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1993 से 2010 के बीच आवंटित हुए कोयला खदान रद्द : सुप्रीम कोर्ट

Updated at : 24 Sep 2014 2:56 PM (IST)
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1993 से 2010 के बीच आवंटित हुए कोयला खदान रद्द : सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 1993 से 2010 तक आवंटित हुए कुल 218 कोयला खदानों में 214 खदानों के आवंटन को रद्द कर दिया है. जिन चार कंपनियों का आवंटन रद्द नहीं किया गया है, वे चारों कंपनियां सरकारी क्षेत्र की हैं. सरकारी कंपनी सेल, एनटीपीसी और अल्ट्रा मेगा […]

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नयी दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 1993 से 2010 तक आवंटित हुए कुल 218 कोयला खदानों में 214 खदानों के आवंटन को रद्द कर दिया है. जिन चार कंपनियों का आवंटन रद्द नहीं किया गया है, वे चारों कंपनियां सरकारी क्षेत्र की हैं. सरकारी कंपनी सेल, एनटीपीसी और अल्ट्रा मेगा विद्युत परियोजना पर इस फैसले का कोई असर नहीं होगा. उल्लेखनीय है कि इसी साल 25 अगस्त को कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए 1993 से 2010 के बीच हुए कोयला खदानों के आवंटन को अवैध घोषित कर दिया था.

शीर्ष अदालत ने अपने उस फैसले में कहा था कि पिछले दो दशक में कोल आवंटन के लिए गठित 36 स्क्रीनिंग कमेटियों ने अवैध और मनमाने तरीके से कोल ब्लॉक आवंटित किये. आवंटन में पारदर्शिता का भी अभाव था. अदालत ने चालू हो चुके 46 कोल ब्लॉकों को भी राहत नहीं दी है. अदालत ने कहा है कि संबंधित कोल कंपनियां छह महीने के अंदर खनन स्थल से हट जायें.

अटार्नी जनरल मुकुल रहतोगी ने अदालत के फैसले के बाद मीडिया को बताया कि 1993 से 2010 के बीच आवंटित हुए कोयला खदानों से जिन कंपनियों ने कोयला निकाला है, उन्हें 295 रुपये प्रति टन के हिसाब से जुर्माना सरकार को देना होगा. उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान आवंटित कोयला खदानों में सरकारी कंपनियों को छोड़ बाकी सभी का आवंटन रद्द कर दिया गया है.

उल्लेखनीय है कि सरकार ने 328 वैसे कोयला खदानों को चिह्न्ति किया था, जिनका आवंटन ऊर्जा व अन्य जरूरतों के लिए किया गया था. इनमें से 218 का आवंटन 1993 के बाद किया गया था. बाजार के जानकार के अनुसार, पहले से दबाव का सामना कर रहे ऊर्जा व मैटल कंपनियों को सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद और दबाव बढ़ सकता है. पूर्व में केंद्र सरकार ने चालू हो चुके खदानों को रद्द होने से बचाने के लिए अदालत में इस संबंध में तर्क दिया था.

मालूम हो कि कोयला घोटाले के मामले में 194 खदान सीबीआइ जांच की जद में हैं. अदालत ने आज स्पष्ट किया कि इस संबंध में उनकी टिप्पणियों का असर सीबीआइ जांच पर नहीं होगा. इस मामले में 24 कोयला खदानों का लाइसेंस भी सरकार ने पहले ही रद्द कर दिया था. कोयला घोटाले के मामले में 42 अलग-अलग प्राथमिकी भी दर्ज की गयी है. नरसिंह राव से लेकर डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल तक में अलग-अलग संख्या में कोयला खदानों को आवंटन किया गया था. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली पिछली एनडीए सरकार ने भी अपने कार्यकाल में 33 कोयला खदानों का आवंटन किया था. कोल ब्लॉक में गड़बड़ी का मामला डॉ मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्वकाल में चर्चा में आया था. आवंटित किये गये कोल ब्लॉक महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के हैं.

उल्लेखनीय है कि इस मामले की एक सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा था अगर हो सके तो 46 वैसे कोल ब्लॉक को रद्द करने से छूट दी जाये, जहां काम शुरू हो चुका है. उस समय उन्होंने कहा था कि देश में बिजली की हालत ठीक नहीं है, और जल्द दोबारा आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जाये. वहीं, नौ सितंबर को इस मामले में केंद्र सरकार के तरफ से कहा गया था कि जो ब्लॉक्स चल रहे हैं, उन्हें कोल इंडिया के हवाले कर दिया जाये. टू जी स्प्रेक्ट्रम की तर्ज पर नये आवंटन तक शुरू हो चुके 46 ब्लॉक्स को चलने दिया जाये.

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