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मंदी की चपेट में ब्रिटेन, क्या अन्य देशों पर भी पड़ेगा असर, जानिए क्या होती है आर्थिक मंदी

Updated at : 18 Nov 2022 3:06 PM (IST)
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मंदी की चपेट में ब्रिटेन, क्या अन्य देशों पर भी पड़ेगा असर, जानिए क्या होती है आर्थिक मंदी

अर्थव्यवस्था के लिए मंदी एक ऐसा दौर है जिसमें किसी देश की जीडीपी लगातार दो तिमाही तक गिरती जाती है. मंदी के कारण देश में महंगाई और बेरोजगारी समेत कई समस्या बढ़ने लगती है. मंदी के कारण आम लोगों की आय कम हो जाती है और शेयर बाजार गिरने लगती है.

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क्या ब्रिटेन आर्थिक मंदी की चपेट में आ गया है. क्या इसका असर दुनिया के अन्य देशों को भी देखना पड़ेगा. ब्रिटेन के वित्त मंत्री जेरेमी हंट ने कहा है दे ब्रिटेन वर्तमान में मंदी के दौर से गुजर रहा है. उन्होंने कहा कि मंदी के कारण देश की अर्थव्यवस्था में सिकुड़न आ सकती है. वहीं, मंदी को लेकर वित्त मंत्री जेरेमी हंट ने कई कदम उठाने का ऐलान भी किया है.

वित्त मंत्री ने कहा कि पूरे विश्व में ऊर्जा संकट, मुद्रास्फीति पर चर्चा हो रही है. दुनिया के कई देश आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं. उन्होंने ब्रिटेन को मंदी की मार से राहत देने वाला प्लान भी तैयार किया है. साथ ही कहा कि देश नाजुक दौर से गुजर रहा है ऐसे में कुछ कठोर फैसले करने होंगे तभी हम देश को लोगों को मंदी की मार और नौकरी खोने के डर से निकाल सकते हैं.

क्या होता है मंदी: अर्थव्यवस्था के लिए मंदी एक ऐसा दौर है जिसमें किसी देश की जीडीपी लगातार दो तिमाही तक गिरती जाती है. मंदी के कारण देश में महंगाई और बेरोजगारी समेत कई समस्या बढ़ने लगती है. मंदी के कारण आम लोगों की आय कम हो जाती है और शेयर बाजार गिरने लगती है.

कब आती है मंदी: अर्थशास्त्र के मुताबिक जब किसी देश की अर्थव्यवस्था में लगातार दो तिमाही तक गिरावट आती है तो उसे मंदी की संज्ञा दी जाती है. जब किसी अर्थव्यवस्था में लगातार कई तिमाहियों तक विकास बढ़ने की बजाय गिरने लगता है तो कहा जाता है कि देश आर्थिक मंदी के हालात से गुजर रहा है.

मंदी में क्या होता है: आर्थिक मंदी को दौरान देश के लोगों के पास पैसों की कमी होने लगती है. जिस कारण बाजार में मांग प्रभावित होती. मांग का पूर्ति के साथ सीधा संपर्क है. यानी मांग घटने से उत्पादन भी गिरने लगता है. क्योंकि उत्पाद का कोई खरीदार नहीं होता. ऐसे में कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी करने लगती है. छंटनी के कारण देश में बेरोजगारी और बढ़ जाती है. 1929 में दुनिया के सामने ऐसे ही हालात बने थे. उस समय पूरी दुनिया ने अबतक की सबसे बड़ी मंदी देखी थी. 

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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