FRAI ने छोटी दुकानों को खोलने की इजाजत देने की मांग की, ताकि कम आमदनी वाले निकाल सकें दिहाड़ी

फेडरेशन ऑफ रिटेलर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफआरएआई) ने सोमवार को सरकार से आग्रह किया कि छोटी दुकानों को खोलने की इजाजत दी जाए, क्योंकि लॉकडाउन के बाद छोटे दुकानदारों की दैनिक आमदनी पूरी तरह बंद हो गयी है.
नयी दिल्ली : फेडरेशन ऑफ रिटेलर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफआरएआई) ने सोमवार को सरकार से आग्रह किया कि छोटी दुकानों को खोलने की इजाजत दी जाए, क्योंकि लॉकडाउन के बाद छोटे दुकानदारों की दैनिक आमदनी पूरी तरह बंद हो गयी है. इसके साथ ही, इन दुकानदारों को क्षतिपूर्ति देने की मांग भी की गयी.
एफआरएआई के मुताबिक वह देश भर के 34 खुदरा संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें बेहद छोटे से लेकर मझोले आकार के दुकानदार शामिल हैं. एफआरएआई ने कहा कि लॉकडाउन के चलते इन खुदरा दुकानदारों की पूरी पूंजी बिना बिके समानों में फंसकर रह गयी है.
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व्यापार संघ ने कहा कि वे अब अपने परिवार की भोजन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी छोटी बचत खर्च कर रहे हैं. एफआरएआई के अध्यक्ष राम आसरे मिश्रा ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपने सदस्यों की कठिनाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें तत्काल अपनी दुकानें खोलने की इजाजत दी जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री जी से अपील करते हैं कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत छोटे खुदरा विक्रेताओं को दैनिक आय में नुकसान की भरपाई के लिए एक आर्थिक पैकेज की घोषणा करें. मिश्रा ने आश्चर्य जताया कि बड़े किराना दुकानदारों को लॉकडाउन के दौरान दुकान खोलने की इजाजत दे दी गयी है. फिर वैसे ही सामान बेचने वाले हमारे छोटे दुकानदार भाइयों को आजीविका से वंचित क्यों रखा गया है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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