बजट 2026 में ‘देश पहले’ फॉर्मूला ? डोमेस्टिक इकोनॉमी पर ज्यादा जोर, बोले एक्सपर्ट

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बजट 2026 में ‘देश पहले’ फॉर्मूला ? डोमेस्टिक इकोनॉमी पर ज्यादा जोर, बोले एक्सपर्ट

Budget 2026 Expectations: एक्सपर्ट राहुल अरोड़ा का मानना है कि बजट 2026 में सरकार डोमेस्टिक इकोनॉमी को प्राथमिकता दे सकती है. कस्टम ड्यूटी में बदलाव, खर्च पर नियंत्रण और विदेशी निर्भरता कम करना सरकार की मुख्य रणनीति हो सकती है.

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Budget 2026 Expectations: केंद्रीय बजट 2026 को लेकर Ashika Group के CEO राहुल अरोड़ा ने बजट से जुड़ी कुछ अहम बातें कही हैं. उनका मानना है कि इस बार सरकार को ऐसा बजट लाना होगा जो देश के भीतर की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करे और विदेशी निर्भरता को थोड़ा कम करे.

डोमेस्टिक इकोनॉमी पर ज्यादा ध्यान

राहुल अरोड़ा के मुताबिक मौजूदा हालात में सरकार को ऐसा बजट लाना चाहिए, जिसमें फोकस देश के अंदर की अर्थव्यवस्था पर हो. मतलब ऐसा बजट जो घरेलू उद्योगों को सुरक्षा दे, देश में बने सामान को बढ़ावा दे और बाहर से आने वाले उत्पादों पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करे. उन्होंने कहा कि कस्टम ड्यूटी को लेकर सरकार कुछ बदलाव कर सकती है. खासतौर पर अमेरिका से आने वाले कुछ सामानों पर रियायतें दी जा सकती हैं. इसके अलावा आने वाले समय में लेन-देन के बदले व्यापार यानी barter trade जैसे विकल्पों पर भी सरकार काम कर सकती है.

ग्लोबल हालात अभी साफ नहीं

राहुल अरोड़ा का कहना है कि दुनिया भर में टैरिफ और ट्रेड डील को लेकर अभी काफी अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसे में सरकार की कोशिश यही रहेगी कि विदेशी बाजारों पर निर्भरता कम हो और देश के अंदर की आर्थिक ताकत को और मजबूत किया जाए. सरकारी खर्च को लेकर अरोड़ा का मानना है कि FY26 में करीब ₹10.8 लाख करोड़ का कैपिटल खर्च ज्यादा वास्तविक लगता है, जबकि बजट में पहले ₹11.1 लाख करोड़ का अनुमान रखा गया था. उन्होंने यह भी बताया कि इस साल टैक्स कलेक्शन उम्मीद से कम रहा है, इसलिए सरकार को खर्च करते समय ज्यादा सावधानी बरतनी होगी.

टैक्स और घाटे पर क्या स्थिति?

उनके मुताबिक टैक्स से होने वाली आमदनी करीब 8 से 10 प्रतिशत के आसपास रह सकती है, जिससे सरकार के लिए खर्च कम करना आसान नहीं होगा. फिस्कल डेफिसिट यानी राजकोषीय घाटा, जो इस साल करीब 4.4 प्रतिशत है, अगले साल इसमें मामूली गिरावट आकर यह लगभग 4.2 प्रतिशत तक रह सकता है. डिसइन्वेस्टमेंट यानी सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने को लेकर भी चुनौतियां बनी रहेंगी. पिछले कई सालों से सरकार अपना टारगेट पूरा नहीं कर पाई है और मौजूदा शेयर बाजार की स्थिति भी ज्यादा मददगार नहीं है. इसके बावजूद सरकार सरकारी कंपनियों से पैसे जुटाने की कोशिशें जारी रखेगी.

प्राइवेट निवेश और डिफेंस सेक्टर

राहुल अरोड़ा का कहना है कि प्राइवेट कंपनियों का निवेश काफी हद तक सरकारी खर्च पर निर्भर करेगा. अगर बाजार में मांग बढ़ती है, तो निजी निवेश में भी तेजी आ सकती है. उन्होंने डिफेंस सेक्टर को अहम बताते हुए कहा कि इस साल डिफेंस पर खर्च तेजी से बढ़ा है, लेकिन इतनी तेज़ ग्रोथ लंबे समय तक बनी रहे, यह जरूरी नहीं. रुपये की कमजोरी को लेकर अरोड़ा ने चिंता जताई और कहा कि अगर रुपया लंबे समय तक कमजोर रहता है, तो विदेशी निवेशक दूरी बना सकते हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल काबू में हैं, जिससे देश के करंट अकाउंट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ा है.

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अभिषेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By अभिषेक पाण्डेय

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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