क्या बजट 2026 में सीनियर सिटीजन को मिलेगा अलग टैक्स ट्रीटमेंट, या समान स्लैब का बोझ बना रहेगा?

बजट 2026 से क्या उम्मीदें
Budget 2026: टैक्स एक्सपर्ट का मानना है कि बजट 2026 में सीनियर सिटीजन के लिए अलग टैक्स स्लैब, ऊंची बेसिक छूट और मेडिकल खर्चों पर एक्स्ट्रा डिडक्शन जरूरी है, ताकि बढ़ती महंगाई, सीमित आय और स्वास्थ्य जोखिमों के बीच उन्हें वास्तविक और सम्मानजनक कर राहत मिल सके.
Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2025 में मिडल क्लास और आम टैक्सपेयर को बड़ी राहत दी गई. नए टैक्स स्लैब्स के तहत ₹12 लाख तक की सालाना आय को टैक्स-फ्री कर दिया गया है. अगर इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन को जोड़ा जाए, तो यह सीमा प्रभावी (Limit Effective) रूप से ₹12.75 लाख तक पहुंच जाती है. यह फैसला नौकरीपेशा और युवा टैक्सपेयर के लिए निश्चित रूप से राहत भरा है, लेकिन बजट के इस “टैक्स-फ्रेंडली” चेहरे के पीछे एक बड़ा सवाल भी छुपा है. क्या सीनियर सिटीजन को नजरअंदाज कर दिया गया?
वरिष्ठ नागरिकों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
नए टैक्स सिस्टम में वरिष्ठ नागरिक (60 वर्ष से ऊपर) और सुपर सीनियर सिटीजन (80 वर्ष से ऊपर) को युवा टैक्सपेयर के समान टैक्स स्लैब में रखा गया है. जबकि वास्तविकता यह है कि बढ़ती उम्र के साथ आर्थिक चुनौतियां भी तेजी से बढ़ती हैं.
- स्वास्थ्य खर्च लगातार बढ़ता है
- रिटायरमेंट के बाद आय के स्रोत सीमित या फिक्स हो जाते हैं
- मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम महंगे होते जाते हैं
- जीवन यापन के लिए बचत और ब्याज पर निर्भरता बढ़ती है
- इसी वजह से टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि वरिष्ठ नागरिकों को आम करदाताओं के बराबर टैक्स दायरे में रखना व्यावहारिक और न्यायसंगत (Justifiable) नहीं है.
उम्र की अनदेखी करता टैक्स सिस्टम
ValueCurve Financial Services के पार्टनर रोनक मोरजारिया का मानना है कि मौजूदा टैक्स ढांचा वरिष्ठ नागरिकों के साथ न्याय नहीं करता. उनके अनुसार, आज 60 वर्ष से अधिक उम्र के करदाताओं को भी 60 वर्ष से कम उम्र के लोगों जितना ही टैक्स देना पड़ता है, जबकि दोनों की जरूरतें और आर्थिक परिस्थितियां बिल्कुल अलग होती हैं. रिटायरमेंट के बाद आय सीमित हो जाती है और खर्च, खासकर स्वास्थ्य से जुड़े, तेजी से बढ़ते हैं. ऐसे में टैक्स सिस्टम को केवल आय के आधार पर नहीं, बल्कि उम्र और उससे जुड़े खर्चों की वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि आगामी बजट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग टैक्स स्लैब लाना अब समय की जरूरत बन चुका है.
स्वास्थ्य खर्च और टैक्स राहत का सीधा संबंध
वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे बड़ा आर्थिक दबाव मेडिकल खर्च होता है, जो बढ़ती उम्र के साथ लगातार बढ़ता जाता है. टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा टैक्स राहत इस बढ़ते खर्च के मुकाबले नाकाफी है. Tax2win के CEO और को-फाउंडर अभिषेक सोनी के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त टैक्स सपोर्ट की सख्त जरूरत है.
केवल सेक्शन 80D के तहत सीमित मेडिकल डिडक्शन से वास्तविक राहत नहीं मिल पाती. अगर बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ाई जाए और मेडिकल खर्चों पर अतिरिक्त कटौतियों की अनुमति दी जाए, तो इससे बुजुर्ग करदाताओं का टैक्स बोझ काफी हद तक कम हो सकता है. नए टैक्स सिस्टम में कई पारंपरिक छूट और कटौतियां हटाए जाने के कारण इसका सीधा और नकारात्मक असर वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ रहा है.
बजट 2026 से क्या उम्मीदें?
अब जैसे-जैसे केंद्रीय बजट 2026 नजदीक आ रहा है, वरिष्ठ नागरिकों और टैक्स विशेषज्ञों की नजर सरकार पर टिकी है. बढ़ती महंगाई, सीमित आय और तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य खर्च को देखते हुए अब टार्गेटेड टैक्स राहत केवल मांग नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में सरकार नए कदमों पर विचार कर सकती है जैसे-
- वरिष्ठ और सुपर सीनियर सिटीजन के लिए अलग टैक्स स्लैब
- बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट में बढ़ोतरी
- मेडिकल खर्च और हेल्थ इंश्योरेंस पर अतिरिक्त टैक्स कटौती
- नए टैक्स सिस्टम में उम्र-आधारित राहत की वापसी
Also Read: PM किसान की लिस्ट से कहीं आपका नाम बाहर तो नहीं ? मोबाइल से 2 मिनट में ऐसे चेक करें अपना स्टेटस
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




