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भारतीय ग्राहकों के लेन-देन आंकड़ों का स्थानीय स्तर पर संग्रहण इस साल के अंत तक पूरा होगा : मास्टरकार्ड

Updated at : 13 May 2019 2:28 PM (IST)
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भारतीय ग्राहकों के लेन-देन आंकड़ों का स्थानीय स्तर पर संग्रहण इस साल के अंत तक पूरा होगा : मास्टरकार्ड

नयी दिल्ली : भुगतान क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मास्टरकार्ड ने भारतीय ग्राहकों के लेन-देन से जुड़े आंकड़ों को अमेरिकी सर्वरों से हटाना शुरू कर दिया है. उन्हें भारत में संग्रहीत करने का काम भी चालू कर दिया है. इस काम के 2019 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है. एक शीर्ष अधिकारी ने यह […]

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नयी दिल्ली : भुगतान क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मास्टरकार्ड ने भारतीय ग्राहकों के लेन-देन से जुड़े आंकड़ों को अमेरिकी सर्वरों से हटाना शुरू कर दिया है. उन्हें भारत में संग्रहीत करने का काम भी चालू कर दिया है. इस काम के 2019 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है. एक शीर्ष अधिकारी ने यह बात कही.

कंपनी ने यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक के उस आदेश के बाद उठाया है, जिसमें उसने भुगतान से जुड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों को स्थानीय स्तर (भारत में) पर ही लेन-देन के आंकड़े संग्रहीत करने के लिए कहा था. हालांकि, मास्टरकार्ड ने पिछले साल अक्टूबर से ही भारतीय सर्वरों में आंकड़े संग्रहीत करने का काम शुरू कर दिया था. यह अमेरिका में संग्रहीत आंकड़ों की नकल है.

मास्टरकार्ड के एशिया प्रशांत क्षेत्र के सह-अध्यक्ष अरी सरकार ने कहा, ‘अक्टूबर 2018 से आंकड़ों को भारत में संग्रहीत किया जा रहा है. यह पहला चरण है. हमारे लिए सिर्फ भारत में ही संग्रहीत करके रखे जाने वाले आंकड़े चिंता का विषय हैं, क्योंकि यह सिर्फ कुछ सर्वर लगाने की बात नहीं है.’

उन्होंने कहा कि मास्टरकार्ड रिजर्व बैंक के साथ बातचीत कर रही है और नियामक की जरूरतों के मुताबिक, नियमों का अनुपालन करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. सरकार ने कहा, ‘हम सकारात्मक महसूस कर रहे हैं. हम पहले से कार्यान्वयन प्रक्रिया में हैं. डेटा प्रतिरूपण (नकल) वास्तव में तीन चरणों में पूरा होगा, क्योंकि यह काफी जटिल है. यह सिर्फ कुछ सर्वर लगाने की बात नहीं है.’

पहला चरण पांच मई से शुरू हुआ है, जिसमें टोकन के रूप में लेन-देन से जुड़े आंकड़ों के कुछ हिस्से भारत में ही उपलब्ध होंगे. लेन-देन अधिकृत करने के काम जैसे अन्य चरणों पर कंपनी अनुपालन कर रही है. उन्होंने कहा, ‘टोकन वॉल्ट और इसी तरह की अन्य चीजें भारत में ही बनेंगी. यह हमारी बड़ी कहानी का हिस्सा होगी, अगले कुछ महीनों में हम ऐसा करने में सक्षम होंगे. दिसंबर अंत तक लेनदेन से जुड़ी सभी चीजों को भारत में ही संग्रहीत रखेंगे.’

मास्टरकार्ड ने भारतीय बाजार के लिए अगले पांच साल (2024) में एक अरब डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जतायी है. इससे पहले 2014-19 के लिए भी एक अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जतायी गयी थी.

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