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गूगल को ऑस्ट्रेलिया में तगड़ा झटका, देना होगा करोड़ों का जुर्माना

Updated at : 18 Aug 2025 8:29 PM (IST)
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Google Australia Fine: गूगल को ऑस्ट्रेलिया में प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन करने पर 5.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 3.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना लगाया गया है. एसीसीसी ने पाया कि गूगल ने टेल्स्ट्रा और ऑप्टस के साथ ऐसे करार किए थे, जिनमें केवल गूगल सर्च इंजन को एंड्रॉयड फोनों पर प्री-इंस्टॉल किया गया. इस कदम से उपभोक्ताओं के विकल्प सीमित हुए और प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई. अदालत में मामला लंबित है और यह फैसला टेक कंपनियों के लिए बड़ा सबक माना जा रहा है.

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Google Australia Fine: दिग्गज टेक कंपनी गूगल को ऑस्ट्रेलिया में प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन करने पर 5.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 3.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना भरना होगा. यह मामला दो प्रमुख दूरसंचार कंपनियों (टेल्स्ट्रा और ऑप्टस) के साथ किए गए प्रतिस्पर्धा-रोधी समझौते से जुड़ा है.

एसीसीसी की कार्रवाई

ऑस्ट्रेलियाई प्रतिस्पर्धा एवं उपभोक्ता आयोग (एसीसीसी) ने सोमवार को बताया कि उसने गूगल के एशिया-प्रशांत खंड के खिलाफ संघीय न्यायालय में कार्यवाही शुरू की है. अदालत अब यह तय करेगी कि लगाया गया जुर्माना उपयुक्त है या नहीं. एसीसीसी का मानना है कि गूगल ने ऐसे अनुबंध किए जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बाधित हुई और उपभोक्ताओं के पास विकल्प सीमित हो गए.

विवादित समझौते की सच्चाई

गूगल पर आरोप है कि उसने टेल्स्ट्रा और ऑप्टस के साथ ऐसे करार किए, जिनके तहत उनके द्वारा बेचे गए एंड्रॉयड फोन पर केवल गूगल सर्च इंजन ही प्री-इंस्टॉल किया गया. दूसरे प्रतिस्पर्धी सर्च इंजनों को जगह नहीं दी गई. इसके बदले दोनों कंपनियों को विज्ञापन राजस्व में हिस्सेदारी दी गई. यह व्यवस्था करीब 15 महीने तक चली और इससे गूगल की मार्केट पकड़ और मजबूत हुई.

गूगल की सफाई

गूगल ने माना है कि इन समझौतों का असर प्रतिस्पर्धा को कम करने वाला रहा. कंपनी ने एक वचनबद्धता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें उसने आश्वासन दिया है कि भविष्य में अनुबंधों से प्री-इंस्टॉलेशन और डिफॉल्ट सर्च इंजन संबंधी प्रतिबंध हटाए जाएंगे. कंपनी ने बयान जारी कर कहा, “हम एसीसीसी की चिंताओं का समाधान करने में प्रसन्न हैं. संबंधित प्रावधान अब लंबे समय से हमारे व्यावसायिक समझौतों का हिस्सा नहीं हैं.”

उपभोक्ताओं पर असर

एसीसीसी की आयुक्त जीना-कैस गॉटलिब ने कहा कि प्रतिस्पर्धा को सीमित करने वाला कोई भी आचरण ऑस्ट्रेलिया में अवैध है. इससे उपभोक्ताओं के लिए विकल्प घटते हैं, लागत बढ़ती है और सेवा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है. इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि बड़ी टेक कंपनियों पर निगरानी जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रह सकें.

टेल्स्ट्रा और ऑप्टस की प्रतिक्रिया

पिछले वर्ष टेल्स्ट्रा, ऑप्टस और उनकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी टीपीजी ने एसीसीसी के समक्ष यह वचन दिया था कि वे भविष्य में गूगल या किसी अन्य टेक कंपनी के साथ ऐसे समझौते नहीं करेंगी, जो उपभोक्ताओं के सर्च विकल्पों को सीमित करें. इसका मतलब है कि अब ऑस्ट्रेलियाई ग्राहकों को स्मार्टफोन पर अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे.

टेक इंडस्ट्री के लिए सबक

यह मामला टेक उद्योग के लिए एक बड़ा सबक है. गूगल जैसी वैश्विक कंपनियां अक्सर अपने प्रभाव और नेटवर्क का इस्तेमाल बाजार पर नियंत्रण मजबूत करने के लिए करती हैं. हालांकि, नियामक संस्थाएं यह सुनिश्चित कर रही हैं कि प्रतिस्पर्धा बनी रहे और उपभोक्ता स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकें.

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गूगल के लिए कड़ा संदेश

गूगल पर लगाया गया 3.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर का जुर्माना सिर्फ आर्थिक सजा नहीं है, बल्कि एक कड़ा संदेश भी है कि किसी भी कंपनी को प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी. ऑस्ट्रेलिया का यह कदम अन्य देशों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जिससे टेक सेक्टर में पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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