Goat Bank: पैसा और ब्लड बैंक तो सुने होंगे, क्या आपने कभी बकरी बैंक के बारे में सुना है ? जानिए बकरी बैंक

Goat Bank: बकरी बैंक महाराष्ट्र की एक अनोखी पहल है, जहां महिलाओं को पैसे की जगह मादा बकरी लोन में दी जाती है. बकरी से मादा बच्ची होने पर वही लौटाई जाती है. इस मॉडल से सैकड़ों महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं और नियमित आमदनी कमा रही हैं.
Goat Bank: आपने पैसे जमा करने वाले बैंक, पैसा निकालने वाले बैंक या फिर ब्लड बैंक के बारे में तो जरूर सुना होगा, लेकिन बकरी बैंक का नाम शायद पहली बार सुन रहे हों. जी हां यह कोई मजाक नहीं बल्कि महाराष्ट्र में चल रही एक यूनीक और सफल पहल है. महाराष्ट्र के जलगांव जिले के चालीसगांव और अकोला के करखेड़ा इलाके में यह खास बैंक काम कर रहा है जहां महिलाओं को नकद लोन नहीं बल्कि मादा बकरी (Female Goat) दी जाती है.
पैसे की जगह बकरी से चुकाया जाता है कर्ज
इस अनोखे बैंकिंग मॉडल में महिलाओं को शुरुआत में एक मादा बकरी दी जाती है. महिला उसकी देखभाल करती है और जब बकरी से मादा बच्ची पैदा होती है तो वही बच्ची बैंक को लौटा दी जाती है. इस तरह यहां कर्ज पैसे से नहीं बल्कि बकरी से चुकाया जाता है. इसके बाद वह महिला बाकी बकरियों से अपनी आमदनी शुरू कर देती है.
महिलाओं को दी जाती है बकरी पालन की पूरी ट्रेनिंग
जलगांव जिले की चालीसगांव तहसील में चल रही इस पहल के तहत महिलाओं को सिर्फ बकरी ही नहीं दी जाती बल्कि पहले उन्हें बकरी पालन की ट्रेनिंग भी दी जाती है. इस ट्रेनिंग में जानवरों की देखभाल सही खानपान बीमारियों से बचाव और प्रबंधन की पूरी जानकारी दी जाती है ताकि महिलाएं इस काम को सही तरीके से कर सकें.

अब तक सैकड़ों महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
पुणे की सेवा सहयोग फाउंडेशन इस बकरी बैंक को संचालित कर रही है. इस पहल के जरिए अब तक 300 से अधिक गरीब विधवा और भूमिहीन महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा चुका है. इस मॉडल ने उन महिलाओं को सहारा दिया है जिन्हें आमतौर पर बैंक से लोन मिलना मुश्किल होता है.
महिलाओं ने बनाई अपनी कंपनी भी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस प्रोजेक्ट से जुड़ी महिलाओं ने बकरियों की बिक्री और मार्केट तक सीधी पहुंच बनाने के लिए मिलकर एक प्रोड्यूसर कलेक्टिव भी शुरू किया है. इसका नाम गिरना परिसर महिला पशुपालक उत्पादक कंपनी रखा गया है जो महिलाओं को बेहतर दाम और बाजार तक सीधी पहुंच दिलाने में मदद कर रही है. इस बकरी बैंक के आयोजक अब इस मॉडल को महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश के अन्य ग्रामीण इलाकों में भी लागू करने की योजना बना रहे हैं. उनका मानना है कि यह मॉडल ग्रामीण रोजगार महिला सशक्तिकरण (Empowerment) और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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