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GOLD PRICE : सोने की कीमतों में नरमी का अभी उठा लें फायदा, फिर नहीं मिलेगा ऐसा मौका, जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Updated at : 21 Mar 2020 12:20 PM (IST)
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GOLD PRICE : सोने की कीमतों में नरमी का अभी उठा लें फायदा, फिर नहीं मिलेगा ऐसा मौका, जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Gold PRICE : सोने की की कीमतों में एक बार फिर से गिरावट आयी है. सोने की कीमतों में नरमी का समय ही इसमें निवेश का सबसे सही मौका होता है. इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट कह रहे हैं कि सोने की कीमतों में जितनी गिरावट आती है, उसमें तेजी भी उतनी ही तेजी से आती है. इसलिए नरमी के समय निवेश करने वाला सबसे ज्यादा मुनाफा में रहता है, क्योंकि गोल्ड बंपर रिटर्न देता है. इसलिए विशेषज्ञ कह रहे हैं कि पीली धातु को खरीदने का यही सबसे सही वक्त है. जब-जब वैश्विक मंदी आयी है, सोना ने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया है.

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रांची : सोने (Gold) की की कीमतों में एक बार फिर से गिरावट आयी है. सोने की कीमतों में नरमी का समय ही इसमें निवेश का सबसे सही मौका होता है. इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट कह रहे हैं कि सोने की कीमतों में जितनी गिरावट आती है, उसमें तेजी भी उतनी ही तेजी से आती है. इसलिए नरमी के समय निवेश करने वाला सबसे ज्यादा मुनाफा में रहता है, क्योंकि गोल्ड बंपर रिटर्न देता है. इसलिए विशेषज्ञ कह रहे हैं कि पीली धातु को खरीदने का यही सबसे सही वक्त है. जब-जब वैश्विक मंदी आयी है, सोना ने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया है.

वेदांत एसेट्स एडवाइजर्स के प्रमुख ललित कुमार द्विवेदी कहते हैं कि कोरोना वायरस की मार की वजह से दुनिया में मंदी का दौर चल रहा है. वैश्विक मंदी में दुनिया भर के बाजार धड़ाम हो गये हैं. सोने की कीमतें भी तेजी से गिर रही हैं, लेकिन इस कीमती धातु में निवेश का सबसे बढ़िया मौका यही है. इतिहास गवाह है कि जब-जब वैश्विक मंदी आयी है, सोना ने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया है. इसलिए निवेशकों को यदि बंपर रिटर्न चाहिए, तो उनके लिए सोना में निवेश करने का यही सबसे बढ़िया मौका है.

श्री द्विवेदी का कहना है कि जब वैश्विक मंदी आती है, तो सारे स्टॉक्स धड़ाम हो जाते हैं. ऐसे में सोना में निवेश सबसे फायदेमंद साबित होता है, क्योंकि यह कम समय में बेहतरीन रिटर्न देता है. वर्ष 2008 में जब वैश्विक मंदी आयी थी, तो हम सबने देखा था कि कुछ कारणों से सोने की कीमत में लगातार गिरावट दर्ज की गयी. लेकिन, गिरावट ज्यादा दिनों की नहीं रही.

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उन्होंने कहा कि जल्द ही सोने की चमक लौटी और उस दौरान गोल्ड ने जितना रिटर्न दिया, उतना रिटर्न किसी स्टॉक से निवेशकों को नहीं मिला. श्री द्विवेदी के मुताबिक, इतिहास खुद को दोहरा रहा है और वर्ष 2008 का दौर वापस आता दिख रहा है. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से आज वैश्विक अनिश्चितता का दौर है. बाजार में तेजी से गिर रहा है.

श्री द्विवेदी ने कहा कि सोने की कीमत में भी गिरावट दर्ज की गयी है. लेकिन, यह गिरावट ज्यादा दिनों की नहीं है. उन्होंने कहा कि जब कोरोना वायरस की वजह से दुनिया भर में हाहाकार मचा हुआ है, तेल की कीमतें गिर रही हैं, शेयर मार्केट में तेज गिरावट दर्ज हुई है. कमोडिटीज एक्सचेंज भी कोरोना वायरस की मार से अछूता नहीं रहा. इटीएफ पर भी इसका असर पड़ा है.

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ललित कुमार द्विवेदी ने साथ ही कहा कि वह दिन दूर नहीं, जब सोने में तेजी लौटेगी और यह निवेशकों को बंपर मुनाफा देगा. उन्होंने कहा कि जब भी वैश्विक अनिश्चतता का दौर आता है, सोना सबसे विश्वसनीय निवेश बन जाता है. इस बार भी ऐसा ही होगा, ऐसी उन्हें उम्मीद है.

श्री द्विवेदी ने कहा कि वर्ष 2008 में हमने देखा था कि जब वैश्विक मंदी आयी थी, तो मुनाफा घटा था और कीमतें शुरू में गिर गयीं थीं. कुछ दिनों बाद जब रिजर्व बैंक ने ब्याज दरें घटायीं और बाजार में पैसे की तरलता से सोने की कीमतें तेजी से बढ़ीं. उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ कह रहे हैं कि शेयर बाजार को संभालने के लिए रिजर्व बैंक को ब्याज दरें घटाने की जरूरत है.

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ललित कुमार द्विवेदी ने कहा कि यदि रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती की, तो सोने की चमक वैसे ही लौट आयेगी, जैसे वर्ष 2008 की मंदी के दौरान हुआ था. शेयर मार्केट के एक्सपर्ट श्री द्विवेदी ने कहा कि बाजार में गिरावट से निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. जो लोग धैर्य बनाये रखेंगे, आने वाले दिनों में उन्हें मोटा मुनाफा कमाने का मौका मिलेगा.

उल्लेखनीय है कि कोरोना के डर से कमोडिटी मार्केट में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही. हालात ये हैं कि अमेरिकी क्रूड 17 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है. वहीं, ब्रेंट भी 28 डॉलर के नीचे फिसल गया है. सोना-चांदी में भी दबाव कायम है.

सोने-चांदी पर दबाव कायम

सोने-चांदी में मंगलवार (17 मार्च, 2020) की देर शाम की रिकवरी खत्म हुई. बुधवार (18 मार्च, 2020) को ग्लोबल मार्केट से सोने-चांदी को सपोर्ट नहीं मिला. इंट्रा-डे में कॉमेक्स पर सोना 1500 डॉलर के नीचे फिसल गया. वहीं, कॉमेक्स पर चांदी में 13 डॉलर के नीचे कारोबार कर रही है.

कमजोर इंडस्ट्रियल मांग से चांदी पर भारी दबाव बना हुआ है. निवेशक फिलहाल कैश में रहना पसंद कर रहे हैं. सोने की सेफ हेवन डिमांड नहीं दिख रही है. कोरोना वायरस के कारण बाजार में डर का माहौल बना हुआ है.

क्रूड में कमजोरी कायम

अमेरिकी क्रूड ने 17 साल का निचला स्तर तोड़ दिया है. ब्रेंट क्रूड 28 डॉलर के नीचे फिसल गया है. वहीं, कच्चा तेल 4 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है. अब कच्चा तेल का डिमांड आउटलुक खराब चल रहा है. गोल्डमैन सैक्स ने ब्रेंट अनुमान घटाकर 20 डॉलर कर दिया है.

इसके अलावा दूसरी तिमाही के लिए ब्रेंट अनुमान घटाकर 20 डॉलर किया है. कोरोना संकट के कारण क्रूड डिमांड में भारी कमी आयी है. इस बीच, खबर है कि रूस और सऊदी अरब अप्रैल से उत्पादन बढ़ायेंगे. उधर, इराक ने ओपेक (OPEC) की इमरजेंसी बैठक बुलाने की मांग की है.

6 दिन में 7431 रुपये गिरा सोना

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि फ्यूचर मार्केट में सोना ने 39,740 रुपये का उच्चस्तर देखा, तो 38,650 रुपये के न्यूनतम स्तर पर भी आ गया. अप्रैल सीरीज की बात करें, तो पीली धातु जो 44,961 रुपये तक चढ़ गया था, 37,530 रुपये तक लुढ़क गया. इस तरह एक सप्ताह में सोने की कीमतों में 7,431 रुपये की गिरावट दर्ज की गयी है.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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