खाने-पीने की चीजें हुई महंगी, थोक मुद्रास्फीति दर में वृद्धि

Updated at : 14 Dec 2015 5:50 PM (IST)
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खाने-पीने की चीजें हुई महंगी, थोक मुद्रास्फीति दर में वृद्धि

नयी दिल्ली: दाल और प्याज जैसे खाद्य पदार्थों के दाम बढने से थोकमूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति नवंबर में बढकर शून्य से 1.99 प्रतिशत पर आ गयी. इससे पिछले महीने थोक मुद्रास्फति शून्य से नीचे 3.81 प्रतिशत थी. यह लगातार 13वां महीना है जबकि थोक मुद्रास्फीति शून्य से नीचे रही. पिछले साल नवंबर से थोक […]

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नयी दिल्ली: दाल और प्याज जैसे खाद्य पदार्थों के दाम बढने से थोकमूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति नवंबर में बढकर शून्य से 1.99 प्रतिशत पर आ गयी. इससे पिछले महीने थोक मुद्रास्फति शून्य से नीचे 3.81 प्रतिशत थी. यह लगातार 13वां महीना है जबकि थोक मुद्रास्फीति शून्य से नीचे रही.

पिछले साल नवंबर से थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति शून्य से नीचे चल रही है. इसमें पिछले तीन महीने से बढोतरी हो रही है आज जारी आधिकारिक आंकडे के मुताबिक पिछले साल नवंबर में मुद्रास्फीति शून्य से 0.17 प्रतिशत नीचे थी. खाद्य मुद्रास्फीति नवंबर में बढकर 5.20 प्रतिशत हो गई जो अक्तूबर में 2.44 प्रतिशत थी.

नवंबर माह में दालों के वर्ग में मुद्रास्फीति 58.17 प्रतिशत थी जबकि प्याज के थोक भाव सालाना आधार पर 52.69 प्रतिशत उंचे थे. सब्जियां का कीमत स्तर गत वर्ष नवंबर से 14.08 प्रतिशत ऊंचा था. इस बार नवंबर में आलू के भाव साल भर पहले से 53.72 प्रतिशत नीचे रहे. जबकि अंडा, मांस एवं मछली की कीमतें 2.24 प्रतिशत नीचे रहीं. इसी दौरान ईंधन एवं बिजली के भाव 11.09 प्रतिशत और विनिर्मित उत्पादों का कीमत स्तर 1.42 प्रतिशत नीचे रहा.
सितंबर, 2015 की थोक मुद्रास्फीति का संशोधित आंकडा शून्य से 4.59 प्रतिशत नीचे कर दिया गया है. प्रारंभिक आंकडों के आधार पर इसे शून्य से 4.54 प्रतिशत नीचे बताया गया था. भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति संबंधी फैसलों के लिए अब उपभोक्त मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति के आंकडों को अधिक महत्व देता है. नवंबर की खुदरा मुद्रास्फीति का आंकडा ही घोषित किये जाने की संभावना है.
अक्तूबर में उपभोक्त मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़ कर पांच प्रतिशत पर पहुंच गयी थी.इससे पहले इसी महीने आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने मौद्रिक नति की द्वैमासिक समीक्षा में खुदरा मुद्रास्फीति के बढते दबाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढाए जाने की संभावनाओं के बीच नीतिगत दर को अपरिवर्तित रखा था.
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