राजेंद्र सिंह के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ शिबू सोरेन भी पहुंचे
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 26 May 2020 3:20 PM
राजेंद्र सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए दिशोम गुरू शिबू सोरेन (Shibu Soren)भी उनके आवास पहुंचे. बता दे कि जब रात 11: 30 बजे राजेन्द्र सिंह का पार्थिव शरीर बोकारो के बेरमो स्थित उनके आवास लाया गया. तब से ही भारी संख्या में उनके चाहने वालों की भीड़ उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रही है. लॉकडाउन (Lockdown) के बावजूद बोकारो और धनबाद से लोगों आ रहे हैं. सभी सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए राजेंद्र बाबू का बारी-बारी से अंतिम दर्शन कर रहे है.
बेरमो : राजेंद्र सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए दिशोम गुरु शिबू सोरेन भी उनके आवास पहुंचे. बता दे कि जब रात 11: 30 बजे राजेन्द्र सिंह का पार्थिव शरीर बोकारो के बेरमो स्थित उनके आवास लाया गया. तब से ही भारी संख्या में उनके चाहने वालों की भीड़ उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रही है. लॉकडाउन के बावजूद बोकारो और धनबाद से लोगों आ रहे हैं. सभी सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए राजेंद्र बाबू का बारी-बारी से अंतिम दर्शन कर रहे है. इतनी भीड होने के बावजूद लॉक डाउन के नियमों का पूरी तरह से पालन किया गया. सामाजिक दूरी के अलावा सभी लोगों ने मास्क पहन रखे थे.
Also Read: नहीं रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह, जानें उनके राजनीतिक सफर के बारे में…राजेंद्र बाबू के पार्थिव शरीर तक पहुंचने से पहले कांग्रेस के कार्यकर्ता हरएक को सेनेटाइज करते जा रहे थे. साथ ही मुख्य द्वार के समक्ष ही सभी की थर्मो स्क्रीनिंग भी की जा रही थी. ढोरी स्टॉफ क्वार्टर स्थित राजेंद्र सिंह के आवास के बाहर 15-20 की संख्या में पंडाल लगाये थे, जहां दूरी बनाकर हर पंडाल में 20-20 लोगों के बैठने की व्यवस्था थी. अंतिम दर्शन के लिए राजेंद्र सिंह के परिवार के लोगों के अलावा कांग्रेस, इंटक, आरसीएमएस के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने लॉक डाउन के नियमों का पूरी तरह से पालन किया.
राजेंद्र सिंह के बडे पुत्र कुमार जयमंगल ने भी शव आने से पहले ही सभी से लॉक डाउन के नियमों का पालन करने की अपील की थी. अंतिम दर्शन के लिए आज अहले सुबह से दोपहर तक काफी लंबी कतार लगी हुई थी. कई लोगों ने चिलचिलाती धूप व इतनी गरमी के बावजूद घंटो लाइन में लगकर कांग्रेस व इंटक के दिग्गज नेता राजेंद्र बाबू का अंतिम दर्शन किया. हजारों की संख्या में पहुंचे महिला और पुरुषों की आंखे नम थी. इस मौके पर उमड़ा जनसैलाब यह बताता है कि राजेंद्र सिंह ने सभी वर्गों के लोगों के हृदय में जगह बनाई थी.
Also Read: धनबाद के सिंदरी रोड की युवती मिली कोरोना पॉजिटिव, कोविड अस्पताल में चल रहा इलाजइतना प्यार कोयलांचल की संसदीय व श्रमिक राजनीति में बहुत ही दुर्लभ नेताओं को नसीब होता है. ऐसा नही है कि इसमें उनकी पार्टी व यूनियन के लोग ही शामिल थे बल्कि सभी धर्म,संप्रदाय के लोग, विभिन्न राजनीतिक दलों से जुडे लोगों के अलावा विभिन्न ट्रेड यूनियन से जुडे लोग भी भारी संख्या में शामिल होकर कांग्रेस व इंटक के इस दिग्गज नेताओं को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी. श्रद्धांजलि देने वालों में राज्य के मुख्यमंत्री के अलावा कई मंत्री, पूर्व मंत्री, सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक के अलावा इंटक, आरसीएमएस,कांग्रेस, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, असंगठित इंटक, टाटा वर्कर्स यूनियन से जुडे पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल हुए. कोल इंडिया अंतर्गगत सीसीएल, बीसीसीएल व इसीएल के अलावा डीवीसी, एसआरयू के भी कई बडे अधिकारी पहुंचे तथा अंतिम दर्शन किया. झारखंड के हर जिला के अलावा कोयलांचल के हर हिस्से से लोग आये, बिहार, उत्तरप्रदेश से भी कई लोग आये. फुसरो बाजार की तमाम व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे.

