मील कूपन्स पर अब ₹200 तक नहीं लगेगा टैक्स, अब हर मील पर होगी बचत

Updated at : 05 Apr 2026 9:32 AM (IST)
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Food Voucher Tax Benefit

इंडियन मील (Photo:Freeik)

Food Voucher Tax Benefit: 1 अप्रैल 2026 से फूड वाउचर पर टैक्स-फ्री लिमिट बढ़कर 200 रुपये हो गई है. अब नए टैक्स रिजीम वाले भी इसका लाभ ले सकेंगे. इससे आपकी इन-हैंड सैलरी में बढ़ोतरी होगी.

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Food Voucher Tax Benefit: अगर आपको भी अपने ऑफिस से Sodexo, Pluxee या Zaggle जैसे फूड वाउचर मिलते हैं, तो आपके लिए एक खुशखबरी है. बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स के नियमों में एक बड़ा बदलाव हुआ है, जो सीधा आपको फायेदा पहुंचाएगा. सरकार ने खाने के कूपन पर मिलने वाली टैक्स-फ्री लिमिट को 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दिया है. 

क्या नए टैक्स सिस्टम वालों को भी मिलेगा फायदा?

जी हां, सबसे बड़ी राहत की बात यही है. पहले इस बात को लेकर काफी उलझन थी कि ‘New Tax Regime’ चुनने वालों को यह फायदा मिलेगा या नहीं. लेकिन 2026 के नए नियमों ने यह साफ कर दिया है कि अब चाहे आप पुराना टैक्स सिस्टम चुनें या नया, आप हर मील पर 200 रुपये तक के वाउचर का टैक्स-फ्री लाभ उठा सकते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार ने जानबूझकर पुरानी पाबंदियों को हटा दिया है ताकि टैक्स भरने की प्रक्रिया सरल हो सके. 

आपकी सैलरी पर इसका क्या असर पड़ेगा?

इस नियम से आपकी ‘Take-home Salary’ यानी हाथ में आने वाली सैलरी बढ़ जाएगी. इसे एक उदाहरण से समझें: पहले सिर्फ 50 रुपये तक का कूपन टैक्स-फ्री था, लेकिन अब यह सीमा 200 रुपये हो गई है. यानी अब आपकी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा ‘परक्विजिट’ (सुविधा) के दायरे में आएगा, जिस पर टैक्स नहीं लगेगा. खास बात यह है कि यह कोई ‘डिडक्शन’ नहीं है, बल्कि इसे सैलरी की गणना से पहले ही बाहर रखा जाता है, जिससे आपकी टैक्स देनदारी कम हो जाती है. 

इस स्कीम का लाभ लेने के लिए शर्तें क्या हैं?

इस फायदे को पाने के लिए कुछ आसान शर्तों का पालन करना जरूरी है:

  • ये कूपन नॉन-ट्रांसफरेबल होने चाहिए (यानी आप इसे किसी और को नहीं दे सकते). 
  • इनका इस्तेमाल सिर्फ कामकाजी घंटों (Working Hours) के दौरान खाने-पीने के आउटलेट्स पर ही किया जा सकता है. 
  • यह सुविधा नियोक्ता (Employer) द्वारा दी जानी चाहिए. 

अब आपको आगे क्या करना चाहिए?

अगर आपकी कंपनी अभी फूड वाउचर्स नहीं दे रही है, तो आप अपनी सैलरी स्ट्रक्चर को ‘रीस्ट्रक्चर’ करने की बात कर सकते हैं. खासकर नए टैक्स सिस्टम वालों के पास टैक्स बचाने के विकल्प कम होते हैं, ऐसे में 200 रुपये प्रति मील का यह नियम आपके लिए सालाना हजारों रुपये की बचत कर सकता है. कंपनियां भी अब अपने कर्मचारियों को खुश करने के लिए इस ऑप्शन को तेजी से अपना रही हैं. 

ये भी पढ़ें: सैलरी भुगतान की तारीख तय करेगी आपका टैक्स, जानें 1 अप्रैल से क्या-क्या बदला

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Soumya Shahdeo

लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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