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BYJU's Loss: सबसे ज्यादा घाटा वाली स्टॉर्ट-अप बन गयी बायजू, जानें क्यों फेल हुई कंपनी

24 Jan, 2024 11:53 am
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BYJU's Loss: सबसे ज्यादा घाटा वाली स्टॉर्ट-अप बन गयी बायजू, जानें क्यों फेल हुई कंपनी

BYJU's Loss: बायजू के संस्थापक बायजू रवींद्रन (BYJU'S Founder Raveendran) ने हाल ही में वेतन का भुगतान करने के लिए अपने परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाले घर और अचल संपत्तियों को गिरवी रखकर धन जुटाया था.

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BYJU’s Loss: एक वक्त देश की सबसे बड़ी स्टॉर्ट अप कंपनियों में शामिल बायजू की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. हाल ही में, बायजू के संस्थापक बायजू रवींद्रन (BYJU’S Founder Raveendran) ने हाल ही में वेतन का भुगतान करने के लिए अपने परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाले घर और अचल संपत्तियों को गिरवी रखकर धन जुटाया था. मगर अब कंपनी ने घाटे के कारण ये देश के सबसे ज्यादा घाटा वाले स्टॉर्ट अप में शामिल हो गया है. बायजू ब्रांड के तहत परिचालन करने शिक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी थिंक एंड लर्न ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 में उसका परिचालन घाटा बढ़कर 6,679 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी ने बताया कि उसकी दो अनुषंगी इकाइयों व्हाइट हैट जूनियर और ओस्मो में हुए नुकसान के चलते उसका परिचालन घाटा बढ़ा. थिंक एंड लर्न ने शेयर बाजार को बताया कि उसका परिचालन घाटा वित्त वर्ष 2020-21 में 4,143 करोड़ रुपये था. वित्त वर्ष 2020-21 में उसकी आय दोगुनी से अधिक बढ़कर 5,298.43 करोड़ रुपये हो गई, जो 2020-21 में 2,428.39 करोड़ रुपये थी.

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बायजू के दो इकाईयों में दिखी बढ़त

बायजू ने कहा कि कमतर प्रदर्शन करने वाली इकाइयों में मुख्य रूप से व्हाइट हैट जूनियर और ओस्मो रहे. इनसे लगभग 3,800 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जो कुल घाटे का 45 प्रतिशत है. कंपनी ने बताया कि बायजू की अन्य अनुषंगी इकाइयों आकाश और ग्रेट लर्निंग का कारोबार क्रमशः 40 प्रतिशत और 77 प्रतिशत की दर से बढ़ा. इससे कंपनी को थोड़ी राहत मिली है. पिछले महीने मणिपाल एजुकेशन एंड मेडिकल ग्रुप के चेयरमैन रंजन पई ने बायजू द्वारा डेविडसन केम्पनर से जुटाए गए 1,400 करोड़ रुपये के कर्ज का अधिग्रहण किया था. पई के स्वामित्व वाला फंड आरिन कैपिटल बायजू में 2013 में पहला संस्थागत निवेशक था.

क्यों फेल हो गयी कंपनी

शिक्षा-प्रौद्योगिकी मंच के रुप में बायजू काफी तेजी से उभरा. इसके माध्यम से छात्रों को सस्ते में अच्छी ऑनलाइन शिक्षा मिल रही थी. कोविड काल में कंपनी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया. साथ ही, बच्चों की काफी मदद हुई. मगर कई कारणों से कंपनी की स्थिति खराब हो गयी.

  • बाजार संतृप्ति और प्रतिस्पर्धा

    भारत में एड-टेक बाजार संतृप्त हो गया, जिसमें कई खिलाड़ी हिस्सा लेने के लिए प्रतिस्पर्धा करने लगे. स्थापित प्रतिस्पर्धियों और उभरते स्टार्टअप्स ने प्रतिस्पर्धा तेज कर दी, जिससे बायजू के लिए बाजार में अपना प्रभुत्व बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया.

  • स्केलिंग और परिचालन बाधाएं

    तेजी से विस्तार ने परिचालन संबंधी चुनौतियां पैदा कीं, जिससे ग्राहक सेवा और सामग्री वितरण की गुणवत्ता प्रभावित हुई. विकास को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में असमर्थता के कारण ग्राहक प्रतिधारण संबंधी समस्याएं पैदा हुईं.

  • धन उगाही पर अत्यधिक निर्भरता

    बायजू ने निरंतर धन उगाहने पर बहुत अधिक भरोसा किया, जिससे वास्तविक विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अत्यधिक दबाव पैदा हुआ. ठोस राजस्व धाराओं के बिना स्केलिंग पर ध्यान केंद्रित करने से एक अस्थिर व्यवसाय मॉडल तैयार हुआ.

  • छंटनी का निर्णय और उसका प्रभाव

    जैसे ही बायजू को बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ा, कंपनी ने छंटनी को लागू करने का कठिन निर्णय लिया, जिससे उसके कार्यबल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रभावित हुआ. इस कदम ने न केवल कंपनी के संघर्षों की गंभीरता को उजागर किया बल्कि कर्मचारियों के मनोबल और सार्वजनिक धारणा पर भी असर पड़ा. छंटनी के फैसले ने बायजू के आंतरिक मुद्दों को सामने ला दिया, जिससे कंपनी की तूफान का सामना करने की क्षमता और प्रतिभा प्रबंधन के दृष्टिकोण पर सवाल उठाया गया.

  • राजस्व और निवेशकों के विश्वास में गिरावट

    बायजू को शुरू में एक यूनिकॉर्न के रूप में प्रतिष्ठित किया गया था. लेकिन बाजार संतृप्ति और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण इसकी राजस्व वृद्धि स्थिर होने लगी. राजस्व धाराओं में विविधता लाने में विफलता और कुछ प्रमुख उत्पादों पर अत्यधिक निर्भरता ने टिकाऊ विकास की इसकी क्षमता को सीमित कर दिया.

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Madhuresh Narayan

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By Madhuresh Narayan

Madhuresh Narayan is a contributor at Prabhat Khabar.

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