झामुमो व विस्थापित नेता काशीनाथ केवट ने कहा कि यह अद्भुत संयोग है कि राजेंद्र सिंह ने अपने मंत्रीत्व काल में दामोदर नदी पर जिस पुल का निर्माण कराया, वहीं आज उनका अंतिम संस्कार हुआ. कहा कि प्रस्तावित चांदो प्रखंड के लोग राजेंद्र बाबू की इन कृतियों को हमेशा याद रखेंगे. चलकरी स्थित दामोदर नदी में पुल बनाने की मांग आजादी के बाद से ही शुरू हो गयी थी. चलकरी को बेरमो, जरीडीह बाजार, करगली, फुसरो से जोड़ने के लिए बीच में अवस्थित दामोदर नदी एक बड़ा अवरोध बना हुआ था. इस नदी में कोई पुल के अभाव में चलकरी समेत दर्जनों गांव टापू बन गये थे.
Also Read: सावधान! झारखंड में भीषण गर्मी का कहर जारी, मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए जारी किया येलो अलर्टमहज आधा किलोमीटर की दूरी पर नदी के उस पार इन स्थानों पर जाने के लिए ग्रामिणों को मिलों दूर घुमावदार रास्ते का सफर तय करना पड़ता था. बरसात के मौसम में उफनती बाढ़ के कारण लोग अपनी जान जोखिम में डालकर सीमल लकड़ी या नाव के सहारे नदी पार किया करते थे. आम दिनों में भी गंभीर रूप से बीमार पड़नेवाले मरीजों को खटिया पर टांगकर हॉस्पीटल पहुंचाया जाता था. अधिकतर लोग इस गांव में सिर्फ इसलिए ही रिश्ता स्वीकार नहीं करते थे क्योंकि यहां आवागमन के लिए कोई पुल नहीं था. जब सूबे में हेमंत सोरेन की सरकार में राजेंद्र प्रसाद सिह मंत्री बने तो बेरमो-करगली के मुख्य सड़क को चलकरी से जोड़ने के लिए दो-दो पुल की सौगात दी.
ग्रामीण व कोलियरी क्षेत्र से पहुंची कई महिलाओं ने कहा, हमनी के चिंता फिकर नेताजी करो हलो. कोई बात लेकर यहां आवे पर नेताजी बैठकर हमनी के सब बतवा सुईन के कमवा करा हलो. सभी महिलाएं मास्क पहनकर ही आ रही थी. कई महिलाएं लगातार अपने आंचल से आंसू को पोछे जा रही थी. बेरमो के करगली बाजार के पहुंचे एक बुजुर्ग राजेंद्र विश्वकर्मा ने कहा कि राजेंद्र बाबू से हमारा काफी पुराना संबंध रहा. हम उनसे छोटे हैं लेकिन आज काफी उदास मन से उनका अंतिम दर्शन कर रहे हैं. अब कभी राजेंद्र बाबू का दमकता व चमकता चेहरा नहीं देख पायेंगे. लेकिन वो हम सबों के बीच ही रहेंगे.
सामाजिक कार्यकर्ता व उपभोक्ता फोरम से जुड़ी शबनम परवीन कहती है कि झारखंड की राजनीति में ऐसा शख्सियत हमने नहीं देखा. मुझे हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने में राजेंद्र बाबू का ही मार्गदर्शन रहा. हर ईद में मेरे घर में उनकी मौजूदगी होती थी, अब काफी खलेगा. अब उनकी स्मृतियां ही मानस पटल पर अंकित हैं. अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे कई लोगों ने आज बातचीत में कहा कि राजेंद्र बाबू काफी व्यवहार कुशल व मृदभाषी थे. हमेशा चेहरे पर मुस्कान, कभी किसी के प्रति आक्रोश नहीं दिखा. कई लोगों ने कहा बेरमो के विकास के लिए राजेंद्र बाबू ने काफी कुछ किया.
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