ePaper

अरहर-चना दाल में नहीं लगेगा जमाखोरी का तड़का, सरकार ने लगा दी स्टोरेज सीमा की लगाम

Updated at : 22 Jun 2024 10:13 AM (IST)
विज्ञापन
अरहर-चना दाल में नहीं लगेगा जमाखोरी का तड़का, सरकार ने लगा दी स्टोरेज सीमा की लगाम

दालों के जमाखोरों और सट्टेबाजों पर सरकार का हमला. फोटो: सोशल मीडिया

Pulses Stock: दाल पर व्यक्तिगत रूप से लागू भंडार सीमा थोक विक्रेताओं के लिए 200 टन, खुदरा विक्रेताओं के लिए 5 टन और बड़ी सप्लाई चेन वाले खुदरा विक्रेताओं के लिए डिपो पर 200 टन होगी. आयातकों को सीमा शुल्क निकासी की तारीख से 45 दिनों से अधिक का आयातित भंडार नहीं रखना है.

विज्ञापन

Pulses Stock: अरहर और चना दाल में बढ़ी कीमत का तड़का लगाकर जमाखोर अब मुनाफा नहीं कमा सकेंगे. इन दोनों दालों की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अरहर और चना दाल के भंडारण की सीमा तय कर दी है. खास बात यह है कि सरकार ने अरहर और चना दाल पर भंडारण की यह सीमा सितंबर 2024 तक लगाई है. सरकार की ओर से लागू किया गया यह नियम दाल के थोक और खुदरा विक्रेता, बड़ी सप्लाई चेन के खुदरा विक्रेता, मिल मालिक और दालों के आयात करने वाले आयातकों पर लागू हो चुका है. अब अगर इनमें से किसी ने निर्धारित सीमा से बाहर अरहर और चना दाल का भंडारण किया, तब सरकारी एजेंसियों की ओर से पुख्ता कार्रवाई की जा सकती है.

तत्काल प्रभाव से लागू हो गया सरकार का आदेश

सरकार की ओर से जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अरहर और चना दाल के भंडारण की सीमा तय करने के पीछे सरकार का मकसद दालों की जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाकर इन दोनों दालों को ग्राहकों तक पहुंचाना है. बयान में कहा गया है कि निर्दिष्ट खाद्य पदार्थ (संशोधन) आदेश-2024 पर लाइसेंस आवश्यकताओं, भंडार सीमाओं और आवागमन प्रतिबंधों को हटाने का आदेश 21 जून, 2024 से तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है. इस आदेश के तहत, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 30 सितंबर, 2024 तक अरहर और काबुली चना सहित चना के लिए भंडार सीमा निर्धारित की गई है.

क्या है दालों के भंडारण की सीमा

सरकारी बयान में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक दाल पर व्यक्तिगत रूप से लागू भंडार सीमा थोक विक्रेताओं के लिए 200 टन, खुदरा विक्रेताओं के लिए 5 टन और बड़ी सप्लाई चेन वाले खुदरा विक्रेताओं के लिए डिपो पर 200 टन होगी. मिल मालिकों के लिए यह सीमा उत्पादन के अंतिम तीन महीने या वार्षिक स्थापित क्षमता का 25 फीसदी है. इनमें से जो भी अधिक होगा, वह मान्य है. इसके अलावा, आयातकों को सीमा शुल्क निकासी की तारीख से 45 दिनों से अधिक का आयातित भंडार नहीं रखना है. संबंधित कानूनी संस्थाओं को उपभोक्ता मामले विभाग के पोर्टल पर स्टॉक की स्थिति घोषित करनी होगी.

दालों के भंडार पर बारीकी से नजर रख रही है सरकार

बयान में कहा गया कि यदि किसी के पास भंडार निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उन्हें 12 जुलाई 2024 तक इसे निर्धारित भंडार सीमा तक लाना होगा. सरकार ने कहा है कि अरहर और चना दाल पर भंडार सीमा लगाना आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए उसकी ओर से उठाए गए कदमों का एक हिस्सा है. उपभोक्ता मामलों का विभाग स्टॉक के बारे में जानकारी देने वाले पोर्टल के जरिए दालों के भंडार पर बारीकी से नजर रख रहा है.

और पढ़ें: एलआईसी से भी बड़ा आईपीओ लाने जा रही है Hyundai, सेबी में दस्तावेज दाखिल

उत्पादन बढ़ाने के लिए एमएसपी रेट पर दालों की खरीद

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात कम करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अरहर, उड़द और मसूर की खरीद करने की प्रतिबद्धता जताई है. इस कदम का उद्देश्य फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना और वर्ष 2027 तक दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है. राज्य के कृषि मंत्रियों के साथ एक ऑनलाइन बैठक की अध्यक्षता करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के रजिस्ट्रेशन के लिए सहकारी समिति नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से ई-समृद्धि पोर्टल के शुरू किए जाने का भी जिक्र किया.

और पढ़ें: चांद पर पहुंचने के लिए चांदी ने फिर लगाया जोर, सोने की भी बढ़ गई चमक

विज्ञापन
KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola