नरेंद्र मोदी का ''सब्सिडी छोड़ो अभियान'', अब आ सकती है आपकी बारी

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मुंबई : अपने योजना के क्रियान्‍वयन में जो सहयोगी साबित हो इस कोई भी मौके को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छोड़ते नहीं हैं. अभी 27 मार्च को ही राजधानी में आयोजित कार्यक्रम ‘ऊर्जा संगम’ में प्रधानमंत्री ने सब्सिडी छोड़ो अभियान की औपचारिक शुरुआत की और कहा कि संपन्‍न लोग स्‍वेच्‍छा से सब्सिडी छोड़ें. प्रधानमंत्री की अपील […]

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मुंबई : अपने योजना के क्रियान्‍वयन में जो सहयोगी साबित हो इस कोई भी मौके को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छोड़ते नहीं हैं. अभी 27 मार्च को ही राजधानी में आयोजित कार्यक्रम ‘ऊर्जा संगम’ में प्रधानमंत्री ने सब्सिडी छोड़ो अभियान की औपचारिक शुरुआत की और कहा कि संपन्‍न लोग स्‍वेच्‍छा से सब्सिडी छोड़ें.

प्रधानमंत्री की अपील का असर आम लोगों पर हुआ है या नहीं यह तो कहना मुश्किल है लेकिन औद्योगिक घरानों ने इसे काफी संजीदगी से लिया है. अभी कल ही टाटा समूह ने अपने कर्मियों से एलपीजी सब्सिडी छोड़ने की अपील की है. टाटा समूह ने अपनी वेबसाइट पर कहा ‘राष्ट्रीय हित में मदद करने की परंपरा के अनुरुप टाटा कंपनियां अपने कर्मचारियों आग्रह कर रही हैं कि जो सक्षम हैं वे यदि स्वेच्छा से एलपीजी सब्सिडी छोडना चाहते हैं तो इस पर विचार करें.’

समूह ने कहा है कि मोदी की सक्षम लोगों से बाजार मूल्य पर एलपीजी खरीदने और सब्सिडी छोडने को लेकर की गयी अपील राष्ट्रहित में है. समूह ने कहा ‘भारत की ईंधन की जरुरत का बडा हिस्सा महंगे आयात से पूरा होता है और सब्सिडी की राशि का उपयोग राष्ट्र विकास के लिए होगा.’ पिछले सप्ताह मोदी ने कहा था कि 2.8 लोगों ने एलपीजी सब्सिडी छोडी है जिससे सरकारी खजाने में 100 करोड रुपये की बचत हुई है.

प्रधानमंत्री ने कहा था ‘इस राशि का उपयोग स्कूल और अस्पतालों के लिए किया जाएगा. मैं अपील करता हूं कि जो बाजार मूल्य पर एलपीजी खरीद सकते हैं वे कृपया सब्सिडी पर एलपीजी न लें’ वहीं आज रिजर्व बैंक के 80 साल होने पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने फिर से बैंककर्मियों और औद्योगिक घरानों से अपील की कि वे अपने कर्मियों को सब्सिडी छोड़ने के लिए प्रेरित करें. मोदी ने कहा कि यदि एक करोड लोग सब्सिडी छोडते हैं तो इतनी ही संख्या में गरीब परिवारों को इस स्वच्छ ऊर्जा का फायदा मिलेगा.

प्रधानमंत्री ने हाल ही में सक्षम एवं सुविधासंपन्न लोगों को सब्सिडी वाला गैस सिलेंडर छोडने के लिए ‘गिव इट अप’ (इसे छोडें) अभियान शुरू किया. इसी प्रकार मोदी जितने भी कार्यक्रम में आगे शामिल होंगे, वहां किसी ना किसी संस्‍थान को अपने कर्मियों को सब्सिडी छोड़ने के लिए प्रेरित करने की बात कह सकते हैं. इस प्रकार आपकी भी बारी आ सकती है जब प्रधानमंत्री आपके संस्‍थान से आपको सब्सिडी छोड़ने के लिए प्रेरित करने को कह सकते हैं.

