मुंबई में बोकारो के सुरेंद्र दास ने गाड़े सफलता के झंडे, 150 लोगों को दिया रोजगार, आमिर खान से है कनेक्शन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Jan 2023 10:54 AM
बोकारो जिला (Bokaro District) के गोमिया प्रखंड के बेलाटांड गांव (Belatand Village) निवासी सुरेंद्र दास महज 10 साल की उम्र में मुंबई चले गये थे. यहां उन्होंने कई काम किये. सेठ के यहां नौकरी की. आमिर खान और प्रेम चोपड़ा जैसे बॉलीवुड के कलाकारों की गाड़ी चलायी. लेकिन, नौकरी में मन नहीं लगा.
झारखंड (Jharkhand) राज्य रत्नगर्भा है. खनिज संपदा से परिपूर्ण इस राज्य में प्रतिभा की भी कोई कमी नहीं है. झारखंड से निकलकर देश के अलग-अलग हिस्सों में गये लोगों ने अपनी मेहनत के दम पर मुकाम बनाया है. ऐसे ही एक व्यक्ति हैं सुरेंद्र दास. महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में आज वह करीब डेढ़ सौ युवकों को रोजगार दे रहे हैं.
झारखंड के बोकारो जिला के गोमिया प्रखंड के बेलाटांड गांव निवासी सुरेंद्र दास महज 10 साल की उम्र में मुंबई चले गये थे. यहां उन्होंने कई काम किये. सेठ के यहां नौकरी की. आमिर खान और प्रेम चोपड़ा जैसे बॉलीवुड के कलाकारों की गाड़ी चलायी. लेकिन, नौकरी में मन नहीं लगा. अंतत: व्यवसाय शुरू करने का मन बनाया. व्यवसाय शुरू किया और आज करीब डेढ़ सौ लोगों को रोजगार दे रहे हैं.
सुरेंद्र दास के मुंबई जाने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. सुरेंद्र दास के मौसेरे भाई एक बार उनके यहां आये थे. मुंबई में रहने वाले अपने मौसेरे भाई का पहनावा देखकर सुरेंद्र काफी प्रभावित हुए. उन्होंने भी मुंबई जाने का मन बना लिया. वर्ष 1994 में मौसेरे भाई के साथ मुंबई पहुंच गये. उस वक्त सुरेंद्र की उम्र सिर्फ 10 वर्ष थी. बोकारो के एक छोटे से गांव से मायानगरी मुंबई पहुंचे सुरेंद्र को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा.
Also Read: गिरिडीह के राजू पासवान का बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर से है अनोखा रिश्ता, दोनों साथ मनाते हैं जन्मदिनकभी चाय की दुकान में काम की, तो कभी सेठ के यहां नौकरी. इसी दौरान 1999 में उनके पिता का निधन हो गया. जीवन और कष्टमय हो गया. संघर्ष और बढ़ गया. 20 वर्ष के हुए, तो उन्होंने गाड़ी चलाना सीखा. एक सेठ के यहां ड्राइवर की नौकरी करने लगे. बॉलीवुड के फिल्म स्टार आमिर खान के यहां ड्राइवर की नौकरी की. सुरेंद्र दास ने हिंदी फिल्मों के जाने-माने खलनायक रहे प्रेम चोपड़ा की भी गाड़ी चलायी.

सुरेंद्र दास ने नौकरी छोड़कर ठेला लगाना शुरू किया. ठेले पर खाने-पीने का सामान बेचने लगे. व्यवसाय से जुड़ने केबाद समाजसेवा में भी जुट गये. देखते ही देखते उन्होंने बेरोजगार लोगों को स्वरोजगार से जोड़ना शुरू कर दिया. आज उनकी मदद से मुंबई के रिहायशी इलाकों में करीब डेढ़ सौ लोगों को रोजगार मिला है. बता दें कि बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुरेंद्र दास महज पांचवीं तक ही पढ़ पाये थे.
Also Read: 14 साल की उम्र में गिरिडीह से मुंबई गये कृष्ण कुमार दास हैं प्रोडक्शन मैनेजर, 150 लोगों को दे रहे रोजगारझारखंड के ही हजारीबाग जिला के विष्णुगढ़ प्रखंड के मोहन दास बिजनेस को चलाने में सुरेंद्र दास की मदद करते हैं. सुरेंद्र दास सामाजिक कार्यों के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय हैं. मुंबई में उत्तर मुंबई भारतीय जनता पार्टी (झारखंड सेल) के जिला अध्यक्ष भी हैं. स्वयंसेवी संस्था ‘सहयोग जीवन फाउंडेशन’ का भी संचालन कर रहे हैं.
ठाकुर मनोज कुमार सिंह और प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर अभियान संगठन के वरीय पदाधिकारी प्रेम कुमार को वह अपना आदर्श मानते हैं. मुंबई में रहने वाले झारखंड के लोगों के लिए वह किसी दूत से कम नहीं हैं. कोई भी व्यक्ति किसी भी मुश्किल में हो, तो उसकी मदद के लिए सुरेंद्र दास पहुंच जाते हैं. उनका कहना है कि जीवन में कितनी भी मुश्किलें आयें, कभी घबरायें नहीं. लगातार संघर्ष करते रहें. संघर्ष करेंगे, तो निश्चित तौर पर सफलता मिलेगी.
रिपोर्ट: नागेश्वर, गोमिया, बोकारो
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