Bhojpuri Song: भोजपुरी गाना बनाने में कितना पैसा लगता है?

Bhojpuri Song
Bhojpuri Song: भोजपुरी गाना बनाना सस्ता काम नहीं है. ऑडियो से लेकर वीडियो और प्रमोशन तक, हर स्टेप पर पैसा खर्च होता है. एक गाने का टोटल बजट ₹50,000 से ₹10 लाख तक जा सकता है, सिंगर-लोकेशन और वीडियो क्वालिटी पर निर्भर करता है.
Bhojpuri Song: भोजपुरी म्यूज़िक इंडस्ट्री का जलवा तो आप देख ही रहे हो. हर हफ्ते नया गाना, नए सिंगर, नई हिरोइन और धमाकेदार ठुमके. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक भोजपुरी गाना बनाने में आखिर कितना पैसा लगता है? मतलब गाना सुनते-सुनते हम तो बस ठुमके लगाने लगते हैं, लेकिन उसके पीछे जो खर्चा होता है, वो सुनकर आप भी सोच में पड़ जाओगे. चलो, आज हम आपको पूरा हिसाब-किताब बताते हैं. भोजपुरी गाना बनाने का बजट, वो भी देसी स्टाइल में.
पहले आता है ऑडियो का खर्चा
भइया, गाना है तो आवाज चाहिए और आवाज से पहले चाहिए लिरिक्स यानि कि बोल. अब ये बोल कोई गली-मोहल्ले वाला नहीं, धांसू गीतकार लिखता है.
- गीतकार: ₹5,000 से ₹25,000 तक लेता है. नाम बड़ा तो दाम बड़ा.
- म्यूजिक डायरेक्टर: ₹10,000 से ₹50,000 तक. धुन जितनी मस्त, उतना खर्चा ज़्यादा.
- सिंगर: ₹10,000 से ₹2 लाख! खेसारी लाल यादव या पवन सिंह जैसे बड़े नाम हैं तो समझो जेब खाली.
- रिकॉर्डिंग, मिक्सिंग-विक्सिंग: ₹5,000 से ₹30,000.
अब बारी आती है वीडियो की – असली खर्चा यहीं होता है
भोजपुरी गाने में हिरोइन न नाचे, ठुमके न हों, खेत-खलिहान न दिखे तो क्या ही मजा आएगा? अब इसके लिए डायरेक्टर चाहिए, कैमरा, लोकेशन, हिरोइन.
- डायरेक्टर साहब: ₹20,000 से ₹1 लाख. टॉप क्लास चाहिए तो और महंगा.
- कैमरा टीम: ₹30,000 से ₹1.5 लाख. अब 4K वीडियो चाहिए तो खर्चा भी हाई.
हिरोइन/डांसर: ₹20,000 से ₹1 लाख. फेमस चेहरा लिया तो खर्चा और बढ़ा.
लोकेशन-सेटअप: ₹10,000 से ₹1 लाख. ग्रीन फील्ड, झोपड़ी, तालाब – सब चाहिए.
एडिटिंग: ₹15,000 से ₹50,000. म्यूजिक से मैचिंग कटिंग चाहिए ना?
अब बिना प्रमोशन के कोई गाना नहीं चलता
गाना बना लिया, अब कौन देखेगा? इसके लिए चाहिए यूट्यूब चैनल, फेसबुक पर पोस्ट, इंस्टा पर रील, और कुछ वायरल कट्स. यूट्यूब चैनल पर रिलीज़. अगर खुद का चैनल नहीं है तो ₹10,000 से ₹1 लाख तक लगते हैं.एक भोजपुरी गाना बनाने का टोटल खर्चा ₹50,000 से ₹10 लाख तक. लो-बजट गाना किसी दोस्त के कैमरे से भी बन सकता है और हाई-बजट गाना मुंबई के स्टूडियो से भी. बस जेब में पैसा और दिल में सपना होना चाहिए.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।
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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।
करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।
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अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।
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