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दो लाख उपभोक्‍ता स्‍वेच्‍छा से छोड़ चुके हैं सब्सिडी

रिजर्व बैंक की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अब तक करीब दो लाख उपभोक्ता इस पहल में शामिल हो चुके हैं. देश में करीब 15.3 करोड एलपीजी उपभोक्ता हैं. मोदी ने कहा, ‘मेरा मानना है कि हमारे बैंकों को अपने सभी कर्मचारियों को विश्वास में लेना चाहिए. प्रत्येक बैंक को संकल्प लेना चाहिए कि उनके कर्मचारी सब्सिडी वाला गैस सिलेंडर लेना छोडें. सभी औद्योगिक घरानों को भी यह तय करना चाहिए कि उनके कर्मचारी यह सब्सिडी छोडें.’

गरीबों को स्‍वच्‍छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए है यह अभियान

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी छोडने के लिये अभियान चलाने के पीछे सरकार का मकसद सब्सिडी बिल में बचत कर खजाना भरना नहीं है बल्कि सरकार ऐसा कर उन गरीबों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना चाहती है जो खाना पकाने के लिये लकडी जलाते हैं. उन्होंने कहा, ‘स्वेच्छा से इसे छोडें. यदि एक करोड लोग रसोई गैस सिलेंडर की सब्सिडी छोडते हैं. तो खाना पकाने के लिये लकडी का इस्तेमाल करने वाले एक करोड गरीब परिवारों को इसका लाभ मिलेगा.

लकडी जलाने से वनों का नुकसान होता है, कार्बन उत्सर्जन होता है और बच्चे धुएं में रहने को मजबूर होते हैं. मोदी ने यह भी कहा है कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना से रसोई गैस सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता आयी है और सब्सिडी का दुरुपयोग कम हुआ है. योजना के तहत सब्सिडी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डाल दी जाती है हालांकि, सिलेंडर खरीदते समय उन्हें बाजार मूल्य पर भुगतान करना होता है.

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प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण से सरकार को हुआ है 8 हजार करोड का फायदा

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से सरकार को अब तक 8,000 करोड रपये की बचत हुई है. घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को एक साल में 14.2 किलो के सब्सिडीयुक्त 12 गैस सिलेंडर दिये जाते हैं. पेट्रोलियम कंपनियों ने मौजूदा एलपीजी ग्राहकों को सब्सिडी छोडने का विकल्प दिया है. वह अपने मौजूदा कनेक्शन को बिना सब्सिडी वाले घरेलू कनेक्शन में बदल सकते हैं.

इसके लिये वह अपने वितरक को लिखित में आवेदन दे सकते हैं या www.mylpg.in पर दर्ज करा सकते हैं. वर्ष 2015-16 के बजट में पेट्रोलियम पदार्थों पर सब्सिडी पिछले वित्त वर्ष के अनुमानित 60,270 करोड रुपये के मुकाबले 30,000 करोड रुपये रखी गयी है. इस राशि में से 22,000 करोड रुपये एलपीजी सब्सिडी जबकि शेष केरोसिन के लिये रखी गयी है.

जल्द ही बायो गैस, कोल-बेड मिथेन गैस के संयंत्र लगेंगे

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने देश में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढावा देने के लिए 16 बायो गैस एवं तीन कोल-बेड मिथेन आधारित प्राकृतिक गैस भरने के संयंत्र स्थापित करने की अनुमति दी है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले दिनों कहा कि पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) एक वैकल्पिक ईंधन के तौर पर हाइड्रोजन का इस्तेमाल शुरू करने के लिए डीआइपीपी के साथ जुडा है.

उन्होंने कहा कि पेसो ने इंडियन ऑयल कारपोरेशन को फरीदाबाद स्थित उसके आर एंड डी केंद्र में हाइड्रोजन विनिर्माण इकाई लगाने एवं उसकी बिक्री करने की अनुमति दी है. साथ ही गुडगांव स्थित युनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज को हाइड्रोजन उत्पादन इकाई लगाने की अनुमति दी है. उन्‍होंने बताया कि इसके अलावा, 16 बायोगैस आधारित एवं तीन कोल-बेड मिथेन आधारित प्राकृतिक गैस भरने के संयंत्र जल्द ही स्थापित किए जाएंगे. पेसो पहले ही इस संबंध में अनुमति दे चुका है.

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