नयी दिल्ली / बेंगलुरु : सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इंफोसिस के नामी-गिरामी सह-संस्थापकों के साथ खींचतान में उलझे कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल सिक्का ने आज कहा कि उनकी कंपनी को लेकर मीडिया में चल रहा ‘ड्रामा’ बहुत अधिक ध्यान भंग करने वाला है. इस बीच हालांकि कंपनी के सबसे लंबे समय तक चेयरमैन रहे एन. आर. नारायणमूर्ति ने कंपनी संचालन के मानकों से जुडी चिंताओं पर बल दिया है और कहा है कि इसका ‘समुचित तरीके’ से समाधान किया जना चाहिए. नारायणमूर्ति, नंदन नीलेकणि और कृष गोपालन के कंपनी के संचालन से जुडे मुद्दों पर प्रश्न उठाने के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर कोई टिप्पणी करते हुए सिक्का ने कहा कि कंपनी का ताना-बाना बहुत मजबूत आधार पर बुना गया है.
मुंबई में एक निवेशक सम्मेलन में उन्होंने कहा, ‘‘यह (मीडिया की चर्चा) हमारा सारा ध्यान खींचती है लेकिन अगर इससे परे देखा जाए तो एक बहुत मजबूत ताना-बाना है जिस पर कंपनी का आधार टिका है.” सिक्का ने कहा, ‘‘मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि मैं इसका नेतृत्व कर रहा हूं .” उन्होंने कहा, ‘‘मेरे नारायणमूर्ति जी के साथ बहुत ही आत्मिक और सौहार्द्र पूर्ण संबंध रहे हैं.” संस्थापकों के साथ उनके संबंध के बारे में पूछे जाने पर सिक्का ने कहा, ‘‘संस्थापकों के साथ मेरे संबंध…? ये बहुत अच्छे हैं. मैं मूर्ति जी से अक्सर मिलता रहता हूं…मेरे मूर्ति जी के साथ संबंध बहुत ही हार्दिक और गर्मजोशी भरे रहे हैं. मैं उनसे साल में 4-5 बार मिल लेता हूं. ”
सिक्का का यह बयान ऐसे समय आया है जब कंपनी के संस्थापकों द्वारा कंपनी के प्रबंधन को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई हैं और इनको लेकर काफी विवाद बना हुआ है. चिंता के प्रमुख मुद्दों में सिक्का का वेतन बढाकर 1.1 करोड डॉलर सालना किया जाना और पूर्व कार्यकारी राजीव बंसल एवं डेविड केनेडी को कंपनी छोडने पर भारी राशि का भुगतान करना है. लेकिन इस मामले में मूर्ति ने कहा है कि उन्होंने कंपनी के संचालन से जुडी अपनी चिंताओं को वापस नहींलिया है. उल्लेखनीय है कि इंफोसिस के सभी सह-संस्थापकों के पास कंपनी की कुल 13 प्रतिशत हिस्सेदारी है.
नारायणमूर्ति ने कहा, ‘‘नहीं, मैंने जो चिंता प्रकट की थी उसे वापस नहीं लिया है. बोर्ड को समुचित तरीके से इनका समाधान करना होगा. पूरी पारदर्शिता दिखायी जानी चाहिए और जिन लोगों का दायित्व बनता है उन्हें उत्तरदायित्व स्वीकार करना चाहिए.” उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि इंफोसिस के निदेशक मंडल में सभी लोग ‘अच्छी नियत रखने वाले और बहुत ईमानदार हैं, पर अच्छे लोगों से भी कभी-कभी गलती हो जाती है.’
उन्होंने कहा, ‘‘..अच्छे नेतृत्व का फर्ज बनता है कि वह सभी संबद्ध पक्षों की चिंताओं पर ध्यान दे और निर्णयों का पुनर्मूल्यांकन करे तथा उसका परिमार्जन करे. मुझे उम्मीद है कि चीजें ठीक करने की कार्रवाई जल्द होगी और वे कंपनी के हित में संचालन व्यवस्था को अधिक अच्छा बना जाएंगे.” कंपनी के कुछ संस्थापकों ने मुख्य कार्यकारी विशाल सिक्का का वेतन बढाकर 1.1 करोड डॉलर किए जाने और दो पूर्व अधिकारियों राजीव बंसल (मुख्य वित्त अधिकारी) तथा डेविड केनेडी (महा-विधि परामर्शदाता) को नौकरी छोडने के समय दिए गए विदायी पैकेज पर आपत्तियां उठाते हुए इसे इंफोसिस की कार्यसंस्कृति और संचालन परम्परा के खिलाफ बताया था.
नारायणमूर्ति को ‘अतुलनीय इंसान’ बताते हुए सिक्का ने कहा कि उनसे जब भी मुलाकात होती है तो आमतौर पर क्वांटम फिजिक्स और तकनीकी पर चर्चा होती है. विशाल सिक्का ने उनके साथ संबंधों को याद करते हुए कहा, ‘‘एक बार उन्होंने (मूर्ति) मुझे पेरिस मेट्रो के बारे में बताया और यह भी बताया कि इंफोसिस की शुरुआत से पहले 1970 के दशक में उन्होंने कैसे पेरिस मेट्रो पर काम किया था और यह पूरा विचार स्वचालन और स्वाचालित ड्राइविंग से जुडा था.” सिक्का आज शाम को निदेशक मंडल के कुछ सदस्यों के साथ मीडिया के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे.
इंफोसिस ने अपनी ओर से प्रबंधन में किसी भी तरह की कोताही की बात होने से इंकार किया है और कहा है कि कंपनी के सभी क्रियाकलापों के बारे में उसने ‘सभी जानकारियां’ मुहैया करायी हैं. कंपनी के पूर्व वरिष्ठ कार्यकारियों ने कंपनी के 5.25 अरब डॉलर के नकदी के ढेर पर भी चिंता जताई है. इस पर सिक्का ने कहा कि वह अपना ‘आधिकारिक’ जवाब समय-समय पर निदेशक मंडल को देते रहते हैं. यह अगर पूंजी आवंटन नीतियों से जुडा होगा और जब जरुरत होगी तो कंपनी खुद इसका खुलासा करेगी.
विशाल सिक्का ने कहा, ‘‘इस संबंध में गैर-आधिकारिक जवाब यह है कि आपको अगले 4-5 साल की परिस्थितियों पर नजर रखनी होती है और उसके लिए आपको पूंजी की जरुरत देखनी होगी. उसके आधार पर फैसला होता है. हमारे मामले में यह रणनीतिक वृद्धि के लिए पहल, बुनियादी ढाचा बनाने और उसके बाद अधिग्रहण करने के लिए पूंजी पूंजी का विषय है. उन्होंने कहा कि अगले पांच सालों में (कारोबार के) मिश्रण में किस तरह के बदलाव आएंगे, उसके आधार पर धन को खर्च करने के बारे में निर्णय लिया जाता है.
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