50,000 से कम सैलरी वाले करते हैं क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल, 93% लोग प्लास्टिक मनी पर निर्भर
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 15 Jul 2025 8:58 PM
Credit Card
Credit Card: थिंक 360 डॉट एआई की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 50,000 रुपये से कम कमाने वाले 93% वेतनभोगी क्रेडिट कार्ड पर निर्भर हैं. प्लास्टिक मनी उनकी जरूरत बन चुकी है. फिनटेक कंपनियों ने 2022-23 में 92,000 करोड़ रुपये से अधिक के पर्सनल लोन वितरित किए. कम आय वाले लोग तेजी से कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं.
Credit Card: देश में 50,000 रुपये से कम वेतन पाने वालों की जिंदगी या तो उधार पर चलती है या फिर क्रेडिट कार्ड ही सहारा देता है. हालत यह है कि जिन लोगों की आमदनी कम है, उनकी निर्भरता क्रेडिट कार्ड पर ज्यादा बढ़ती जा रही है और धीरे-धीरे वे कर्ज के जंजाल में फंसते जा रहे हैं. इस बात का खुलासा ‘थिंक 360 डॉट एआई’ के एक अध्ययन में सामने आया है.
प्लास्टिक मनी पर जीवन निर्भर
थिंक 360 डॉट एआई के अध्ययन में कहा गया है कि 50,000 रुपये मासिक से कम कमाने वाले लगभग 93% वेतनभोगी इस ‘प्लास्टिक मनी’ पर निर्भर हैं. इस अध्ययन के तहत 12 महीने के दौरान भारत में 20,000 से अधिक वेतनभोगी और स्वरोजगार वाले व्यक्तियों के वित्तीय व्यवहार का विश्लेषण किया गया. इसके मुताबिक, 85% स्वरोजगार वाले व्यक्ति क्रेडिट कार्ड पर निर्भर हैं. मंगलवार को जारी अध्ययन में कहा गया कि ‘अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें’ (बीएनपीएल) सेवाओं का इस्तेमाल 18% स्वरोजगार व्यक्ति और 15% वेतनभोगी व्यक्ति करते हैं.
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वेतनभोगियों की जरूरत बन गया है क्रेडिट कार्ड
‘थिंक 360 डॉट एआई’ के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमित दास ने कहा, ‘‘भारत के विकसित होते कर्ज परिदृश्य में क्रेडिट कार्ड और बीएनपीएल अब वेतनभोगी पेशेवरों से लेकर अस्थायी कर्मियों तक सभी के लिए जरूरत बन गए हैं.’’ रिपोर्ट में वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों (फिनटेक) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख भी किया गया है, जो भारत की डिजिटल कर्ज क्रांति का नेतृत्व कर रही हैं. अध्ययन में कहा गया कि फिनटेक कंपनियों ने 2022-23 में 92,000 करोड़ रुपये से अधिक के पर्सनल लोन वितरित किए, जो मात्रा के हिसाब से सभी नए कर्ज का 76% है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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