Petrol-Diesel की कीमतों ने तोड़ा पांच साल का रिकॉर्ड, फिर बढ़ने लगे हैं क्रूड ऑयल के दाम

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 May 2018 6:20 PM

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नयी दिल्ली : देश में पेट्रोलियम पदार्थों को बाजार के हवाले करने के बाद आम उपभोक्ताओं और वाहन चालकों के लिए आवश्यक ईंधन पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों की रफ्तार थमने का नाम ही नहीं ले रही है. पेट्रोल की लगातार बढ़ती हुई कीमत दिल्ली और मुंबई में अब तक की सबसे अधिक ऊंचाई पर पहुंच […]

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नयी दिल्ली : देश में पेट्रोलियम पदार्थों को बाजार के हवाले करने के बाद आम उपभोक्ताओं और वाहन चालकों के लिए आवश्यक ईंधन पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों की रफ्तार थमने का नाम ही नहीं ले रही है. पेट्रोल की लगातार बढ़ती हुई कीमत दिल्ली और मुंबई में अब तक की सबसे अधिक ऊंचाई पर पहुंच गयी है और सोमवार को यह क्रमश: 76.57 रुपये और 84.49 रुपये रही.

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कोलकाता-चेन्नई में ईंधन की कीमतों ने तोड़ा पांच साल का रिकॉर्ड

रविवार को ईंधन की कीमतों ने ऊंचाई के अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिये थे. इससे पहले साल 2013 में पेट्रोल की कीमतें दिल्ली और मुंबई में क्रमश: 76.24 रुपये और 84.07 रुपये रही थी. सोमवार को अन्य प्रमुख शहरों जैसे कोलकाता और चेन्नई में ईंधन कीमतें पांच साल में सबसे अधिक ऊंची रहीं. सोमवार को कोलकाता में पेट्रोल का मूल्य 79.24 रुपये और चेन्नई में 79.47 रुपये प्रति लीटर रहा.

सरकार की ओर से वसूली जा रही टैक्स की ऊंची दर

पर्यवेक्षकों के मुताबिक, ईंधन की कीमतों में इजाफे का कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सरकार की ओर से इन पर वसूले जा रहे कर की उच्च दरें हैं. सोमवार को कच्चे तेल की कीमत 79 डॉलर प्रति बैरल (एक बैरल में 159 लीटर) रही.

डीजल की कीमतों ने भी तोड़े रिकॉर्ड

डीजल की कीमतें भी पहले ही अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच चुकी है और देश भर में महंगा बिकने का नया रिकॉर्ड बना रही हैं. सोमवार को दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में डीजल क्रमश: 67.82 रुपये, 70.37 रुपये, 72.21 रुपये और 71.59 रुपये प्रति लीटर कीमत पर बिका.

उद्योग जगत की सरकार से ईंधन पर उत्पाद शुल्क घटाने की मांग

भारतीय उद्योग जगत ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि पर चिंता जताते हुए सरकार से ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती की मांग की है. उनका कहना है कि इससे भारत की आर्थिक वृद्धि प्रभावित होगी. उद्योग मंडल फिक्की और एसोचैम ने भी ईंधन की बढ़ती कीमतों के दीर्घकालिक समाधान के लिए पेट्रोल-डीजल को वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) प्रणाली के तहत लाने के लिए कहा है. साथ ही, कहा कि रुपये की कमजोरी से देश का ईंधन आयात पर खर्च भी बढ़ने की संभावना है, जो अंतत : मुद्रास्फीति को प्रभावित करेगा.

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर

फिक्की के अध्यक्ष राशेष शाह ने कहा कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें एक बार फिर तेजी के रुख पर हैं. साथ ही, ऊंची मुद्रास्फीति से वृहद-आर्थिक जोखिम, ऊंचा व्यापार घाटा और रुपये के मूल्य में गिरावट के चलते भुगतान संतुलन पर दबाव का भी असर होगा. उन्होंने कहा कि इसके अलावा रुपये में कमजोरी से देश का आयात बिल भी बढ़ेगा. इसके अलावा मौद्रिक नीति के सख्त बने रहने का भी जोखिम है, जो निजी निवेशक को प्रभावित करेगा.

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