शुरुआती नुकसान से उबरकर बाजार में तेजी बरकरार, 77 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ सेंसेक्स
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Dec 2018 6:12 PM
मुंबई : दुनिया भर के बाजारों में बिकवाली हावी होने की वजह से मंगलवार को शुरुआती कारोबार में घरेलू शेयर बाजारों में नरमी का माहौल रहने के बाद दिन भर के कारोबार में दवा, धातु और पूंजीगत वस्तु बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में लिवाली बढ़ने से घरेलू शेयर बाजारों में मजबूती दिखी. बंबई स्टॉक […]
मुंबई : दुनिया भर के बाजारों में बिकवाली हावी होने की वजह से मंगलवार को शुरुआती कारोबार में घरेलू शेयर बाजारों में नरमी का माहौल रहने के बाद दिन भर के कारोबार में दवा, धातु और पूंजीगत वस्तु बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में लिवाली बढ़ने से घरेलू शेयर बाजारों में मजबूती दिखी. बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सेंसेक्स मंगलवार को शुरुआती नुकसान से उबरकर 77 अंकों की तेजी के साथ 36,347 अंक पर बंद हुआ. बाजार बंद होने से पहले मुख्य रूप से दवा, धातु तथा पूंजीगत वस्तुएं बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में लिवाली निकलने से यह तेजी आयी.
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वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी तथा रोजमर्रा के उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गयी. यह लगातार छठा कारोबारी दिन है, जब बाजार में तेजी दर्ज की गयी. इसके अलावा, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 10,900 अंक के ऊपर बंद हुआ. भारी लिवाली और बिकवाली के बीच बीएसई सेंसेक्स में 329 अंक के दायरे में उतार-चढ़ाव रहा.
30 शेयरों वाला सेंसेक्स सुबह गिरावट के साथ 36,226.38 अंक पर खुला और वैश्विक बाजारों में गिरावट के असर से प्रभावित कारोबार में एक समय बिकवाली के दबाव में 36,046.52 अंक तक नीचे चला गया था. हालांकि, दोपहर बाद के कारोबार में भारी लिवाली से स्थिति पलटी और सेंसेक्स 36,375.38 अंक तक चला गया. अंत में यह 77.01 अंक या 0.21 फीसदी की बढ़त के साथ 36,347.08 अंक पर बंद हुआ. पिछले पांच कारोबारी दिनों में सेंसेक्स 1,310 अंक से अधिक मजबूत हुआ है.
वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई का निफ्टी भी 20.35 अंक या 0.19 फीसदी की तेजी के साथ 10,908.70 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह 10,819.10 से 10,915.40 अंक के दायरे में रहा. कारोबारियों के अनुसार, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के भाव में नरमी अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर है, क्योंकि इससे आयात बिल का बोझ कम होगा. इससे डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में तेजी से भी बाजार धारणा को बल मिला.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शेयर बाजारों में गिरावट का रुख रहा. वॉल स्ट्रीट में सोमवार के नुकसान का असर दुनिया के अन्य बाजारों पर पड़ा. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मंगलवार से शुरू दो दिवसीय बैठक से पहले निवेशक थोड़े सतर्क रहे. अमेरिकी फेडरल रिजर्व 19 दिसंबर को नीतिगत फैसले की घोषणा कर सकता है और वहां बाजार को लगता है कि ब्याज दर में वृद्धि की जा सकती है.
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