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बिना सिम के UPI ट्रांजेक्शन कर सकेंगे NRI, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने 12 देशों में शुरू की नई सेवा

20 Aug, 2025 4:09 pm
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UPI Transactions

UPI में बड़ा बदलाव, अब रोजाना 10 लाख तक का ट्रांजैक्शन

UPI Transactions: एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने एनआरआई ग्राहकों के लिए बिना भारतीय सिम कार्ड के यूपीआई सेवा शुरू की है. अब ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूएसए, यूके, सिंगापुर और अन्य 12 देशों में रहने वाले एनआरई और एनआरओ खाता धारक अपने अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर से यूपीआई से जुड़ सकते हैं. इसके जरिए, वे भारत में बिल भुगतान, मनी ट्रांसफर और मर्चेंट पेमेंट रियल-टाइम में कर सकेंगे. यह पहल एनआरआई के लिए डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित, सहज और अधिक सुविधाजनक बनाएगी.

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UPI Transactions: भारत के सबसे बड़े स्मॉल फाइनेंस बैंक एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (एयू एसएफबी) ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अपने नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल (NRE) और नॉन-रेजिडेंट ऑर्डिनरी (NRO) खाता धारकों के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) सेवाओं की शुरुआत की है. यह सेवा अब अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबरों के माध्यम से उपलब्ध होगी. यह पहल नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के हालिया निर्देशों के अनुसार है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबरों को यूपीआई से जोड़ने की अनुमति दी गई थी.

बिना भारतीय सिम कार्ड के UPI का लाभ

अब प्रवासी भारतीयों (NRI) को UPI का इस्तेमाल करने के लिए भारतीय सिम कार्ड की आवश्यकता नहीं होगी. ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, हांगकांग, मलेशिया, ओमान, क़तर, सऊदी अरब, सिंगापुर, यूएई, यूके और यूएसए जैसे 12 देशों में रहने वाले ग्राहक सीधे अपने अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर से अपने NRE/NRO खातों को UPI से लिंक कर पाएंगे. इसके माध्यम से वे भारत में आसानी से बिल भुगतान, मनी ट्रांसफर और मर्चेंट परचेज़ जैसे काम रियल-टाइम में कर सकेंगे.

सुरक्षित और सहज डिजिटल बैंकिंग अनुभव

एयू एसएफबी की यह नई सेवा न केवल सुरक्षित है, बल्कि इस्तेमाल में बेहद आसान भी है. पात्र एनआरआई ग्राहक अपने अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर के साथ बिना किसी अतिरिक्त शुल्क और बिना भारतीय मोबाइल कनेक्शन के UPI प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. इससे डिजिटल बैंकिंग का अनुभव और अधिक सहज बनेगा और प्रवासी भारतीय भारत से वित्तीय रूप से और मजबूती से जुड़े रह सकेंगे.

प्रवासी भारतीयों के लिए फायदे

इस सुविधा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब एनआरआई को भारत आने पर नकदी ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी. वे आसानी से QR कोड स्कैन कर कैशलेस भुगतान कर सकेंगे. इसके अलावा, वे विदेश से भी भारत में अपने परिवार या व्यापारिक लेन-देन का तेज़ और सुरक्षित निपटारा कर पाएंगे. यह सुविधा उन लाखों एनआरआई के लिए वरदान साबित होगी जो भारत के साथ निरंतर वित्तीय लेन-देन करते हैं.

बैंक की प्रतिबद्धता और दृष्टिकोण

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के ईडी और डिप्टी सीईओ उत्तम टिबरेवाल ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबरों के साथ NRE और NRO खाता धारकों के लिए UPI सक्षम करके हम पारंपरिक सीमाओं को समाप्त कर रहे हैं और एनआरआई को भारत से वित्तीय रूप से जुड़े रहने की शक्ति दे रहे हैं, वह भी आसानी, सुरक्षा और सुविधा के साथ. अब एनआरआई भारत आने पर QR कोड स्कैन कर कैशलेस भुगतान कर सकेंगे.” उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल न केवल भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए डिजिटल बैंकिंग को सरल बनाएगी, बल्कि भारत सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन को भी मजबूती प्रदान करेगी.

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डिजिटल बैंकिंग को मिलेगा बढ़ावा

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की यह पहल भारतीय प्रवासी समुदाय को बिना भारतीय सिम कार्ड के UPI इस्तेमाल की सुविधा देकर उन्हें भारत से और निकट लाती है. यह कदम वैश्विक स्तर पर डिजिटल बैंकिंग की संभावनाओं को बढ़ावा देगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को और मज़बूती प्रदान करेगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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