आम आदमी की रसोई में फल, सब्जी के साथ नहीं गली दाल, अंडा-मांस और मसालों ने बनाया जायका

अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई 11 महीने के निचले स्तर पर, मगर खाने-पीने की चीज नहीं हुई सस्ती. फोटो: सोशल मीडिया
Retail Inflation: रिजर्व बैंक का कहना है कि आगे चलकर खाने-पीने की चीजों के दाम महंगाई के रुख को प्रभावित करते रहेंगे. आरबीआई ने 2024-25 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 4.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. साल 2024 के पहले महीने अप्रैल में ही यह आरबीआई के दायरे से बाहर होकर 4.83 फीसदी पर पहुंच गई.
Retail Inflation: भारत में अप्रैल 2024 महीने के दौरान खुदरा महंगाई दर 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई, लेकिन आम आदमी को इससे राहत नहीं मिली. इसका कारण यह है कि पिछले महीने खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी ही दर्ज की गई. हालांकि, इस दौरान खाने-पीने की चीजों में सब्जी, फल और दाल ने आम आदमी को खुदरा बाजार में ताव दिखाया, तो अंडा, मांस और मसाले लोगों के लिए चटकदार साबित हुए. इनकी कीमतें कुछ नरम रहीं.
खुदरा महंगाई दर 11 महीने के निचले स्तर पर
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, अंडा, मांस और मसालों के सस्ता होने से खुदरा महंगाई दर अप्रैल में नरम होकर 11 महीने के निचले स्तर 4.83 फीसदी पर रही. हालांकि खाने के दूसरे सामान के दाम इस दौरान मामूली मजबूत हुए. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति मार्च में 4.85 फीसदी थी, जबकि अप्रैल, 2023 में यह 4.31 फीसदी थी.
अप्रैल में सब्जी, फल और दाल के दाम बढ़े
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2024 में खाने-पीने की चीजों की खुदरा महंगाई मामूली बढ़कर 8.70 फीसदी रही. एक महीने पहले मार्च 2024 में यह 8.52 फीसदी के स्तर पर थी. आकंड़ों में कहा गया है कि अंडा, मांस, मसाले, अनाज और अनाज से जुड़े उत्पादों की महंगाई अप्रैल में कम हुई, जबकि फल, सब्जी और दाल महंगे हुए. ईंधन और लाइट के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) सालाना आधार पर घटकर 4.24 फीसदी रहा.
आरबीआई के दायरे से बाहर महंगाई
सरकार ने खुदरा मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत की घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को दिया हुआ है. केंद्रीय बैंक अपनी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दर निर्धारित करते समय खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर गौर करता है. रिजर्व बैंक का कहना है कि आगे चलकर खाने-पीने की चीजों के दाम महंगाई के रुख को प्रभावित करते रहेंगे. आरबीआई ने 2024-25 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 4.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. साल 2024 के पहले महीने अप्रैल में ही यह आरबीआई के दायरे से बाहर होकर 4.83 फीसदी पर पहुंच गई. पहली तिमाही में इसके 4.9 फीसदी, दूसरी तिमाही में 3.8 फीसदी, तीसरी तिमाही में 4.6 फीसदी और चौथी तिमाही में इसके 4.5 फीसदी रहने का अनुमान है.
सबसे अधिक ओडिशा और सबसे कम दिल्ली में महंगाई
एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में महंगाई राष्ट्रीय औसत 4.11 फीसदी की तुलना में कमी रही, जबकि गांवों में अधिक 5.43 फीसदी रही. सबसे अधिक महंगाई ओड़िशा में 7.11 फीसदी तथा दिल्ली में सबसे कम 2.11 फीसदी रही. राष्ट्रीय औसत से अधिक मुद्रास्फीति दर्ज करने वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश रहे.
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सब्जी और दाल में महंगाई 11 महीने से डबल डिजिट में
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि मुख्य रूप से ईंधन और लाइट सेगमेंट में महंगाई में कमी से मुद्रास्फीति नरम हुई है. इसके अलावा, कपड़ा, जूता-चप्पल, पान और तंबाकू आदि सेगमेंट में कम महंगाई का भी असर पड़ा है. सब्जी और दाल श्रेणी में मुद्रास्फीति छह महीने और 11 महीने से डबल डिजिट में बनी हुई है. इससे खाने-पीने की कैटेगरी में महंगाई ऊंची बनी हुई है.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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