:31 PM (IST)
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Rusian Crude Oil

आईओसी के चेयरमैन एएस साहनी

Russian Crude Oil: अमेरिका द्वारा 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने के बावजूद भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखा है. आईओसी चेयरमैन ए एस साहनी ने स्पष्ट किया कि खरीद का फैसला केवल आर्थिक पहलुओं पर आधारित है. अप्रैल-जून तिमाही में आईओसी के कच्चे तेल प्रसंस्करण में रूस की हिस्सेदारी 22-23% रही, जबकि बीपीसीएल के लिए यह 34% थी. रूसी तेल पर छूट घटने से आयात में कमी आई, लेकिन प्रतिबंध न होने पर भारत 30-35% हिस्सेदारी बनाए रख सकता है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति स्थिर रहेगी.

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Russian Crude Oil: इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के चेयरमैन एएस साहनी ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा के बावजूद भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि आईओसी जैसी रिफाइनिंग कंपनियां तेल की खरीद केवल आर्थिक पहलुओं और गुणवत्ता के मानकों को देखते हुए करती हैं. अगर कीमत और प्रसंस्करण ढांचे के अनुरूप गुणवत्ता मिलती है, तो ही खरीद होती है.

खरीद में न रोक, न विशेष बढ़ोतरी

एएस साहनी के अनुसार, रूस से तेल खरीद पर कोई सरकारी या कंपनी स्तर पर रोक नहीं है. हालांकि, आयात बढ़ाने या घटाने के लिए भी कोई विशेष प्रयास नहीं किए जा रहे हैं. अप्रैल-जून 2025 तिमाही में आईओसी के कुल कच्चे तेल प्रसंस्करण में रूस की हिस्सेदारी 22-23% रही. यह आंकड़ा पिछले कुछ महीनों से स्थिर है, जो दर्शाता है कि खरीद पूरी तरह बाजार परिस्थितियों पर निर्भर है.

छूट में गिरावट से आयात पर असर

रूस के यूराल ग्रेड कच्चे तेल पर पहले 40 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट मिल रही थी, जिसने भारत को बड़े पैमाने पर आयात करने के लिए प्रेरित किया. लेकिन, हाल के महीनों में यह छूट घटकर 1.5 डॉलर प्रति बैरल रह गई, जिससे आयात में कमी आई. वर्तमान में छूट लगभग 2.70 डॉलर प्रति बैरल है, जो पहले की तुलना में काफी कम है. इस वजह से खरीदारी में उत्साह पहले जैसा नहीं रहा. हालांकि, आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं हुई.

ट्रंप का टैरिफ और भारतीय प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह घोषणा की कि रूस से तेल खरीद जारी रखने पर भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25% आयात शुल्क लगाया जाएगा, जिससे कुल शुल्क 50% तक पहुंच गया है. इस कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई कि भारत रूस से आयात घटा सकता है, लेकिन साहनी ने स्पष्ट किया कि भारत का निर्णय केवल आर्थिक गणना पर आधारित होगा, न कि राजनीतिक दबाव पर.

भारत के लिए रूस की बढ़ती अहमियत

फरवरी 2022 से पहले भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 1% से भी कम थी, लेकिन यूक्रेन पर रूस के हमले और पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस ने रियायती दरों पर तेल बेचना शुरू किया. इसके चलते भारत ने आयात बढ़ाया और अब यह हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

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आने वाले महीनों में जारी रहेगा तेल आयात

सार्वजनिक क्षेत्र की एक दूसरी कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के निदेशक (वित्त) वी रामकृष्ण गुप्ता के अनुसार, जून तिमाही में रूसी तेल की हिस्सेदारी 34% रही. उनका अनुमान है कि यदि कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाया गया, तो यह स्तर आने वाले महीनों में 30-35% के बीच बना रहेगा. यह दर्शाता है कि भारत निकट भविष्य में रूस को एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनाए रखेगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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