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खरीदने गया था 40 लाख का फ्लैट, बदले में मिला बैग भरकर पैसा! खोला तो उड़ गए होश

Updated at : 15 Jul 2025 7:45 PM (IST)
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Fake Currency Scam

Fake Currency Scam

Fake Currency Scam: दिल्ली के सीआर पार्क में फ्लैट खरीदने पहुंचे शख्स से 40 लाख की ठगी और नकली नोटों के घोटाले का मामला सामने आया है. कैश एक्सचेंज के नाम पर उसे नकदी से भरा बैग दिया गया, लेकिन घर जाकर पता चला कि उसमें ‘मनोरंजन बैंक ऑफ इंडिया’ के नकली नोट थे. पुलिस ने जांच के बाद 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया और 1.25 करोड़ के नकली नोट बरामद किए. यह गिरोह पहले भी करोड़ों की ठगी कर चुका है.

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Fake Currency Scam: देश की राजधानी दिल्ली में एक व्यक्ति को पॉश कॉलोनी में फ्लैट खरीदना महंगा पड़ गया. उसे इस बात का तनिक भी अंदाजा नहीं था कि जिस फ्लैट का वह सौदा करने जा रहा है, वह उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी चूक बन जाएगा. इस सौदे को लेकर मीटिंग एक फ्लैट में ही हो रही थी. उस फ्लैट में मकान मालिक के साथ कई और लोग भी मौजूद थे. बातचीत हुई, कीमत तय हुई, लेकिन जब पेमेंट की बात आई तो मामला अटक गया. मामला कैश को लेकर अटक गया. कैश का समाधान निकाला गया और उसे बैग भरकर 40 लाख रुपये दिए गए. घर जाकर बैग खोला, तो उसके होश उड़ गए. मामला दिल्ली के सीआर पार्क का है.

कैश एक्सचेंजर बने ठग, पकड़ाया बैग भर पैसा

द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मीटिंग के दौरान कैश पर मामला अटकने के बाद वहां मौजूद कुछ लोग खुद को “कैश एक्सचेंजर” बताने लगे. उन्होंने इस समस्या का एक समाधान पेश किया. उन लोगों कहा कि हमारे पास अभी 40 लाख रुपये नकद हैं. उन्होंने फ्लैट के बाहर उस शख्स को एक बैग थमाया और दावा किया कि इसमें पूरे 40 लाख रुपये रखे हैं. विश्वास इतना मजबूत कराया गया कि शख्स ने तुरंत ही उनके बैंक अकाउंट में 40 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए.

घर जाकर खुली असलियत की परतें

जब वह व्यक्ति बैग लेकर घर पहुंचा और खोला, तो होश उड़ गए. नोट असली नहीं थे. उन पर “मनोरंजन बैंक ऑफ इंडिया” छपा था. यानी जो रकम उसने दी थी, उसके बदले उसे नकली और फर्जी नोटों से भरा बैग थमा दिया गया था. उसने तुरंत ही सीआर पार्क थाने में 6 जुलाई को शिकायत दर्ज करवाई.

पुलिस ने जाल बिछाकर चार आरोपी दबोचे गए

रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने शिकायत मिलते ही जांच शुरू की. जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए थे, उनकी पूरी जानकारी निकाली गई. 9 जुलाई को पुलिस को खबर मिली कि ये गिरोह सैदुलाजाब के एक फ्लैट में इसी तरह की एक और धोखाधड़ी करने वाला है. दक्षिणी जिला पुलिस उपायुक्त अंकित चौहान के नेतृत्व में पुलिस ने फ्लैट पर छापा मारा और तीन आरोपी निखिल, प्रिंस पाल और परवेज को गिरफ्तार कर लिया. अगले ही दिन उनकी निशानदेही पर चौथे आरोपी असगर खान को भी दबोच लिया गया.

नोट गिनने की मशीन से जीतते थे भरोसा

रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे गिरोह की चालाकी यहां खत्म नहीं होती. पुलिस ने बताया कि ये लोग नोट गिनने की मशीन का इस्तेमाल करते थे. शुरुआत में वे 500 के नोटों का एक बंडल गिनवाते थे, जो असली होता था. ग्राहक को भरोसा हो जाता कि सारा पैसा असली है. इसके बाद बाकी बंडलों में ‘मनोरंजन बैंक ऑफ इंडिया’ के नोट भर दिए जाते और गिनने का नाटक करके बैग सौंप दिया जाता.

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पहले भी कर चुके हैं करोड़ों की ठगी

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के पास से 1.25 करोड़ रुपये के नकली नोट, 7.5 लाख रुपये नकद और एक नोट गिनने की मशीन बरामद की है. जांच में खुलासा हुआ कि ये गिरोह पहले भी इसी तरह की कई बड़ी ठगी कर चुका है. पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह इससे पहले तुगलकाबाद में दो बार एक बार 1 करोड़ और दूसरी बार 18 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर चुका है. छतरपुर में भी इनका नाम एक अन्य केस में जुड़ा है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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