Vaishali Vidhan Sabha: 2020 से जदयू का है इस सीट पर कब्जा, महागठबंधन के सामने बड़ी चुनौती
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 11 Jul 2025 6:05 PM
सांकेतिक फोटो
Vaishali Vidhan Sabha: बिहार के उत्तरी भाग में स्थित प्राचीन वैशाली न केवल राज्य का बल्कि पूरे भारत का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से एक बेहद महत्वपूर्ण स्थल रहा है. कभी यह नगर वज्जिक महासंघ की राजधानी था, जिसे विश्व का पहला गणराज्य माना जाता है. यह गौरवशाली नगर आज के तिरहुत प्रमंडल के वैशाली जिले में स्थित है, जिसकी ऐतिहासिक गहराई बुद्ध और महावीर के युग से भी पहले की है.
Vaishali Vidhan Sabha: छठी शताब्दी ईसा पूर्व में स्थापित वैशाली का नाम बौद्ध और जैन दोनों परंपराओं में अत्यंत आदर से लिया जाता है. भगवान बुद्ध ने यहीं 483 ईसा पूर्व में अपना अंतिम उपदेश दिया और इसके लगभग सौ वर्षों बाद 383 ईसा पूर्व में राजा कालाशोक ने यहीं द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन करवाया. आज भी सम्राट अशोक द्वारा स्थापित अशोक स्तंभ वैशाली के इसी गौरवशाली अतीत की निशानी के रूप में खड़ा है. यह स्तंभ न केवल बौद्ध धर्म के इतिहास का प्रतीक है, बल्कि यह अशोक के तीर्थाटन की स्मृति को भी जीवित रखता है.
वैशाली का इतिहास बुद्ध से भी पुराना है. यह लिच्छवि गणराज्य की राजधानी थी और अपने समय का एक समृद्ध, विकसित और लोकतांत्रिक नगर था. शिशुनाग वंश के शासनकाल में यहां की राजनीतिक महत्ता इतनी थी कि राजधानी को पाटलिपुत्र से वैशाली स्थानांतरित कर दिया गया था.
राजनीतिक पटल पर वैशाली: अतीत से वर्तमान तक
आज की वैशाली कभी जिस लोकतंत्र की जननी थी, वह अब एक सामान्य प्रशासनिक ब्लॉक भर रह गई है. 1967 में गठित वैशाली विधानसभा क्षेत्र पहले कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. 16 विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने पांच बार जीत दर्ज की, लेकिन 2000 के बाद क्षेत्रीय दलों ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली. खासकर जेडीयू ने पिछले 20 वर्षों में लगातार पांच बार यह सीट अपने नाम की है.
2020 के चुनाव में जेडीयू प्रत्याशी सिद्धार्थ पटेल ने कांग्रेस के संजीव सिंह को 7,413 वोटों से हराया. भाजपा ने परंपरागत रूप से यह सीट अपने सहयोगी दलों के लिए छोड़ी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में एलजेपी (रामविलास) ने इस संसदीय क्षेत्र में सभी छह विधानसभा सीटों पर बढ़त बना ली.
ग्रामीण क्षेत्र की पहचान और मतदाता आंकड़े
वैशाली पूरी तरह से एक ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र है. यहां कोई शहरी मतदाता नहीं है. 2020 में इस क्षेत्र में 345163 मतदाता थे, जिनमें 20.47% अनुसूचित जाति और 12.8% मुस्लिम मतदाता थे. उस वर्ष मात्र 59.05% मतदान हुआ, यानी लगभग 41% मतदाताओं ने वोट नहीं डाला. यह स्थिति उस भूमि के लिए दुखद है जिसे दुनिया का पहला गणराज्य कहा जाता है.
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गौरवशाली इतिहास की छाया में वर्तमान
आज का वैशाली अपने भव्य अतीत की मात्र छाया बनकर रह गया है. जहां कभी लोकतंत्र, सांस्कृतिक समृद्धि और आध्यात्मिक चेतना की मिसाल थी, वहीं अब यह क्षेत्र सामान्य ग्रामीण जीवन और राजनीतिक उपेक्षा का शिकार है. हालांकि राज्य और केंद्र सरकारें यहां के पर्यटन विकास के लिए प्रयास कर रही हैं, लेकिन वैशाली अभी भी अपने ऐतिहासिक गौरव को पुनर्जीवित करने से कोसों दूर है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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