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TATA का एक बार फिर सरताज बन सकती है एयर इंडिया! सरकारी विमानन कंपनी को खरीदने की होड़ में टाटा ग्रुप सबसे आगे

एक अधिकारी ने बताया कि देश में सॉल्ट से सॉफ्टवेयर तक बनाने वाला टाटा समूह लंबे समय से वित्तीय घाटे में चल रही एयर इंडिया को खरीदने में अपनी दिलचस्पी दिखाने वाली कंपनियों में सबसे आगे चल रहा है.

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
एयर इंडिया की हिस्सेदारी बिक्री करेगी सरकार.
एयर इंडिया की हिस्सेदारी बिक्री करेगी सरकार.
फोटो : पीटीआई.

Air India Selloff : वित्तीय घाटे में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया एक बार फिर देसी कंपनी टाटा का सरताज बन सकती है. खबर है कि इस विमानन कंपनी की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए सरकार ने बोली लगाने की आखिरी तारीख 15 सितंबर से आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है और सरकार की विमानन कंपनी को खरीदने की होड़ में टाटा समूह सबसे आगे चल रहा है. हालांकि, केंद्र की मोदी सरकार ने बोली लगाने की डेडलाइन को करीब पांच बार आगे बढ़ाया है.

टाटा ने दिसंबर 2020 में ही सौंप दी है प्राइमरी बोली

समाचार एजेंसी पीटीआई की ओर से दी गई खबर के अनुसार, एक अधिकारी ने बताया कि देश में सॉल्ट से सॉफ्टवेयर तक बनाने वाला टाटा समूह लंबे समय से वित्तीय घाटे में चल रही एयर इंडिया को खरीदने में अपनी दिलचस्पी दिखाने वाली कंपनियों में सबसे आगे चल रहा है. टाटा ने एयर इंडिया को खरीदने के लिए दिसंबर 2020 में ही प्राइमरी बोली सरकार को सौंप दी है.

अप्रैल 2021 में आखिरी बार बोलियां आमंत्रित

उन्होंने बताया कि प्राइमरी बोलियों का विश्लेषण करने के बाद केवल योग्य बोलीदाताओं को एयर इंडिया के वर्चुअल डेटा रूम (वीडीआर) तक पहुंच प्रदान की गई. इसके बाद निवेशकों के सवालों का जवाब दिया गया. इसके बाद सरकार ने अप्रैल में एयर इंडिया के लिए वित्तीय बोलियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की थी और बोली लगाने की डेडलाइन 15 सितंबर तय की.

दिसंबर तक पूरी हो जाएगा अधिग्रहण समझौता

अधिकारी ने बताया कि 15 सितंबर तक सभी बोलियां आने के बाद सरकार रिजर्व प्राइस का फैसला करेगी. अधिग्रहण के इस समझौते को दिसंबर 2021 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है. नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री वीके सिंह ने भी इस साल की जुलाई में संसद को बताया था कि विमानन कंपनी के लिए वित्तीय बोलियां 15 सितंबर तक प्राप्त की जाएंगी.

पांच बार बढ़ाई गई डेडलाइन

गौरतलब है कि सरकार एयर इंडिया में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है. विमानन कंपनी 2007 में घरेलू ऑपरेटर इंडियन एयरलाइंस के साथ विलय के बाद से घाटे में है. यह प्रक्रिया हालांकि जल्द पूरी की जानी थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया में देरी हुई और सरकार ने एयर इंडिया की प्राइमरी बोलियां जमा करने की डेडलाइन पांच बार बढ़ाई.

खरीदार कंपनी को मिलेगा सर्वाधिकार

सरकार की शर्तों के अनुसार, एयर इंडिया को खरीदने वाले सफल बोलीदाता को घरेलू हवाई अड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 अंतरराष्ट्रीय लैंडिंग तथा पार्किंग आवंटनों का नियंत्रण दिया जाएगा. सफल बोली लगाने वाली कंपनी को एयर इंडिया की सस्ती विमानन सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस का भी 100 फीसदी नियंत्रण मिलेगा और एआईएसएटीएस में 50 फीसदी हिस्सेदारी पर कब्जा होगा.

2017 से ही एयर इंडिया को बेचने का प्रयास कर रही सरकार

सरकार 2017 से ही एयर इंडिया को बेचने का प्रयास कर रही है. तब से लेकर अब तक उसका यह प्रयास सफल नहीं हो पाया है. इस बार सरकार ने संभावित खरीदार को यह आजादी दी है कि वह एयर इंडिया का कितना कर्ज बोझ अपने ऊपर लेना चाहता है, वह फैसला करे. इससे पहले बोली लगाने वालों को एयरलाइन का पूरा 60,074 करोड़ रुपये का कर्ज अपने ऊपर लेने का कहा जा रहा था.

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