बजट 2026 में ‘देश पहले’ फॉर्मूला ? डोमेस्टिक इकोनॉमी पर ज्यादा जोर, बोले एक्सपर्ट

Updated at : 24 Jan 2026 12:47 PM (IST)
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Budget 2026 Expectations

टैक्स, खर्च और डिफेंस पर क्या बोले राहुल अरोड़ा

Budget 2026 Expectations: एक्सपर्ट राहुल अरोड़ा का मानना है कि बजट 2026 में सरकार डोमेस्टिक इकोनॉमी को प्राथमिकता दे सकती है. कस्टम ड्यूटी में बदलाव, खर्च पर नियंत्रण और विदेशी निर्भरता कम करना सरकार की मुख्य रणनीति हो सकती है.

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Budget 2026 Expectations: केंद्रीय बजट 2026 को लेकर Ashika Group के CEO राहुल अरोड़ा ने बजट से जुड़ी कुछ अहम बातें कही हैं. उनका मानना है कि इस बार सरकार को ऐसा बजट लाना होगा जो देश के भीतर की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करे और विदेशी निर्भरता को थोड़ा कम करे.

डोमेस्टिक इकोनॉमी पर ज्यादा ध्यान

राहुल अरोड़ा के मुताबिक मौजूदा हालात में सरकार को ऐसा बजट लाना चाहिए, जिसमें फोकस देश के अंदर की अर्थव्यवस्था पर हो. मतलब ऐसा बजट जो घरेलू उद्योगों को सुरक्षा दे, देश में बने सामान को बढ़ावा दे और बाहर से आने वाले उत्पादों पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करे. उन्होंने कहा कि कस्टम ड्यूटी को लेकर सरकार कुछ बदलाव कर सकती है. खासतौर पर अमेरिका से आने वाले कुछ सामानों पर रियायतें दी जा सकती हैं. इसके अलावा आने वाले समय में लेन-देन के बदले व्यापार यानी barter trade जैसे विकल्पों पर भी सरकार काम कर सकती है.

ग्लोबल हालात अभी साफ नहीं

राहुल अरोड़ा का कहना है कि दुनिया भर में टैरिफ और ट्रेड डील को लेकर अभी काफी अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसे में सरकार की कोशिश यही रहेगी कि विदेशी बाजारों पर निर्भरता कम हो और देश के अंदर की आर्थिक ताकत को और मजबूत किया जाए. सरकारी खर्च को लेकर अरोड़ा का मानना है कि FY26 में करीब ₹10.8 लाख करोड़ का कैपिटल खर्च ज्यादा वास्तविक लगता है, जबकि बजट में पहले ₹11.1 लाख करोड़ का अनुमान रखा गया था. उन्होंने यह भी बताया कि इस साल टैक्स कलेक्शन उम्मीद से कम रहा है, इसलिए सरकार को खर्च करते समय ज्यादा सावधानी बरतनी होगी.

टैक्स और घाटे पर क्या स्थिति?

उनके मुताबिक टैक्स से होने वाली आमदनी करीब 8 से 10 प्रतिशत के आसपास रह सकती है, जिससे सरकार के लिए खर्च कम करना आसान नहीं होगा. फिस्कल डेफिसिट यानी राजकोषीय घाटा, जो इस साल करीब 4.4 प्रतिशत है, अगले साल इसमें मामूली गिरावट आकर यह लगभग 4.2 प्रतिशत तक रह सकता है. डिसइन्वेस्टमेंट यानी सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने को लेकर भी चुनौतियां बनी रहेंगी. पिछले कई सालों से सरकार अपना टारगेट पूरा नहीं कर पाई है और मौजूदा शेयर बाजार की स्थिति भी ज्यादा मददगार नहीं है. इसके बावजूद सरकार सरकारी कंपनियों से पैसे जुटाने की कोशिशें जारी रखेगी.

प्राइवेट निवेश और डिफेंस सेक्टर

राहुल अरोड़ा का कहना है कि प्राइवेट कंपनियों का निवेश काफी हद तक सरकारी खर्च पर निर्भर करेगा. अगर बाजार में मांग बढ़ती है, तो निजी निवेश में भी तेजी आ सकती है. उन्होंने डिफेंस सेक्टर को अहम बताते हुए कहा कि इस साल डिफेंस पर खर्च तेजी से बढ़ा है, लेकिन इतनी तेज़ ग्रोथ लंबे समय तक बनी रहे, यह जरूरी नहीं. रुपये की कमजोरी को लेकर अरोड़ा ने चिंता जताई और कहा कि अगर रुपया लंबे समय तक कमजोर रहता है, तो विदेशी निवेशक दूरी बना सकते हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल काबू में हैं, जिससे देश के करंट अकाउंट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ा है.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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