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RTI से खुलासा, पेट्रोलियम पदार्थों पर उत्पाद शुल्क वसूली 80.14% बढ़ी

Updated at : 08 Jun 2016 3:05 PM (IST)
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RTI से खुलासा, पेट्रोलियम पदार्थों पर उत्पाद शुल्क वसूली 80.14% बढ़ी

इंदौर : उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने के लिये पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क घटाने को लेकर सरकार भले ही फिलहाल कोई निर्णय नहीं ले सकी हो. लेकिन पेट्रोलियम पदार्थों पर इस अप्रत्यक्ष कर की वसूली में इजाफे से सरकार का खजाना भरता जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2015-16 में सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों […]

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इंदौर : उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने के लिये पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क घटाने को लेकर सरकार भले ही फिलहाल कोई निर्णय नहीं ले सकी हो. लेकिन पेट्रोलियम पदार्थों पर इस अप्रत्यक्ष कर की वसूली में इजाफे से सरकार का खजाना भरता जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2015-16 में सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों पर उत्पाद शुल्क की वसूली से 1,98,793.3 करोड रुपये का राजस्व हासिल हुआ जो इसके पिछले साल की तुलना में करीब 80.14 प्रतिशत अधिक है.

मध्यप्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत यह जानकारी हासिल हुई है. नयी दिल्ली स्थित केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क विभाग के आंकडा प्रबंधन निदेशालय की ओर से आरटीआई के तहत गौड को एक जून को भेजे गये जवाब में बताया गया कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2014-15 में पेट्रोलियम पदार्थों पर 1,10,354 करोड रुपये का उत्पाद शुल्क वसूला था.

पांच सालों में राजस्व संग्रह 116 फीसदी बढ़ा

आरटीआई के तहत मिले पिछले पांच सालों के सरकारी आंकडों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2011-12 के मुकाबले में वित्तीय वर्ष 2015-16 में पेट्रोलियम पदार्थों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क का राजस्व संग्रह 166.12 प्रतिशत बढ चुका है. वित्तीय वर्ष 2011-12 में पेट्रोलियम पदार्थों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क की वसूली से सरकारी खजाने में 74,701 करोड रुपये जमा हुए थे. इसके बाद से इस अप्रत्यक्ष कर के राजस्व में लगातार बढोतरी हो रही है. पेट्रोलियम पदार्थों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क की वसूली वित्तीय वर्ष 2012-13 में 84,898 करोड रुपये और 2013-14 में 88,600 करोड रुपये रही थी.

उत्पाद शुल्क वृद्धि से बढ़ती हैं पेट्रोलियम की कीमतें

आरटीआई से ये आंकडे हासिल करने वाले गौड ने कहा, ‘पेट्रोलियम पदार्थों पर उत्पाद शुल्क की दर बढाये जाने से तेल कम्पनियां पेट्रोल और डीजल के दामों में भी इजाफा कर देती हैं. इससे आम आदमी पर महंगाई का बोझ बढ जाता है. पेट्रोलियम पदार्थों पर सरकारी कर वसूली की एक सीमा तय होनी चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘ऐसे वक्त जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में फिर बढोतरी हो रही है, सरकार को पेट्रोलियम पदार्थो पर उत्पाद शुल्क की दर घटानी चाहिये ताकि पेट्रोल-डीजल और महंगे न हों.’

कच्चे तेल की कीमत में बढोतरी के मद्देनजर उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने के वास्ते पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाने की संभावना के सवाल पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने तीन जून को मीडिया से कहा था, ‘मैं कहता रहा हूं कि (अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम में दैनिक घट-बढ पर) बिना सोचे समझे प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की जानी चाहिए. तेल मूल्यों में तीन दिन तक लगातार गिरावट पर खुशी से उछलना नहीं चाहिए और इसके दाम तीन दिन तक लगातार बढने पर जल्दबाजी में तीव्र प्रतिक्रिया भी नहीं होनी चाहिये.’ गौरतलब है कि पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम इस साल मार्च के बाद से 9 से 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ चुके हैं.

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