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आधा भारत नहीं जानता कौन कंपनी बनाती है राफेल, जान जाएगा खासियत तो चूम लेगा अपना हाथ

Updated at : 19 May 2025 4:35 PM (IST)
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Rafale fighter jet

Rafale fighter jet

Rafale: राफेल लड़ाकू विमान को फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन कंपनी बनाती है. यह विमान भारत ने 2016 में खरीदा और पहला बैच जुलाई 2020 में अंबाला एयरबेस पर पहुंचा. ऑपरेशन सिंदूर में राफेल की भूमिका ने इसकी ताकत को साबित किया. इसमें मेट्योर, स्काल्प जैसी मिसाइलें और AESA रडार जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं, जिससे भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई है.

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Rafale: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों पर किए गए हमलों में फ्रांस से मंगाए गए राफेल लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन बेहतर रहा. सोशल मीडिया और अखबारों में राफेल की जमकर तारीफ और चर्चा की जा रही है. देश के लोग राफेल लड़ाकू विमानों को जानते हैं, लेकिन आधा भारत के लोग यह नहीं जानते कि राफेल लड़ाकू विमान को किस कंपनी ने बनाया और वह भारत कब लाया गया. आइए, जानते हैं कि राफेल लड़ाकू विमान को किस कंपनी ने बनाया है और उसे भारत कब लाया गया?

राफेल को कौन कंपनी बनाती है?

राफेल लड़ाकू विमान को फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन कंपनी की ओर से बनाया गया है. यह एक अत्याधुनिक मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है, जिसे हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमले के लिए डिजाइन किया गया है.

भारत में राफेल कब लाया गया?

भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए समझौता 23 सितंबर 2016 को हुआ था. इस डील की कुल लागत लगभग 59,000 करोड़ रुपये थी. भारत को पहला राफेल विमान 10 अक्टूबर 2019 को फ्रांस में सौंपा गया, लेकिन ये विमान भारत नहीं लाए गए थे, बल्कि वहां भारतीय वायुसेना के पायलटों को प्रशिक्षण देने में इस्तेमाल किए गए. इसका पहला बैच (5 राफेल विमान) भारत में 29 जुलाई 2020 को अंबाला एयरबेस पर पहुंचा. ये विमान फ्रांस से लगभग 7,000 किलोमीटर की दूरी तय करके भारत लाए गए.

राफेल विमान की खास बातें

  • राफेल लड़ाकू विमान दो प्रकार सिंगल सीटर (लड़ाकू) और ट्विन सीटर (प्रशिक्षण) में लाए गए.
  • इसे भारतीय जरूरतों के अनुसार मॉडिफाई किया गया.
  • राफेल विमान ममें स्काल्प और मेट्योर मिसाइल, हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम जोड़ा गया.
  • इसका इस्तेमाल भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाने के लिए किया गया.

राफेल की तकनीकी खासियत

  • गति (Speed): अधिकतम 2,222 किमी/घंटा (Mach 1.8)
  • रेंज (Range): बिना रिफ्यूलिंग के लगभग 3,700 किमी

राफेल में हथियार प्रणाली

  • मेट्योर मिसाइल: हवा से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइल
  • स्काल्प: गाइडेड क्रूज मिसाइल, जमीन पर सटीक हमला
  • हैमर: मीडियम रेंज की गाइडेड बम प्रणाली
  • एवियोनिक्स और तकनीक: एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड अरॉय (AESA) रडार
  • हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले: इलेक्ट्रॉनिक जामिंग और सेल्फ-प्रोटेक्शन सिस्टम

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ऑपरेशन सिंदूर से दसॉल्ट को फायदा

सात मई 2025 को भारत की ओर से शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर से राफेल लड़ाकू विमान बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन को खूब फायदा हुआ. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल के जरिए पाकिस्‍तान के छक्‍के छुड़ाने के बाद से ही दसॉल्‍ट एविएशन के शेयरों में तेजी देखी गई. कंपनी के शेयरों में जोरदार उछाल दर्ज किया. पेरिस स्टॉक एक्सचेंज पर पिछले शुक्रवार को दसॉल्ट के शेयर करीब 2.4% चढ़कर 309.40 यूरो तक पहुंच गए, जो कि इसके सर्वकालिक उच्च स्तर से केवल 10 फीसदी नीचे रहे.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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