पनामा पेपर मामले की तरह करायेंगे पैराडाइज पेपर मामले की जांच : अरुण जेटली
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Nov 2017 4:10 PM
नयी दिल्ली : वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आज सोशल मीडिया के माध्यम से नोटबंदी पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का जवाब देने के बाद प्रेस कान्फ्रेंस कर भी उनके सवालों का जवाब दिया और साल भर पूर्व की अपनी सरकार के फैसले को उचित बताया और नोटबंदी की घोषणा को ऐतिहासिक क्षण करार दिया. […]
नयी दिल्ली : वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आज सोशल मीडिया के माध्यम से नोटबंदी पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का जवाब देने के बाद प्रेस कान्फ्रेंस कर भी उनके सवालों का जवाब दिया और साल भर पूर्व की अपनी सरकार के फैसले को उचित बताया और नोटबंदी की घोषणा को ऐतिहासिक क्षण करार दिया. उन्होंने कहा कि काला धन की बीमारी को दूर करने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है. इस दौरान पैराडाइज पेपर खुलासे पर वित्तमंत्री ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले की जांच के लिए वही प्रक्रिया फाॅलो करेगी जो उसने पनामा पेपर की जांच में फॉलो किया था.
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पनामा में जो नाम आये उसमें केसेज आये और उस पर नोटिस हुआ. जिनके खिलाफ एविडेंस मिल पाये उनके खिलाफ एक्शन लेने की प्रक्रिया है.जेटलीने कहा किऐसे लेन-देनके मामले में कुछ लोग कहते हैं कि यह हमारा कानूनी लेन-देन है, हमने आरबीआइ के इजाजत से किये हैं. कुछ लोग कहते हैं कि यह पैसा एनआरआइ का है.जेटलीने कहा कि ऐसे में पनामा की प्रक्रिया को ही हम पैराडाइज की तरह फॉलो करेंगे. उन्होंने कहा कि इसकी वैधानिकता एवं अवैधानिकता को जांचने की एक प्रक्रिया है.
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नोटबंदी पर उन्होंने कहा कि डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़े यह हमारा प्रयास था. एक वर्ष पहले देश में हजारों तरह के ट्रांजेक्शन डिजिटल माध्यम से हो यह कल्पना की जा सकती थी क्या? उन्होंने कहा कि यह कल्पना आठ नवंबर के बाद से आकार ले रही है. आठ नवंबर के विमुद्रीकरण से ये प्रक्रियाएं सामने आयीं हैं. जेटली ने कहा कि हमारी सरकार ने ढांचागत सुधार के लिए कई कदम उठाये.
उन्होंने कहा कि विमुद्रीकरण से आतंकवाद की फंडिंग पर रोक लग रही है और शेल कंपनियों की आसानी से पहचान हो रही है. भाजपा मुख्यालय में प्रेस कान्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि इस देश को विकसित अर्थव्यवस्था बनना है तो लो कैश इकोनॉमी बनना जरूरी है.
पनामा पेपर्स लीक मामले में लगभग सात अरब 92 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का पता चला है. पांच मामलों में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया. इस मामले की जांच कर रही मल्टी एजेंसी ग्रुप ने अबतक सात रिपोर्ट सौंपी है और जांच जारी है.
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